डोबराचांठी पुल’ से जो भी गुजरेगा बोलेगा थैंक्यू सीएम त्रिवेंद्र, जनता के दर्द को समझने और मुश्किल सफ़र को आसान बनाने के लिए

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‘डोबराचांठी पुल’ से जो भी गुजरेगा बोलेगा थैंक्यू सीएम त्रिवेंद्र, जनता के दर्द को समझने और मुश्किल सफ़र को आसान बनाने के लिए

आखिर 14 साल वनवास के बाद आया है 8 नवंबर का ऐतिहासिक दिन

CM त्रिवेंद्र देंगे टिहरी और उत्तरकाशी की जनता को कभी न भूलने वाली सौगात

देहरादून। इच्छाशक्ति हो तो वर्षों से तमाम झंझावातों में फंसा बड़ा से बड़ा कोई प्रोजेक्ट कैसे चंद समय में पूरा हो जाता है, इसका सटीक उदाहरण है उत्तराखण्ड का ‘डोबराचांठी पुल’। 11 वर्षों से अटके पड़े इस पुल का निर्माण मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की सख्ती के बाद महज साढ़े तीन वर्ष में पूरा कर लिया गया। 3 अरब की लागत से तैयार डोबराचांठी पुल के बनने से प्रतापनगर-सभागाँव क्षेत्र के तकरीबन 3 लाख लोगों को राहत मिलेगी।
8 नवम्बर 2020 का दिन टिहरी जनपद के लिये ऐतिहासिक होगा। इस दिन मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ‘डोबराचांठी पुल’ के रूप में प्रतापनगर-सभागाँव क्षेत्र की जनता के लिए खास सौगात देने जा रहे हैं। खास बात यह है कि डोबराचांठी पुल देश का सबसे लम्बा (440 मीटर) मोटरेबल झूला पुल है। पुल बनने से प्रतापनगर-सभागाँव क्षेत्र की जनता को अपने जिला मुख्यालय टिहरी आने-जाने में 100 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। इससे धन, समय और श्रम तीनों की बचत होगी। 440 मीटर लम्बे इस पुल के निर्माण में 14 वर्ष का लम्बा समय लग गया। जिससे इसकी लागत 1.38 अरब से बढ़कर ढाई गुनी हो गई। दरअसल, ‘डोबराचांठी पुल’ का निर्माण वर्ष 2006 में शुरू हुआ था। लेकिन डिजाइन फेल होने, भ्रष्टाचार और अफसरों की लापरवाही से प्रोजेक्ट का निर्माण कभी ‘अटक’ गया तो कभी ‘लटक’ गया। इस अवधि में क्षेत्र की जनता परेशान रही। उसकी कहीं सुनवाई नहीं हुई। वर्ष 2017 में सत्ता में आने के बाद त्रिवेन्द्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट की अहमियत समझते हुये इसे अपनी शीर्ष प्राथमिकता में रखा। अधूरे पड़े पुल के निर्माण के लिये 88 करोड़ का बजट एकमुश्त स्वीकृत किया गया। मिशन मोड में प्रोजेक्ट फिर से शुरू हुआ।  मुख्यमंत्री  ने निरन्तर पुल के निर्माण कार्य की प्रगति परखी और जांची भी। उनकी इच्छाशक्ति की बदौलत आज यह पुल अपना पूरा आकार ले चुका है। उत्तराखण्ड की इस नई धरोहर को मुख्यमंत्री जनता को समर्पित करने जा रहे हैं।

टिहरी झील पर बनकर तैयार हुआ डोबरा चांठी पुल केवल एक पुल नहीं बल्कि लाखों लोगों की भावनाओं का भी केंद्र है। दरअसल, पिछले 14 सालों से प्रतापनगर व उत्तरकाशी के लोगों को टिहरी मुख्यालय तक पहुँचने के लिए लंबा सफर तय करना पढ़ता था। लेकिन अब उनकी राह आसान हो गयी है। त्रिवेंद्र सरकार ने मानो उनके 14 वर्ष के वनवास को खत्म कर दिया है।
टिहरी और उत्तरकाशी के लोग इस पुल के बनने का पिछले 14 सालों से इंतजार कर रहे थे। पुल के बनने से 3 लाख की आबादी को फायदा मिलेगा।

देश का सबसे लंबा सस्पेंशन ब्रिज

प्रतापनगर की लाइफलाइन कहा जाने वाला डोबरा-चांठी पुल देश का सबसे लंबा सस्पेंशन ब्रिज है, इसे टिहरी झील के ऊपर बनाया गया है। पुल को आकर्षक बनाने के लिए इस पर अत्याधुनिक फसाड लाइटिंग सिस्टम भी लगाई गई है जिस पर पांच करोड़ की लागत आई है।

आवागमन का बनेगा बेहतर जरिया

इस पुल को बनने में 14 साल का वक्त जरूर लगा, लेकिन सालों की मेहनत के बाद बना ये पुल ना सिर्फ आवागमन का बेहतर जरिया बनेगा, बल्कि इससे टिहरी में पर्यटन को बढ़ावा भी मिलेगा। इस पुल पर चलने वाले लोगों के लिए ये अनुभव शानदार और यादगार होने वाला है।

पर्यटन की बदलेगा तस्वीर

डोबरा-चांठी पुल को पर्यटन की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिस तरह टिहरी झील आज देश में एक नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर उभर रही है उसी तरह आने वाले दिनों में डोबरा चांठी पुल भी एक नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनेगा।

टिहरी-उत्तरकाशी के लोगों को होगा फायदा

अभी तक टिहरी से प्रतापनगर जाने के लिए पांच से छह घंटे लग जाते थे। इस पुल के बन जाने के बाद टिहरी से प्रतापनगर का सफर डेढ़ घंटे में पूरा होगा।


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