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भाजपा सरकार में अब और मंत्रियों के बढ़ेंगे ठाठ-बाट, फॉर्च्यूनर के साथ अब हर जिले में मिलेंगे पायलट वाहन

फॉर्च्यूनर के साथ अब हर जिले में मिलेंगे पायलट वाहन

भाजपा सरकार में अब और मंत्रियों के बढ़ेंगे ठाठ-बाट

फॉर्च्यूनर के साथ अब हर जिले में मिलेंगे पायलट वाहन

तो क्या वीआईपी कल्चर से नहीं छूट पा रहा है मंत्रियों का मोह?

शिमला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में वीवीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। उन्होंने देशभर में गाड़िंयों पर लगी लाल बत्ती भी हटवा दी हैं। लेकिन मंत्री, राज्यमंत्री, सांसद, विधायक वीवीआईपी कल्चर का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। उत्तराखंड के पड़ोसी राज्य में भी भाजपा सरकार की ही सरकार है। और अब यहां के मंत्रियों के ठाठ और बढ़ने की खबरें सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्टस की माने तो हिमाचल प्रदेश में मंत्रियों के लिए महंगी फॉर्च्यूनर गाडियां खरीदने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब उनके लिए हर जिले में पायलट वाहन देने की तैयारी है। ये वाहन जिला पुलिस को दिए जाएंगे। मंत्री जब भी जिले का दौरा करेंगे तो यह पायलट वाहन मंत्री के काफिले की अगवानी करेंगे। तर्क दिया गया है कि वर्तमान में अलग से ऐसे पायलट वाहन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मंत्री के दौरे के दौरान पुलिस के एक वाहन को पायलट वाहन की ड्यूटी पर लगा दिया जाता है। इससे कई बार परेशानी भी होती है।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार हिमाचल पुलिस ने मंत्रियों को वीआईपी ट्रीटमेंट देने के दौरान अपनी कुछ दिक्कतों को मुख्यमंत्री से साझा किया था। वीआईपी मूवमेंट में स्थायी पायलट वाहन नहीं होने के चलते सुरक्षा व्यवस्था संभालना मुश्किल होता है। हाल में हुई डीसी-एसपी की कांफ्रेंस के दौरान पुलिस अधीक्षकों ने भी यह बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के सामने उठाई थी। इस पर मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सभी 13 पुलिस जिलों को एक-एक पायलट वाहन मुहैया कराने का आश्वासन दिया था। अब पुलिस मुख्यालय और सरकार के बीच पत्राचार शुरू हो गया है। पुलिस प्रवक्ता डॉ. खुशहाल शर्मा ने बताया कि डीसी-एसपी कांफ्रेंस के दौरान पायलट वाहन समेत जिन भी मुद्दों पर चर्चा हुई उन पर गृह विभाग से पत्राचार किया जा रहा है। वीआईपी मूवमेंट के दौरान पायलट वाहन लगाने में दिक्कत आती है, ऐसे में नया वाहन उपलब्ध होने पर काफी सुविधा होगी। केंद्र की मोदी सरकार ने वीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए नीली-लाल बत्ती और हूटर के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी। इसका असर ये हुआ कि देश भर में मंत्रियों से लेकर कई राज्यपालों ने भी आपने सरकारी वाहनों से लाल बत्ती को हटा दिया था। लेकिन मंत्री, राज्यमंत्री, सांसद, विधायक वीवीआईपी कल्चर का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं।

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