इन संकेतों से जानिए कहीं कमजोर तो नहीं आपका इम्यून सिस्टम, जानिए कैसे होगा मजबूत इम्यून सिस्टम….

If you like the post, Please share the link

इन संकेतों से जानिए कहीं कमजोर तो नहीं आपका इम्यून सिस्टम, जानिए कैसे होगा मजबूत इम्यून सिस्टम….

हैल्थ इंडिया ।  ‘नो वल कोरोनावायरस’ ने भारत सहित पूरी दुनिया में तबाही मचा रखी है। इस एक वायरस (सार्स-कोव-2) से लाखों लोग संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। इसका टीका बनने में लंबा वक्त लग सकता है। आखिर हम कब तक लॉकडाउन करते रहेंगे? वायरस और उससे जुड़ी बीमारियों को रोकना हमारे हाथों में नहीं है, लेकिन ऐसी बीमारियों के सामने डटकर खड़े रहना और खुद को मजबूत करना हमारे हाथ में हो सकता है। हम मजबूत तब बनेंगे, जब हमारा प्रतिरक्षा तंत्र यानी इम्युनिटी सिस्टम मजबूत बनेगा। यह हमारे शरीर का वह रक्षा कवच है, जो हमें बीमारियों से बचाता है। कोरोना संकट के दौरान आपको अपनी इम्युनिटी बढ़ाने की जरूरत है। यदि इस समय आपका इम्यून सिस्टम मजबूत है तो यह कोरोना संकट के वक्त आपको सुरक्षित रख सकता है और यहां तक की आपकी जान भी बचा सकता है। हालांकि कई बार इम्यून सिस्टम सही तरीके से काम नहीं करता और आप संक्रामक रोगों की गिरफ्त में आ जाते हैं। कोविड-19 के मामलों में भी ऐसा होता है। कई बार विशेष कोशिकाओं, ऊतकों और अंगों का समूह उस तरह से कार्य नहीं करता है जैसे उसे कार्य करना चाहिए। कम से कम 80 ऐसी बीमारियां हैं, जो कि खराब इम्यून सिस्टम के कारण होती हैं। हालांकि कुछ संकेत हैं, जिसके जरिये हम जान सकते हैं कि हमारा इम्यून सिस्टम ठीक नहीं है।

ठंडे हाथ
यदि रक्त वाहिकाओं में सूजन रहती है तो आपकी उंगलियों, पैर की उंगलियों, कानों और नाक तक को गर्म रखने में परेशानी होगी। जब आप ठंड के संपर्क में होते हैं, तो इन क्षेत्रों की त्वचा सफेद और फिर नीले रंग की हो सकती है। इस तरह की परेशानी खराब इम्यून सिस्टम के कारण हो सकती है।

हल्का बुखार
यदि आपके शरीर का तापमान सामान्य से अधिक रहता है तो संभव है कि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली ने ओवरवर्क करना शुरू कर दिया हो। यह आने वाले संक्रमण के कारण भी हो सकता है। सिरदर्द कुछ मामलों में सिर में होने वाला दर्द इम्यून सिस्टम से संबंधित हो सकता है। उदाहरण के लिए, यह वस्कुलिटिस हो सकता है, जो एक संक्रमण या ऑटोइम्यून बीमारी के कारण रक्त वाहिका की सूजन है। त्वचा पर दाने आपकी त्वचा कीटाणुओं के खिलाफ आपके शरीर की पहली बाधा है। आपकी त्वचा कैसी दिखती है और कैसा महसूस करती है यह आपके इम्यून सिस्टम के बारे में बताता है कि यह कैसे काम कर रहा है।

थकान
आप अत्यधिक थकान महसूस करते हैं, जैसा फ्लू होने पर होता है, तो इसका अर्थ है कि आपके शरीर की सुरक्षा प्रणाली के साथ कोई परेशानी है। आपके जोड़ों या मांसपेशियों में भी दर्द हो सकता है। हालांकि इसके इम्यून सिस्टम के अलावा भी कई कारण हो सकते हैं।

पाचन संबंधी समस्या
2 से 4 सप्ताह से अधिक समय तक रहने वाले डायरिया का मतलब है कि इम्युन सिस्टम छोटी आंत या पाचन तंत्र की परत को नुकसान पहुंचा रहा है। कब्ज भी चिंता का विषय है। मल त्याग में कठिनाई होती है तो यह आपका इम्यून सिस्टम खराब हो सकता है। सूखी आंखें यदि आपको ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है, तो प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर की रक्षा के बजाय उस पर हमला करती है। आर्थराइटिस और लूपस इसके उदाहरण हैं।

ऐसे कई लोग पाते हैं कि उनकी आंखें सूखी हैं। आपको लगता है कि आंखों में कुछ है या फिर दर्द या आंखें लाल रहती हैं या फिर दृष्टि धुंधली भी हो सकती है। कुछ लोग पाते हैं कि वे परेशान होने पर भी रो नहीं सकते।

जोड़ों का दर्द
जोड़ों के अंदर की परत फूल जाती है और यह क्षेत्र कोमल व इस पर सूजन हो सकती है। यह इम्यून सिस्टम से जुड़ा है।

बालों का झड़ना
यदि आप सिर, चेहरे या शरीर के अन्य हिस्सों पर बाल खो देते हैं, तो आपके साथ एलोपेशिया एरिटा नामक स्थिति हो सकती है।

सफेद धब्बे
प्रतिरक्षा प्रणाली त्वचा की वर्णक कोशिकाओं से लड़ने का फैसला करती है तो आपकी त्वचा पर सफेद धब्बे दिखाई देने लगेंगे।

सूर्य के प्रति संवेदनशील
ऑटोइम्यून डिसऑर्डर में धूप में रहने से छाले या दाने हो सकते हैं या ठंड लगना, सिरदर्द या उल्टी भी हो सकती है।

हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्न होना
इसका अर्थ है कि शरीर नसों पर हमला कर रहा है, जो मांसपेशियों को संकेत भेजते हैं। इससे हाथ-पैर सुन्न हो सकते हैं।

निगलने में परेशानी
भोजन निगलने में परेशानी है तो मुंह से पेट तक भोजन पहुंचाने वाली नली में सूजन हो सकती है। गले में भोजन फंसने जैसा लग सकता है। इसका अर्थ इम्युन सिस्टम की समस्या भी हो सकती है।

कैसे बढ़ाएं अपनी इम्युनिटी?

1. इम्युनिटी बढ़ाने में डाइट अहमरू इम्युनिटी मजबूत करने के लिए जीवनशैली में डाइट की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। विटामिन बी12 को छोड़कर सारे खनिज पदार्थ और विटामिन्स भोजन से प्राप्त हो सकते हैं। विटामिन बी12 के लिए केवल डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट्स लिए जा सकते हैं। रुटीन का भोजन पोषण से भरा और विविधता लिए हुए होना चाहिए। इसमें सब्जियों और दालों की पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए मौसमी फलों को भी अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। इनमें मौजूद पॉलीफिनोल्स, विशेष तौर पर फ्लेवेनॉइड्स के कारण यह इम्युनिटी सेल्स के लिए अच्छे होते हैं। इसके अलावा एंटीऑक्सीडेंट्स भी इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। बीटा कैरोटीन, विटामिन सी और ई, जिंक और सेलेनियम एंटीऑक्सीडेंट्स के ही नाम हैं जो प्रायरू पालक, टमाटर, जामुन, गोभी, फूलगोभी, संतरा, पपीता, बादाम व मक्का से मिलते हैं। रोज के भोजन में इसमें से कुछ न कुछ जरूर लें।

2. कसरत को भी जीवनशैली का हिस्सा बनाएंरू साइकिलिंग, जिमिंग, रनिंग या अन्य किसी भी तरह की शारीरिक कसरत नियमित रूप से करने से व्हाइट ब्लड सेल्स की शरीर में सक्रियता बनी रहती है, जो इम्युनिटी के लिए जरूरी है। उनका शरीर में प्रवाह सुचारू रूप से चलता रहे, इसके लिए ब्लड फ्लो अच्छा होना चाहिए। यह कसरत से ही संभव है। युवाओं को सप्ताह में 150 मिनट मॉडरेट एक्टिविटीज जैसे साइकिलिंग, हाइकिंग आदि करनी चाहिए। वहीं सप्ताह में 75 मिनट रनिंग, स्विमिंग करना चाहिए।

3. डाइट और बेहतर लाइफ स्टाइल का तालमेल बनाएं रू प्रतिरक्षा तंत्र यानी इम्युनिटी सिस्टम किसी दवा या अच्छी डाइट आदि से अचानक ही बेहतर नहीं बन सकता। इसे तालमेल में रखने के लिए हमेशा ही अच्छी जीवनशैली बनाए रखना जरूरी है। इम्युनिटी सिस्टम की हर कोशिका अलग तरह से प्रतिक्रिया करती है। इसके चलते अगर इम्युनिटी बढ़ाने के लिए कोई दवा ली जाती है, तो कोशिकाएं कन्फ्यूज हो जाती हैं। दवाओं से स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए दवाओं से इम्युनिटी बढ़ाने के बजाय जीवनशैली में बदलाव से यह कोशिश करनी चाहिए।

4. अचानक शरीर को स्ट्रेस देने से प्रतिरक्षा तंत्र पर विपरीत असर पड़ता है। कोई फिजिकल एक्टिविटी शुरुआत में बहुत ज्यादा ना करें। इससे स्ट्रेस हॉर्मोन बढ़ता है। दिमाग पर स्ट्रेस देना भी इम्युनिटी सिस्टम के लिए खतरनाक है। किसी भी तरह का धूम्रपान शरीर को नुकसान पहुंचाता है। अत्यधिक अल्कोहल के सेवन से लिम्फोसाइट्स की संख्या भी कम हो जाती है। ऐसे में संक्रमण का शिकार होने की आशंका बढ़ जाती है। पर्याप्त नींद ना लेने से इम्युनिटी को नुकसान पहुंचता है। इससे लिम्फोसाइट्स टी सेल्स में कमी आती है। इससे इम्युनिटी पर असर पड़ता है ।


If you like the post, Please share the link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed