साढ़े 3 साल से चल रही है CM त्रिवेंद्र को कुर्सी से हटाने और बदनाम करने की साजिश, सुनिये क्या कह रहे हैं CM

If you like the post, Please share the link

साजिश के तहत साढ़े 3 साल से चलाया जा रहा है CM त्रिवेंद्र को बदनाम करने का एजेंडा, सुनिये क्या कह रहे हैं CM त्रिवेंद्र सिंह रावत

उत्तराखंड को भ्रष्टाचार व माफिया मुक्त बनाकर ही दम लूंगा – त्रिवेंद्र

देहरादून।  त्रिवेंद्र सरकार ने अपने साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल में भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया है। दलालों की दुकानें बंद हैं। हराम की कमाई करने वाले बिलबिला रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में सभी विरोधी एकजुट होकर CM त्रिवेंद्र को कुर्सी से हटाकर किसी अन्य नेता को प्रदेश की कमान सौंपना चाहते हैं जो उनकी दलाली की दुकानों को चलाने में मद्दत करे। ताकि उनके स्वार्थ सिद्ध होते रहें।

उत्तराखण्ड के हर नागरिक को पता है कि सीएम त्रिवेंद्र की छवि साफ सुथरे नेता की है। त्रिवेंद्र हमेशा लीक से हटकर जनहित में फैसले लेते रहे हैं। जीरो टोलरेंस के असर से शासन प्रशासन में दलालों, बिचौलिओं, औऱ कुछ ठेकेदार टाइप पत्रकारों का दखल बंद हुआ है। ऐसे लोग परेशान हैं, बात बात पर त्रिवेंद्र को बदनाम करने का बहाना ढूंढते हैं।

जिनको सरकार और प्रशासन का सामान्य ज्ञान तक नहीं वो भी सीएम को अपशब्द बोलकर अपनी मानसिकता का बखान करते हैं। हैरानी तब होती है जब पूरा शासन प्रशासन आंख मूंद कर बैठा है। मुखिया के खिलाफ लोग अंटशंट लिखते हैं और सब चुप रह जाते हैं। सोशल मीडिया पर मीम बनने लगते हैं, गालियां दी जाती हैं, सरकार पर सवाल नहीं उठाया जाता बल्कि सीधे मुख्यमंत्री पर प्रहार किया जाता है। यह ट्रेंड केवल इस मुद्दे पर ही नहीं है।

पिछले कुछ समय से कुछ स्वयम्भू पत्रकार, छुटभैये नेता, चाटुकार और सोशल मीडिया पर भेड़चाल चलने वाली नासमझों की फौज एक सोची समझी साजिश के तहत त्रिवेंद्र के खिलाफ एजेंडा चलाते जा रहे हैं।  क्या किसी और राज्य में ऐसा हो सकता था? क्या इसके पीछे किस गिरोह की साजिश है, इसका पर्दाफाश नहीं होना चहिए?

साढे 3 सालों से चल रहा है षड्यंत्र- त्रिवेंद्र सिंह रावत

उत्तराखंड में ZEE मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा पिछले साढ़े 3 सालों में तमाम तरह के षड्यंत्र हुए हैं। भ्रष्टाचारी, ब्लैकमेलर और माफिया तंत्र इकट्ठा होकर हमला कर रहा है। साजिशें रच रहा है। हम जिस भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रहे हैं उस नीति पर पूरी तरह अडिग हैं। जैसे हम पहले दिन अडिग थे जब सरकार को पांच साल होंगे उस दिन भी अडिग रहेंगे। कोई हमें हमारे रास्ते से अलग नहीं कर सकता है। हरीश रावत से पूछना चाहता हूं कि रावत जी जब आपका स्टिंगबाज हुआ था तब ये स्टिंगबाज था ब्लैकमेलर था। आज आपकी क्या दोस्ती हो गई उससे। उस रहस्य को भी तो खोलिये आज क्या दोस्ती हो गई है आपकी उससे। उस रहस्य को खोलिये नहीं तो जनता खोल देगी।

आर्थिक ब्लैक मेलिंग के लिये हुये हैं आज तक स्टिंग – हरीश

हरीश रावत लिखते हैं यह तीससी सरकार है जिसको स्टिंग का दंश झेलना पड़ा है। पहली सरकार Dr.Ramesh Pokhriyal Nishank जी की थी, वो भी उत्तराखंड से घायल होकर के गये थे, दूसरी सरकार हरीश रावत की थी जिसको ऐसी राजनीतिक अस्थिरता झेलनी पड़ी कि राज्य के विकास और प्रशासनिक स्थिरता पर गहरी चोट पड़ गई, बल्कि उसी दिन शुरुआत हो गई कि हम 70 की विधानसभा में 11 पर आकर ठहर गये और अब श्री त्रिवेंद्र सिंह जी की सरकार है। जरा आप गहराई से विवेचना करें, क्या ये सारे कालखंड में हुये स्टिंग सार्वजनिक जीवन में स्वच्छता के पक्ष में हुये हैं या राजनीतिक बेईमानी और आर्थिक ब्लैक मेलिंग के लिये हुये हैं? सार्वजनिक जीवन में यदि पत्रकार स्टिंग करते हैं तो मैं उसका स्वागत करता हूं, मगर उद्देश्य यदि कुछ और हो तो राज्य के लिए यह स्थिति खतरनाक है। पोखरियाल जी झेल गये, हरीश रावत ने भी झेल लिया है, त्रिवेंद्र सिंह जी झेल लेंगे, झेल लेंगे चाहे कुछ घायल हो जाएं, मगर राज्य पर तो निरंतर घाव लगते जा रहे हैं। भाजपा चाहे कितना ही हम पर दोष मढ़ने की कोशिश करे, मगर इस स्टिंग के मोंस्टर को उत्तराखंड में खड़ा करने के लिये जो लोग भी दोषी हैं, वो सब भाजपा में विद्यमान हैं और समय-समय पर भाजपा के नेताओं ने अपनी राजनीति के लिये इसका उपयोग भी किया है, आज उनके मुख्यमंत्री इस स्टिंग की चपेट में हैं, तो भाजपा फड़फड़ा रही है, मगर यह सत्य भाजपा झुठला नहीं सकती है।

 


If you like the post, Please share the link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed