…तो यह है मुंबई का ताजमहल

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…तो यह है मुंबई का ताजमहल

गेटवे ऑफ इंडिया : समुद्री मार्ग से भारत आने का प्रवेश द्वार

अरूण शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार
    अरूण शर्मा,          वरिष्ठ पत्रकार

मुंबई । कौथिग मुंबई में शामिल होने के साथ ही इस बार मुंबई को करीब से जानने का मौका मिला। विचार एक नई सोच की पूरी टीम को साथ लेकर में इस बार में मुंबई कौथिग दिखाने ले गया, ताकि पूरी टीम भी कौथिग की भव्यता और लोकसंस्कृति और उत्तराखंड को लेकर उनके समर्पण से रूबरू हो सके। कौथिग के कार्यक्रम शाम 5 बजे से शुरू होते हैं तो लिहाजा इस बार हमारे पास प्रयाप्त समय था मुबंई के कुछ दर्शनीय स्थलों को देखने का। जिसकी शुरूआत हमारी टीम ने की मुंबई के प्रभादेवी में स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर से।
                     भगवान गणेश का आर्शिवाद लेने के बाद हमारा सफर बढ़ा भारत की सबसे लोकप्रिय धरोहरों में से एक गेटवे ऑफ इंडिया की तरफ। दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करने वाली यह जगह देश के प्रमुख बंदरगाहों के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में कार्य करती है। गेटवे ऑफ इंडिया एक स्मारक है जिसका निर्माण 20 वीं शताब्दी के दौरान पश्चिमी भारत के महाराष्ट्र राज्य के मुंबई शहर में करवाया गया था। यह दक्षिणी मुंबई में अपोलो बंदर क्षेत्र के तट पर स्थित है और इसके द्वारा अरब सागर का नजर दिखाई देता है।
                                                 मुंबई, महाराष्ट्र में स्थित है गेटवे आॅफ इंडिया को लेकर जो जानकारी मिल पाई उसके अनुसान सन् 1924 में यह बनकर तैयार हुआ था। गेटवे ऑफ इंडिया की संरचना के निर्माण के पीछे मुख्य उद्देश्य किंग जॉर्ज पंचम और बंबई (अब मुंबई) के क्वीन मैरी की यात्रा को स्वीकार करना था, आज यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण स्मारकों में से एक के रूप में बना हुआ है, ये ताकत, शक्ति और शांति का चित्रण है। इसके निर्माण में भारत सरकार द्वारा नकद निवेश लगभग 21 लाख की राशि का हुआ था।

दिल्ली दरबार से पहले हुआ था निर्माण
कहा जाता है कि गेटवे ऑफ इंडिया दिसंबर 1911 में किंग जॉर्ज और रानी मैरी की मुंबई की यात्रा को याद करने के उपलक्ष्य में बनाया गया था। गेटवे ऑफ इंडिया का निर्माण दिल्ली दरबार से पहले हुआ था। हालांकि किंग जॉर्ज और रानी मैरी संरचना का एक मॉडल ही देख पाए। क्योंकि इसका निर्माण तब तक शुरू नहीं किया था और इसका निर्माण असल में 1915 में शुरू हुआ। गेटवे ऑफ इंडिया की नींव 31 मार्च, 1911 को बंबई के राज्यपालसर जॉर्ज सिडेनहैम क्लार्क ने रखी थी। जॉर्ज विट्टेट ने 31 मार्च, 1914 को अंतिम डिजाइन पर मंजूरी दी थी।

पीले बेसाल्ट और कंक्रीट से है बना
रोमन के विजयी मेहराब और गुजरात के 16 वीं शताब्दी के वास्तुकला के तत्वों को जोड़कर इस संरचना का निर्माण किया। इसका डिजाइन हिन्दू और मुस्लिम वास्तुकला शैली का मिश्रण है जिसमे मेहराब मुस्लिम शैली है और उस पर की गयी सजावट हिन्दू शैली की है। इस गेटवे का निर्माण पीले बेसाल्ट और प्रबलित कंक्रीट से किया गया है। प्रयोग में लाये गए पत्थरो को स्थानीय रूप से प्राप्त किया गया था और छिद्रित स्क्रीन को ग्वालियर से मंगवाया गया था। मेहराब के प्रत्येक साइड पर विशाल कक्ष है जिनकी क्षमता 600 व्यक्तियों की है। केंद्रीय गुंबद का व्यास 15 मीटर है और यह जमीन के ऊपर 26 मीटर की ऊंचाई तक है। गेटवे ऑफ इंडिया की नींव का काम 1920 में पूरा किया गया था और निर्माण 1924 में समाप्त हो गया था। गेटवे ऑफ इंडिया 4 दिसंबर, 1924 को वायसराय द्वारा खोला गया।

समुद्री मार्ग से भारत आने का प्रवेश द्वार
गेटवे ऑफ इंडिया की इमारत का नक्शा एक प्रवेश द्वार यानी आगंतुकों के लिए समुद्री मार्ग से भारत आने के लिए एक प्रवेश द्वार था आश्चर्यजनक तथ्य यह है नींव के तीन साल बाद भारत सरकार ने गेटवे ऑफ इंडिया के डिजाइन को मंजूरी दी है। 4 दिसंबर 1924 को वायसराय, पढ़ना के अर्ल द्वारा उद्घाटन किया गया था। गेटवे के चार बुर्ज है और इसको जटिल जाली के साथ बनाया गया था। छत्रपति शिवाजी और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमाए गेटवे पर बाद में स्थापित की गयी थी।

गेटवे यानि मुंबई का ताज महल
गेटवे को मुंबई के ताज महल के नाम से भी जाना जाता है क्योकि ये इस शहर का प्रमुख पर्यटक आकर्षण है। नयी दिल्ली के इंडिया गेट की संरचना मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया की ही तरह है। यह पहली ऐसी संरचना थी जिसका भ्रमण करने पर्यटक नाव द्वारा मुंबई में आते थे। बाद में इस गेटवे का प्रयोग वायसराय और बॉम्बे के नए राज्यपालों के औपचारिक प्रवेश द्वार के रूप में किया गया। इसके द्वारा उन्हें भारत में प्रवेश की अनुमति थी।

तीन आतंकी हमलों का गवाह
गेटवे ऑफ इंडिया स्मारक 21 वीं शताब्दी के शुरुआत के तीन आतंकी हमलों का गवाह भी है। दो 2003 में और तीसरा 2008 में जब तीन बंदूकधारियों ने ताज महल होटल और टावरों पर आक्रमण किया था। मुंबई घूमने आये ंतो गेटवे आॅफ इंडिया आना न भूलें।


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