कलिंगा इंस्टीच्यूट ऑफ सोसल साइंसेज (के.आई.एस.एस.) में नये चांसलर और वाइस-चांसलर  हुए पदासीन

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कलिंगा इंस्टीच्यूट ऑफ सोसल साइंसेज (के.आई.एस.एस.) में नये चांसलर और वाइस-चांसलर  हुए पदासीन

उड़ीसा । कलिंगा इंस्टीच्यूट ऑफ सोसल साइंसेज (के.आई.एस.एस.) विशेष रूप से आदिवासी छात्रों के लिए दुनिया का एकमात्र विश्वविद्यालय है। जाने-माने शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अच्युत सामंत द्वारा स्थापित, के.आई.एस.एस. अपनी तरह का एक पूर्णतः निःशुल्क और पूरी तरह से आवासीय संस्था है, जो आदिवासी छात्रों के लिए के.जी. से लेकर पी.जी. (बालवाड़ी से लेकर स्नात्कोत्तर) तक की शिक्षा के साथ-साथ डॉक्टरेट प्रोग्राम भी प्रदान करता है। के.आई.एस.एस., 60,000 आदिवासी बच्चों (30,000 छात्र अध्ययनरत एवं 30,000 छात्र उत्तीर्ण हो चुके) के लिए पूरा का पूरा एक घर है।

ओडिशा के प्रख्यात एवं प्रतिष्ठित व्यक्ति, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का गौरव बढ़ाया है, के.आई.एस.एस. डीम्ड विश्वविद्यालय में चांसलर, प्रो-चांसलर, वाइस-चांसलर, प्रो-वाइस-चांसलर और डाइरेक्टर जनरल जैसे विभिन्न शीर्षस्थ पदों पर आसीन हुए हैं ।

संयुक्त राष्ट्र (यू.एन.) के एक भूतपूर्व सहायक महासचिव, श्री सत्य एस. त्रिपाठी ने के.आई.एस.एस. डीम्ड विश्वविद्यालय के कुलपति (चांसलर) के रूप में पदभार ग्रहण किया है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी, श्री त्रिपाठी ओडिशा के कटक जिले के निवासी हैं, जिनके पास 40 सालों का समृद्ध और विविध अनुभव है, जिसमें विश्व भर में संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख पद पर कार्य करने का अनुभव भी शामिल हैं। वह एक स्थायी ग्रह (सस्टैनबल प्लानेट) के लिए ग्लोबल अलायंस के महासचिव भी हैं।

डॉ. उपेन्द्र त्रिपाठी, आई.ए.एस. (रिटायर्ड), जिन्होंने न्यू एंड रिन्यूएबल इनर्जी मंत्रालय में सेक्रेटरी के रूप में भारत सरकार के साथ काम किया है, प्रो-चांसलर के रूप में के.आई.एस.एस. ज्वाइन किये हैं। डॉ. त्रिपाठी, जो ओडिशा के गंजम जिले से ताल्लुक रखते हैं, इंटरनेशनल सोलर अलायंस के पहले डाइरेक्टर जनरल थे, जो पहली संधि-आधारित अंतर्राष्ट्रीय संगठन है और जिसका मुख्यालय भारत में है।

संबलपुर जिले के प्रोफेसर दीपक कुमार बेहरा और एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित मानवविज्ञानी (anthropologist) ने वाइस-चांसलर के रूप में पदभार ग्रहण किया है। के.आई.एस.एस. में आने से पहले वह संबलपुर विश्वविद्यालय, बरहमपुर विश्वविद्यालय, और राजेन्द्र विश्वविद्यालय, बलांगीर में वाइस-चांसलर के रूप में सेवा की है। प्रो. बेहरा को तीन अलग-अलग विश्वविद्यालयों के कुलपति बनने के लिए भारत में एकमात्र मानवविज्ञानी (anthropologist) होने का गौरव प्राप्त है। वह कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी में फुलब्राइट विजिटिंग प्रोफेसर थे।

राजीव गाँधी नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ यूथ डेवलपमेन्ट, तमिलनाडु के डेवलपमेन्ट स्टडीज विभाग के डीन प्रो. पीताबासा साहू ने डेप्यूटेशन पर प्रो-वाइस चांसलर के रूप में के.आई.एस.एस. ज्वाइन किया है। श्री साहू ओडिशा के क्योंझर जिले के रहने वाले हैं और उनके पास ट्राइबल डेवलेपमेंट, रीजनल स्टडीज, ग्रामीण विकास, सतत विकास और सामाजिक सेक्टर विकास के क्षेत्र में यू.एन.डी.पी., डब्ल्यू.एफ.पी., एन.ओ.आर.ए.डी., नॉर्वेजियन एड, वर्ल्ड बैंक, डी.एफ.आई.डी., इत्यादि जैसी एजेंसियों के साथ 20 वर्षों का रिसर्च अनुभव है।

इसी तरह तमिलनाडु कैडर के आई.पी.एस. अधिकारी, डॉ कान्हू चरण महाली ने अतिरिक्त महानिदेशक पद पर अपनी सेवानिवृत्ति के पश्चात के.आई.एस.एस. डीम्ड विश्वविद्यालय में डाइरेक्टर जनरल के रूप में पदासीन हुये हैं। मयूरभंज जिले के एक आदिवासी परिवार के श्री महाली विभिन्न क्षमताओं में 34 वर्षों के अनुभव के साथ एक कुशल प्रशासक हैं।

के.आई.एस.एस. एलुमनी एसोसिएशन, के.आई.एस.एस. स्टूडेन्ट्स एसोसिएशन एवं के.आई.एस.एस. आदिवासी पैरेन्ट्स एसोसिएशन ने नए आगन्तुक पदाधिकारियों का स्वागत किया और उन्हें के.आई.एस.एस. जैसी एक विश्व स्तरीय संस्था से जुड़ने के लिए बधाई दी। उन्होंने के.आई.आई.टी. एवं के.आई.एस.एस. के संस्थापक, डॉ अच्युत सामंत को धन्यवाद दिया जो के.आई.एस.एस. को विश्व में एक शीर्ष संस्थान बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि अनुभवी वरिष्ठ प्रशासकों और शिक्षाविदों की नियुक्ति के साथ के.आई.एस.एस. डीम्ड विश्वविद्यालय के मामलों की पतवार उन्हें सौंपने से यह संस्थान शीघ्र ही आदिवासी अध्ययन में उत्कृष्टता का एक केन्द्र बन जाएगा।


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