क्या पेट के कीड़े मारने वाली ये दवा कोरोना के इलाज में हुई है कारगर, जानिए क्या है सच

If you like the post, Please share the link

क्या पेट के कीड़े मारने वाली ये दवा कोरोना के इलाज में हुई है कारगर, जानिए क्या है सच

हैल्थ। दुनियाभर में कोरोना वायरस तेजी से अपने पाव पसार रहा है। एक तरफ जहां विश्व के कई देश कोरोना से निपटने के लिए इसके टीके की खोज में जुटा है। वहीं दूसरी तरफ पेट के कीड़े (कृमि) मारने वाली आइवरमेक्टिन दवा से कोरोना वायरस को नष्ट करने का दावा इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। तो आइये जानते हैं, ऐसे वक्त में जब कोरोना का वैक्सीन या दवा बनाने में दुनियाभर के वैज्ञानिक और डॉक्टरों के हाथ खाली हैं, तब वाकई कोई पेट के कीड़े मारने वाली दवा कोरोना वायरस का मुकाबला करने में सक्षम है?

राजधानी लखनऊ के लोगों में बांटी गई 27 लाख से अधिक गोलियां

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 35 हजार से ज्यादा मरीज होम आइसोलेशन में हुए ठीक

लखनऊ । उत्त्त्तर प्रदेश में कोरोना के खिलाफ आइवरमेक्टिन दवा कवच का काम कर रही है। राजधानी लखनऊ में जब से इस दवा का वितरण शुरू हुआ है तब से 35 हजार से ज्यादा मरीज सिर्फ होम आइसोलेशन में स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि हजारों मरीज विभिन्न अस्पतालों में भी ठीक हुए हैं। वहीं लाखों लोगों को दवा की डोज देकर कोरोना संक्रमण के खिलाफ सुरक्षित किया जा चुका है। यही वजह है कि अब संक्रमण धीरे-धीरे काबू में आने लगा है। इसके इस्तेमाल से मरीज लगातार कोरोना को तेजी से मात दे रहे हैं।

सीएमओ के प्रवक्ता विजय रघुवंशी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग फिलहाल छह एमजी की गोलियां वितरित करवा रहा है। बच्चों को छह एमजी की तीन गोलियां और वयस्कों को छह गोलियां दी जा रही हैं। अब तक राजधानी भर में 27 लाख से अधिक टेबलेट वितरित की जा चुकी है। दवा के साथ घर पर मरीजों को अपनों का साथ मिलने से वह कोरोना को ज्यादा मजबूती से मात दे रहे हैं।

एसीएमओ डॉ एमके सिंह ने कहाकि आइवरमेक्टिन दवा मरीजों पर जोरदार असर दिखा रही है। यही वजह है कि रिकवरी दर में बहुत सुधार आया है। मरीज तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। साथ ही संक्रमण की दर भी काबू में आने लगी है। आने वाले दिनों में कोरोना संक्रमण की दर और भी कम होगी।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कोरोना संक्रमित मरीजों को आइवरमेक्टिन छह एमजी की छह गोलियां दी जाती हैं। अलग-अलग दिन दो-दो गोलियों का डोज तीन बार लेना पड़ता है। अगर 12 एमजी की गोली है तो तीन गोलियां काफ़ी हैं। वहीं बच्चों के लिए छह एमजी की तीन गोलियां दी जाती हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार डॉक्टर सलाह पर संक्रमित मरीज को पहले, दूसरे व तीसरे दिन लगातार दो-दो गोलियों का डोज रात में भोजन के बाद लेना पड़ता है। जबकि उसके संपर्क में आए अन्य लोगों को भी प्रिवेंशन के तौर पर यही डोज दी जाती है। जिन्हें पहले दिन व सातवें दिन रात को सोते समय आइवरमेक्टिन खानी होती है। मरीज चाहे तो 28वें दिन भी एक डोज ले सकता है।

नोट :- बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार की दवाई न लें। कोरोना से सम्बंधित लक्षण पर डॉक्टर को दिखाएं।


If you like the post, Please share the link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed