उत्तराखंड में 30 साल की शानदार सेवा के बाद सेवानिवृत हुए जाने-माने फिजिशियन डाॅ एसडी जोशी

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उत्तराखंड में 30 साल की शानदार सेवा के बाद सेवानिवृत हुए जाने-माने फिजिशियन डाॅ एसडी जोशी

सीमित संसाधनों में बेहत्तर इलाज के विशेषज्ञ हैं डाॅ जोशी – डाॅ बीसी रमोला

देहरादून। उत्तराखंड के जाने-माने फिजिशियन डाॅ एसडी जोशी आज 30 साल की शानदार सेवा के बाद रिटायर हो गये। वर्तमान में दून मेडिकल काॅलेज में वरिष्ठ फिजिशियन डाॅ एसडी जोशी को सीमित संसाधनों में बेहत्तर ईलाज का विशेषज्ञ माना जाता है। दून मेडिकल काॅलेज में आज डाॅ जोशी को लाॅकडाॅउन में सोशल डिस्टेसिंग का पूरा पालन करते हुए विदाई दी गई। इस मौके पर देहरादून के सीएमओ डाॅ बीसी रमोला, दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डाॅ आशुतोष सयाना, सभी डॉक्टर, नर्सिंग व मेडिकल स्टाॅफ मौजूद रहे।

सीमित संसाधनों में बेहत्तर इलाज के विशेषज्ञ हैं डाॅ जोशी – डाॅ बीसी रमोला
विदाई समारोह में मौजूद और डाॅ जोशी के साथ कार्य कर चुके और वर्तमान में दून के सीएमओ डाॅ बीसी रमोला ने कहा कि उनका मरीजों के प्रति हमेशा सम्मान जनक रवैया रहा है। गढ़वाल के हर जिले से मरीज उनके पास पहुंचते हैं। उनके पास आने वाला हर मरीज उनके चिकित्सीय पेशे की तारीफ करता है। डा रमोला ने कहा कि डाॅ जोशी सीमित संसाधनों में बेहत्तर इलाज के विशेषज्ञ हैं। उनके साथ काम कर रहे नये डाॅक्टरों को उनके काफी कुछ सीखने को मिला होगा। डाॅ रमोला ने बताया कि डाॅ जोशी अनुशासन के साथ अपने कार्य को पूरा करते हैं। समय कितना भी हो जाये जब तक वह आखिरी मरीज को नहीं देख लेते थे तब तक अपनी सीट से नहीं उठते थे। डाॅ जोशी की कार्यप्रणाली नये डाॅक्टरों के लिये प्रेरणा का कार्य करेगी।

मेडिसिन विभाग में किया शानदार कार्य – डाॅ आशुतोष सयाना
दून मेडिकल काॅलेज के प्रार्चाय डाॅ आशुतोष सयाना ने बताया कि डाॅ एसडी जोशी के मार्गदर्शन में मेडिसिन विभाग ने बहुत ही अच्छा कार्य किया है। डाॅ एसडी जोशी पूरे गढ़वाल के मरीजों के हितैषी रहे हैं उन्होंने सरकारी कार्य के अतिरिक्त समय में गढ़वाल के प्रत्येक क्षेत्र में कैंप लगा कर मरीजों का मुफ्त ईलाज किया।

हर महीने पहाड़ में मरीजों के लिये कैंप -डाॅ जोशी
विदाई समारोह में डाॅ जोशी ने अपने अनुभव नये डॉक्टर के साथ बांटे तथा मरीज का हित सर्वोपरि रखने को कहा। इस दौरान डाॅ जोशी पुरानी बातों को याद कर कई मौकों पर भावुक भी हुए। डाॅ जोशी ने नये डाॅक्टरों से कहा कि मरीजों से आत्मीय संबध बनायें। दवाई या टेस्ट लिखने से पहले मरीज की पूरी समस्या को सुने, आधा ईलाज आपको मरीज की समस्या सुनकर मिल जायेगा। मरीज देखने में भले ही थोड़ा समय थोड़ा ज्यादा लगे लेकिन मरीज आपके पास से पूरी तरह संतुष्ट होकर जाना चाहिए। उसको मन में ये बात नहीं रहनी चाहिए कि डाॅक्टर सहाब ने तो मेरी बात पूरी सुनी ही नहीं और दवाई लिख दी। पर्वतीय राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं में संसाधन अभी पूरी तरह से नहीं है। इसलिये हमें सीमित संसाधनों में बेहत्तर काम करके दिखाना होगा। मीडिया से बात करते हुए डाॅ जोशी ने अपनी भविष्य की प्लानिंग को लेकर कहा कि जिस मेडिकल बैच को वह वर्तमान में पढ़ा रहे हैं उसकी पढ़ाई पूरी कराने के लिये दून मेडिकल काॅलेज में बिजिंटिग फैक्लटी के तौर पर कुछ समय अपनी सेवायें देंगे। इसके साथ ही चारधाम यात्रा मार्ग बन जाने के बाद प्रत्येक माह पर्वतीय इलाकों में निशुल्क मेडिकल कैंप लगायेंगे।

डॉक्टर जोशी ने उत्तरकाशी, श्रीनगर, देहरादून सहित कई अस्पतालों में अपनी सेवा दी हैं। उत्तरकाशी भूंकप हो, आपदा, केदारनाथ में आई भीषण आपदा हो या फिर वर्तमान में कोराना महामारी डाॅ जोशी हर मोर्च पर आगे खड़े नजर आये।

डाॅ एसडी जोशी के विदाई समारोह में दून मेडिकल काॅलेज के सीएमएस डाॅ केेके टम्टा, सहित अन्य डाॅक्टरों और नर्सिंग व मेडिकल स्टाॅफ ने फूल मालाओं से उनका स्वागत किया।


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