जरा संभलकर यहां बदनाम है ’कुल्फी’ और लड्डू है ’ठग्गू’

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जरा संभलकर यहां बदनाम है ’कुल्फी’ और लड्डू है ’ठग्गू’

फिर भी दुनिया है इनके स्वाद की दीवानी

कानपुर। दोस्तों अगर आप कानपुर के सफर हैं तो जरा संभलकर, यहां बदनाम है ’कुल्फी’ और लड्डू है ’ठग्गू’, लेकिन फिर भी दुनिया है इनके स्वाद की दीवानी। में राकेश बिजल्वाण अपने मित्र और टीम विचार एक नई सोच के मेरठ संयोजक और सह संपादक विपिन जैन के साथ जा पहुंचा कानपुर की उस मशहूर दुकान पर। जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां की कुल्फी बदनाम है और लड्डू ठग्गू हैं।

देशभर में दुकानदार जहां अपनी मिठाइयों की तारीफ में बढ़चढ़ कर बातें लिखते हैं। वहीं कानपुर में काजू के स्वादिष्ट लड्डू बनाने वाली इस दुकान के साइन बोर्ड पर ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको हमने ठगा नहीं लिखा है। जितनी लोकप्रियता इस दुकान की है, उतना ही आकर्षक है इसका साइन बोर्ड।

फिल्म बंटी-बबली का ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको हमने ठगा नहीं गाना आपने जरूर सुना होगा। आपको जानकार हैरानी होगी कि इसके बोल कानपुर के एक मशहूर लड्डू के दुकान की थीम से लिए गए हैं।

ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको हमने ठगा नहीं

बात खानपान की हो और कानपुर का जिक्र न आए, यह कैसे हो सकता है। यदि कभी आपको कानपुर से रूबरू होने का मौका मिला होगा, तो आपने यहाँ के ठग्गू के लड्डू का नाम सुना होगा।

शुद्ध खोये, रवा और काजू के स्वादिष्ट लड्डू बनाने वाली इस दुकान के साइन बोर्ड पर ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको हमने ठगा नहीं लिखा है। यह दुकान शहर का सबसे मशहूर दुकान है।

यहां ठग्गू के लड्डू के अलावा बदनाम कुल्फी भी मिलती है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इसके स्वाद के दीवाने हैं।

बदनाम कुल्फी के टेस्ट का क्या कहना

ठग्गू के लड्डू की दुकान के मालिक प्रकाश पांडेय के मुताबिक, बदनाम वही होता है, जिसका नाम होता है। बदनामी उसी की होती है, जो फुटपाथ पर बिकती है। महलों में बिकने वाले बदनाम नहीं होती।

यही खासियत है उनकी कुल्फी की। इसके लिए उनकी दुकान पर दूर-दराज से ग्राहक आते हैं और बड़े चाव से इसका स्वाद लेते हैं।

50 साल से शहर के लोगों के जुबान पर राज करने वाली बदनाम कुल्फी के टेस्ट का क्या कहना।

खोया, मेवा और खोए से निर्मित ये स्पेशल कुल्फी बनाने में कई घंटे लगते हैं।

इसको जमाने के लिए भी स्पेशल टेक्निक का यूज किया जाता है इस स्पेशल कुल्फी की बात निराली है।


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