उत्तराखण्ड एक्सीलेंस अवार्ड से देहरादून में कल सम्मानित होंगे पवन

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उत्तराखण्ड एक्सीलेंस अवार्ड से देहरादून में कल सम्मानित होंगे पवन

एसिड अटैक फाइटर “लक्ष्मी अग्रवाल” से प्रेरित हैं पवन, तेजाबी हिंसा के खिलाफ चला रहें हैं मुहिम

पन्तनगर / देहरादून । यूं तो सामाजिक जीवन में सक्रिय हर कोई रहता है किन्तु जनसमर्पण का भाव अपने भीतर पैदा करना हर किसी के बस की बात नहीं है लेकिन पन्तनगर के समीप हल्दी क्षेत्र के रहने वाले पवन दूबे ने अपने भीतर वह जनसमर्पण का नि:स्वार्थ भाव भी पैदा कर ही लिया। उनके द्वारा समाज के प्रति दिए गये योगदान को देखते हुए देहरादून में “वैदिक इन्टरनेशनल प्रमोटर्स सोसाइटी” द्वारा “उत्तराखण्ड एक्सीलेंस अवार्ड 2019” से कल नवाजा जाएगा।

पवन के पिता केशभान दूबे पन्तनगर विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हैं और माता जागीन्द्री दूबे गृहिणी हैं। पवन ने जब ६ वर्ष के थे तब से समाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों से उनका जुड़ाव हो गया था और यह क्रम समय के साथ जारी रहा। इसी बीच पवन राजनीति में भी हो गये और भारतीय जनता पार्टी की तरफ से पहले पन्तनगर मण्डल फिर बहुत कम समय में ही पूरी किच्छा विधानसभा का मीडिया, सोशल मीडिया व आई०टी० प्रभारी बन दायित्व का निर्वहन वर्तमान में भी कर रहे हैं।

पवन ने बताया कि वर्ष 2013 से वह लगातार सोशल मीडिया पर एसिड अटैक फाइटर “लक्ष्मी अग्रवाल” को फाॅलो कर रहे थे। जिससे उनको काफी प्रेरणा मिली और उन्होंने ठान लिया कि एक बार “लक्ष्मी” से मिलना है लेकिन वह तभी से एसिड अटैक के खिलाफ “लक्ष्मी” की लड़ाई का समर्थन करते आ रहे हैं। बताया कि‌ वर्ष 2017 में पहली बार देहरादून में “लक्ष्मी” से उनकी मुलाकात हुई। धीरे-धीरे सम्पर्क मजबूत होने लगा और 10 जून 2018 को “लक्ष्मी” ने “स्टाॅप सेल एसिड” मुहीम शुरू कर दी। पवन बताते हैं कि इस मुहीम को सोशल मीडिया पर जब शुरू किया गया उसके बाद देश भर से लोगों का समर्थन तेजी से मिलने लगा इसके बाद इस मुहीम को जमीन पर उतारा गया 16 जून 2018 को दिल्ली के कनाॅट प्लेस में जिसमें लोगों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इसके बाद 24 जून 2018 चण्डीगढ़ में, 15 जुलाई 2018 रूद्रपुर, उत्तराखण्ड में इसको जमीन पर उतार जागरूकता अभियान चलाया गया।

यह क्रम बढ़ते रहा और मुहीम महाराष्ट्र, कोलकाता, उत्तर प्रदेश सहित कई विभिन्न शहरों तक पहुँची। इससे जुड़े लोगों ने स्वयं जिम्मेदारी समझ गोष्ठियाँ आयोजित कीं लोगों से बात की उनको जागरूक किया। इस मुहीम में सबसे अच्छी बात यह रही कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद भी जो तेजाब खुले आम बाजारों में मिल रहा है वह पूर्णतः अवैध रूप से मिल रहा है तो मुहीम के तहत दुकानदारों से मिलना शुरू किया गया उनको सुप्रीम कोर्ट के आदेश से परिचित कराया गया जिसके बाद उनको पता चला कि यह समाज के लिए भी गलत है और पूर्णतः गैर कानूनी है तो उन्होंने प्रण लिया कि वह न तेजाब बेचेंगे और न खरीदेंगे जिसका उनको “स्टाॅओ सेल एसिड” मुहीम द्वारा एक प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है जो कि समाज को एक नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होगा। पवन ने बताया कि दिल्ली के कुछ दुकानदारों व हल्दी (पन्तनगर) के दुकानदारों को प्रमाण पत्र जारी किये भी गये हैं।

पवन द्वारा सामजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने के साथ ही वह तेजाबी हिंसा के खिलाफ चल रही इस मुहीम में भी लगातार सक्रिय बने हुए हैं। उनकी इसी सक्रियता को देखते हुए ही कल देहरादून में उनको “उत्तराखण्ड एक्सीलेंस अवार्ड 2019” से सम्मानित किया जाएगा। पवन ने कहा कि इसका श्रेय “लक्ष्मी अग्रवाल” को जाता है यदि वह इस मुहीम के बारे में नहीं सोचती तो शायद आज मैं भी इसका हिस्सा नहीं होता‌।


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