रक्षाबंधन के शुभ मूहर्त के बारे में बता रहे हैं श्री गुरुराम राय लक्ष्मण संस्कृत महाविद्यालय देहरादून के प्राचार्य डॉ राम भूषण बिजल्वाण

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रक्षाबंधन के शुभ मूहर्त के बारे में बता रहे हैं श्री गुरुराम राय लक्ष्मण संस्कृत महाविद्यालय देहरादून के प्राचार्य डॉ राम भूषण बिजल्वाण

धर्म संस्क्रति । श्री गुरुराम राय लक्ष्मण संस्कृत महाविद्यालय देहरादून के प्राचार्य डॉ राम भूषण बिजल्वाण के मुताबिक इस वर्ष रक्षाबंधन 3 अगस्त सोमवार को पड़ रहा है । 558 साल बाद सावन माह की पूर्णिमा पर गुरु और शनि अपनी-अपनी राशि में वक्री रहेंगे। रक्षाबंधन के दिन सुबह 9:29 बजे तक भद्रा रहेगी। भद्रा के बाद ही बहनों को अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधना चाहिए। 9.29 के बाद पूरे दिन राखी बांध सकते हैं।

रक्षाबंधन के सुबह 7.30 बजे के बाद पूरे दिन श्रवण नक्षत्र रहेगा। पूर्णिमा पर पूजन के बाद अपने गुरु का आशीर्वाद भी जरूर लेना चाहिए। इसी दिन श्रावण पूर्णिमा को संस्कृत दिवस के रूप में मनाया भी मनाया जाता है प्राचीनकाल में गुरुकुल शिक्षा पद्धति में इसी दिन से शिक्षण सत्र शुरू होता था और यह पर्व आज भी संस्कृत गुरुकुलों महाविद्यालयों विश्विद्यालयों में संस्कृत दिवस के रूप में मनाया जाता है इस दिन श्रावणी उपक्रम करने का भी विधान है गुरुकुल के ब्रह्मचारियों का यज्ञोपवीत संस्कार आदि किया जाता है। यज्ञोपवीत संस्कार करने के बाद ही विद्यार्थी का विद्यारम्भ संस्कार शुरू होता था।

रक्षाबंधन पर गुरु अपनी राशि धनु में और शनि मकर में वक्री रहेगा। इस दिन चंद्र ग्रह भी शनि के साथ मकर राशि में रहेगा। ऐसा योग 558 साल पहले 1462 में बना था। उस साल में 22 जुलाई को रक्षाबंधन मनाया गया था।

इस बार रक्षाबंधन पर राहु मिथुन राशि में, केतु धनु राशि में है। 1462 में भी राहु-केतु की यही स्थिति थी।

*विधिवत पूजा के बाद बांधना चाहिए रक्षासूत्र*

रक्षाबंधन पर सुबह जल्दी उठ जाना चाहिए। स्नान के बाद देवी-देवताओं और अपने गुरु की पूजा करें। पितरों के लिए धूप-ध्यान करें। इन शुभ कामों के बाद पीले रेशमी वस्त्र में सरसों, केसर, चंदन, चावल, दूर्वा और अपने सामर्थ्य के अनुसार सोना या चांदी रख लें और धागा बांधकर रक्षासूत्र बना लें। इसके बाद घर के मंदिर में एक कलश की स्थापना करें। उस पर रक्षासूत्र को रखें, विधिवत पूजन करें।वस्त्र अर्पित करें, भोग लगाएं, दीपक जलाकर आरती करें। पूजन के बाद ये रक्षासूत्र को दाहिने हाथ की कलाई पर बंधवा लेना चाहिए। ब्राह्मण लोग अपने यजमानों के हाथों पर रक्षासूत्र बांधे।

*सबसे पहले इंद्राणी ने देवराज इंद्र को बांधा था रक्षासूत्र*

पौराणिक कथानकों के अनुसार प्राचीन समय में देवताओं और असुरों के बीच युद्ध हो रहा था। इस युद्ध में देवताओं को पराजित होना पड़ा। असुरों ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। देवराज इंद्र और सभी देवता इस समस्या को दूर करने के लिए देवगुरु बृहस्पति के पास पहुंचे। इंद्र ने देवगुरु से कहा कि मैं स्वर्ग छोड़कर नहीं जा सकता, असुरों ने हमें पराजित कर दिया, हमें फिर से युद्ध करना होगा।

इंद्र की ये बातें इंद्राणी ने भी सुनी, तब उसने कहा कि कल सावन माह की पूर्णिमा है। मैं आपके लिए विधि-विधान से रक्षासूत्र तैयार करूंगी, उसे बांधकर आप युद्ध के लिए प्रस्थान करना, आपकी जीत अवश्य होगी।

अगले दिन देवराज इंद्र रक्षासूत्र बांधकर असुरों से युद्ध करने गए और उन्होंने असुरों को पराजित कर दिया। तब से ही ये पर्व मनाया जाने लगा।
पुराणों में एक प्रसंग यह भी आता है कि माँ लक्ष्मी जी ने राजा बली के लिए यह रक्षा सूत्र बाधा। ओर भगवान विष्णु जी राजा बली के द्वारपाल से मुक्त होकर के बापिस बैकुंठ आये।
उसी परम्परा को निभाते हुए बहिन अपने भाई के लिए रक्षा सूत्र बांधती है। रक्षासूत्र बांधते समय इस मंत्र का उच्चारण करें।

*ॐ येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल:* ।
*तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:*।।

*रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त*

राखी बांधने के समय भद्रा नहीं होनी चाहिए. कहते हैं कि रावण की बहन ने उसे भद्रा काल में ही राखी बांध दी थी इसलिए रावण का विनाश हो गया।

3 अगस्त को भद्रा सुबह 9 बजकर 29 मिनट तक है. राखी का त्योहार सुबह 9 बजकर 30 मिनट से शुरू हो जाएगा।

दोपहर को 1 बजकर 35 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 35 मिनट तक बहुत ही अच्छा समय है।

इसके बाद शाम को 7 बजकर 30 मिनट से लेकर रात 9.30 के बीच में बहुत अच्छा मुहूर्त रहेगा।

 

 


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