अनूठी पहल :- उत्तराखंड में इन नदियों पर बनाई जाएंगी झीलें, जानिए इससे क्‍या होंगे

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अनूठी पहल :- उत्तराखंड में इन नदियों पर बनाई जाएंगी झीलें, जानिए इससे क्‍या होंगे

देहरादून । उत्तराखंड सरकार जल संरक्षण के लिए अनूठी पहल करने जा रही है। जल संरक्षण पर मौजूदा सरकार ने खास फोकस किया है। इसके तहत नदियों पर झीलें बनाने का निश्चय किया गया है। इससे जल संरक्षण तो होगा ही, अच्छा-खासा राजस्व भी प्राप्त होगा। भविष्य में इन झीलों को पर्यटन से भी जोड़ा जाएगा।

पौड़ी गढ़वाल जिले के अंतर्गत कोटद्वार क्षेत्र की खोह नदी में इसे धरातल पर उतारा जा रहा है। वन विभाग ने खोह नदी पर दुर्गा देवी मंदिर और श्री सिद्धबली मंदिर के नजदीक झील निर्माण के लिए लघु सिंचाई विभाग को कार्यदायी संस्था बनाया है। इन झीलों के आकार लेने के बाद अन्य क्षेत्रों में भी तेजी से कदम बढ़ाए जाएंगे। खोह नदी पर जिन स्थानों पर झीलें बनाने का निश्चय किया गया है, वहां हाथी समेत दूसरे वन्यजीवों की आवाजाही होती है। इसे देखते हुए दोनों झीलों में रैम बनाए जाएंगे, ताकि वन्यजीवों को किसी प्रकार की दिक्कत न होने पाए।

डॉ. हरक सिंह रावत (वन एवं पर्यावरण मंत्री, उत्तराखंड) का कहना है कि जल संरक्षण की दिशा में राज्य का वन महकमा पहली बार नदियों पर झीलों का निर्माण कराकर ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। कोटद्वार के अलावा देहरादून, नैनीताल, हल्द्वानी समेत अन्य क्षेत्रों की नदियों पर भी झीलों का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए जायका और कैंपा से धन की व्यवस्था की जाएगी।

यू-आकार में बनेंगी झील, फाइनल डिजाइन आइआइटी रुड़की से तैयार करेगा

लघु सिंचाई विभाग के पौड़ी खंड के अधिशासी अभियंता राजीव रंजन बताते हैं कि दुर्गा देवी मंदिर के नजदीक बनने वाली झील की लंबाई 30 मीटर व चौड़ाई 16 मीटर होगी। इसी तरह श्री सिद्धबली मंदिर के पास की झील की लंबाई 35 मीटर व चौड़ाई 17 मीटर होगी। दोनों के निर्माण पर 13.19 करोड़ की लागत आएगी और इसका प्रविधान कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि दोनों झीलें यू-आकार में होंगी। इनका फाइनल डिजाइन आइआइटी रुड़की से तैयार कराया जा रहा है। झीलों की ऊंचाई करीब दस मीटर के आसपास रहने की संभावना है। हालांकि, अभी यह तय होना बाकी है। अधिशासी अभियंता के अनुसार दोनों झीलों से प्रतिवर्ष 1.50 लाख घन मीटर आरबीएम मिलेगा। इससे हर साल 2.25 करोड़ का राजस्व प्राप्त होगा। झीलों में करीब साढ़े चार करोड़ लीटर पानी एकत्रित होगा और यह क्षेत्र की खूबसूरती में चार चांद लगाएंगी। साथ ही इन झीलों को पेयजल और पर्यटन से भी जोड़ा जाएगा।


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