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प्रदेश में पर्यटन व तीर्थाटन को अलग करना ही होगा

पर्यटन माफियाओं ने चार धामों को बना दिया था पटाया बीच

प्रदेश में पर्यटन व तीर्थाटन को अलग करना ही होगा

 पर्यटन माफियाओं ने चार धामों को बना दिया था पटाया बीच
अनिल बहुगुणा वरिष्ठ पत्रकार
      अनिल बहुगुणा                  वरिष्ठ पत्रकार

पौड़ी। प्रदेश में आई आपदा ने जो कुछ करना था वह कर गई है और इसके घाव लंबे समय तक टीस मारते रहेंगे, लेकिन समय से ताकतवर कोई नहीं होता घीरे-घीरे जीवन पटरी पर आने लगेगा सब कुछ सामान्य होने के बाद हमें व सरकार को यह तय करना होगा कि प्रदेश में तीर्थाटन व पर्यटन की परिभाषा क्या हो ? अभी तक सरकार, नेताओं व व्यवसायियों ने इस परिभाषा को गंडमंड कर दिया है। एक बार फिर से प्रदेश में विध्वंसकारी पर्यटन को तीर्थाटन को रोकना होगा।

यह तो तय है कि इस आपदा के लिए प्रकृति उतनी जिम्मेदार नहीं है जितने कि हम सब है चाहे वह धार्मिक रूप से हो या फिर भौतिक रूप से। राज्य गठन के बाद प्रदेश के नेता और जनता इतनी मदमस्त हो गई कि उन्होंने यह भुला दिया कि प्रदेश की आर्थिकी जो तीर्थाटन व पर्यटन से थी के बारे में सोचना बंद ही कर दिया उन्हें लगा कि हिन्दु बाहुल्य इस देश व राज्य में पर्यटन व तीर्थाटन उसी तरह चलता रहेेगा जैसा कि पूर्व में चला आ रहा है और सरकार व मंदिर समिति के खजाने भरते रहेंगे जबकि पहली अंतरिम सरकार व निर्वाचित सरकार को सबसे अधिक ध्यान इसी पर देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया परिणााम यह हो गया कि नेताओं और ब्यूरोक्रेटस ने तीर्थाटन व पर्यटन को आपस में मिला दिया। इस लापरवाही का फायदा देश के उन लोगो ने उठाना शुरु कर दिया जो कि तीर्थाटन की परिभाषा से पूरी तरह से अनविज्ञ थे।

-राज्य गठन से पूर्व विप्रो; विध्वंसकारी पर्यटन रोगो संगठन ने मांग की थी तीर्थाटन व पर्यटन को अलग करने की

पिछले 13 वर्षो में स्थितियां लगातार बिगाडती रही लेकिन किसी का ध्यान इस ओर नहीं गया। राज्य गठन से पूर्व एक संस्था अस्तित्व में आई थी और उसने अचतव के नाम से उत्तराखण्ड में विध्वंसकारी प्रर्यटन को रोकने की बहस शुरु की थी। आज फिर से इस बहस की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

सरकारों को यह तय करना ही होगा कि इस देव भूमि में तीर्थाटन कैसे हो और इसके लिए पुरातन में क्या नियम प्रतिपादित किए गए थे या फिर सरकार को इस प्रदेश को देव भूमि कहलाना बंद करना होगा। चार धाम यात्रा को देश भर में फैले पर्यटन कराने वाले माफियाओं ने हाईजैक कर इस प्रदेश को पटाया बना डाला और इन पुरातन धामों में हनीमून पैकेज भी प्रस्तावित कर दिए गए जिससे पर्यटन माफियों ने लाखों कमाए। इन सब कारगुजारिंयो से इस देव भूमि का तीर्थाटन लगभग हासिए पर चला गया। विल्डरों ने रिवर व्यू वाले होटलों को अधाधुंध निर्माण कर पतित पावनी गंगा व उसकी सहायक नदियों की पवित्रता में गंदगी उड़ेलनी शरु कर दी इस कुकृत्य में नेता और सरकारों की भी पूरी मदद रही।

चार धाम यात्रा में धार्मिक नियम कानूनों को रख दिया गया था ताक पर

प्रदेश में आई जल प्रलय के बाद सरकार को अब चेत कर गंभीरता से इस पर निर्णय करना ही होगा कि प्रदेश मेें तीर्थाटन को धार्मिक नियम कानूनों के आधार पर चलाया जाय। और यदि ऐसा नहीं किया गया तो इसी तरह की आपदाएं कुछ वर्षो के अंतराल में जनता व सरकार को भुगतनी ही पड़ेगी।

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