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मधुमक्खी पालन केन्द्र के रूप में विकसित होगा सवाड़ गांव !

मधुमक्खी पालन को लेकर ग्रामीणों को गजब का उत्साह

मधुमक्खी पालन केन्द्र के रूप में विकसित होगा सवाड़ गांव  !

मधुमक्खी पालन को लेकर ग्रामीणों को गजब का उत्साह

अरूण चमोली
   अरूण चमोली

हाड़ों से मुझे बचपन से ही बेहद लगाव रहा है। यही वजह है कि मैने अपने कार्यक्षेत्र के रूप में उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों को प्राथमिका दी। उत्तराखंड के हर गांव की अपनी बात है। आप जितने गांवों में जायेंगे आपको उतनी ही नई-नई रोचक जानकारियां मिलेंगी साथ ही लोगों की जीवन शैली को करीब से जानने का मौका मिलेगा। इस बार मधुमक्खी पालन जिसे हम लोग मौन पालन के नाम से भी जानते हैं के प्रशिक्षण को लेकर में पहुंचा भगवान बद्रीनाथ की पावन धरती चमोली जनपद के देेवाल ब्लाक स्थित सवाड़ गांव में। प्राकृतिक संपदा से लकदक इस गांव की खूबसूरती देखते ही बनती है।

सवाड़ गांव की पहचान फौजियों के गांव (शहीदों के गांव) के रूप में भी होती है। कहते हैं कि पहली और दूसरी वल्र्ड वार में इस गांव के लोगों ने अपनी वीरता का लोहा मनवाया था।

इस गांव के युवाओं की पहली पंसद भारतीय सेना रही है यही वजह है कि देश सेवा की खातिर प्राण न्यौछावर करने वालों में इस गांव के लाल सबसे आगे रहते हैं।

इन शहीदों की याद में हर साल 07 दिसंबर को अमर शहीद मेले का आयोजन होता है। पहाड़ों से पलायन की बात कहने वालों के लिए यह गांव एक नजीर हैं। इसकी आवादी 2500 से अधिक है।

फसलों से लहलाते हुए खेतों को देखकर दिल को बहुत सुकून मिला।

स्वाड़ गांव के उप-प्रधान वीरेन्द्र सिंह बिष्ट ने बताया कि हम लोग मिश्रित खेती करते हैं। जिसमें गेंहू, धान, आलू, रामदाना, मंडुवा, राजमा, के अलावा अन्य दालें आती हैं। इसके साथ ही मौसमी सब्जियां, फलों के उत्पादन के अलावा गांव के कुछ लोग मधुमक्खी पालन भी करते हैं।

गांव के लोगों के इसी मधुमक्खी पालन को स्वरोजगार से जोड़ने का मुझे मौका मिला है। जिसके लिए में उत्तराखंड ग्राम्य विकास समिति का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने इस गांव में मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण देने के लिए फ्यूजन इंस्टीटयूट आॅफ होटल मैनेजमैंट देहरादून का चुना।

फ्यूजन इंस्टीटयूट ने इसे एक चुनौती के तौर पर लिया है, क्योंकि पिछले दिनो अमर शहीद मेले में आये मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने यहां के लोगों से वादा किया है कि हम सवाड़ को उत्तराखंड के पहले मधुमक्खी पालन गांव के तौर पर विकसित करेंगे।

जिसके लिए हम विदेशों से उच्च गुणवत्ता की मधुमक्खी का इंमोर्ट कर ग्रामीणों को देंगे। ताकि नार्मल शहद के मुकाबले ग्रामीण इस शहद को अच्छे दामों पर बेचकर स्वरोजगार को बढ़ावा दें। इसके लिए उन्होंने बेहत्तर प्रशिक्षण की बात भी कही। जिसको फ्यूजन इंस्टीटयूट आॅफ होटल मैनेजमैंट ने सवाड़ गांव में शुरू कर दिया है।

हमारी कोशिश है कि प्रशिक्षण में शामिल होने वाले हर व्यक्ति को बेहत्तर प्रशिक्षण दिया जाये और हर व्यक्ति प्रशिक्षण लेने के बाद अपना मधुमक्खी पालन का स्वरोजगार शुरू कर सके।

एक बात और आप से शेयर करना चाहता हूं कि मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण लेने वालों में बड़ी संख्या रिटार्यड फौजियों की है। जिनका यह मानना है कि दृढ़ इच्छा शक्ति और विश्वास के बल पर वह सवाड़ गांव को मधुमक्खी पालन के केन्द्र के रूप में विकसित करने के लिए हर तरह का सहयोग करेंगे।

फ्यूजन इंस्टीटयूट आॅफ होटल मैनेजमैंट देहरादून की पूरी कोशिश रहेगी कि हम सवाड़ गांव के लोगों को मधुमक्खी पालन का उच्चस्तरीय प्रशिक्षण दें और उन्हें सरकारी की योजनाओं के जरिए स्वरोजगार को प्रोत्साहित करें।

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