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लोकसभा चुनाव से पहले नरेन्द्र मोदी का मास्टर स्ट्रोक

जमीन पर उतारने में कामयाब हो पायेगी मोदी सरकार

लोकसभा चुनाव से पहले नरेन्द्र मोदी का मास्टर स्ट्रोक

जमीन पर उतारने में कामयाब हो पायेगी मोदी सरकार

सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण के दांव से विरोधी भी हुए चित


नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने बड़ा दांव खेला हैै। आर्थिक रूप से पिछड़ी ऊंची जाति को रिझाने के लिए सरकार ने सरकारी नौकरियों में 10 फीसद आरक्षण देने की घोषणा की है। सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट ने आर्थिक रूप से पिछड़े ऊंची जाति के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण को मंजूरी दे दी है। इस आरक्षण का फायदा ऐसे लोगों को मिलेगा जिनकी कमाई सालाना 8 लाख से कम है। सूत्रों के अनुसार, मोदी कैबिनेट ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण देने की मंजूरी दे दी है। इसके तहत गरीब सवर्णों को भी आरक्षण का लाभ मिल सकेगा हालांकि इसके लिए सरकार को संविधान में संशोधन करना होगा। माना जा रहा है कि मंगलवार को सरकार सदन में ये प्रस्ताव ला सकती है। इस बीच मोदी सरकार की कट्टर विरोधी आम आदमी पार्टी ने एक ओर तो इस फैसले में सरकार के साथ खड़े होने और उसे समर्थन की बात कही है। लोकसभा चुनाव में लगभग 90 दिन का समय शेष है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या 90 दिन के भीतर ये प्रस्ताव कानून की शक्ल ले पाएगा क्या? आपको याद होगा तो मनमोहन सिंह ने अपने दूसरे कार्यकाल में जाटों को आरक्षण देने का निर्णय कर लिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में जाकर वो निर्णय गिर गया। अभी एक सवाल पैदा होगा कि सवर्णों में कितने गरीब हैं सरकार ने इसका कोई आंकड़ा जमा कराया है, क्योंकि आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ये जरूर पूछता है कि आपके पास आंकड़े क्या हैं? मोदी सरकार के सामने दो चुनौतियां हैं। एक चुनाव से पहले इसे कानून की शक्ल दे देना और दूसरा सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को टिकाए रखना। अगर इन दोनों चुनौतियों को सरकार पार कर लेती है तो मुझे लगता है कि चुनाव में बीजेपी को लाभ मिल सकता है। मोदी सरकार के इस फैसले को अगर देखा जाये तो हाल ही में हुए 5 राज्यों के चुनाव में सवर्णों की नाराजगी को दूर करने का यही एक सकारात्मक उपाय है। इसका पूरे देश में असर होगा, जहां जहां आंदोलन हुए। पाटीदार, जाट और मराठा का आंदोलन की भी धार कम होगी। लोकसभा चुनाव से पहले एक गेमचेंजर है लेकिन इसका जमीनी असर बहुत ज्यादा नहीं होगा क्योंकि सरकारी नौकरियां पहले से कम हो रही है। भाजपा को इसका काफी फायदा मिलेगा। यह एक ऐसा आरक्षण है जिसे किसी से छीन कर नहीं दिया जा रहा है।
हम सरकार का साथ देंगे- केजरीवाल
मोदी सरकार के कट्टर विरोधियों में से एक आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लिखा है कि चुनाव के पहले भाजपा सरकार संसद में संविधान संशोधन करे। हम सरकार का साथ देंगे। नहीं तो साफ हो जाएगा कि ये मात्र भाजपा का चुनाव के पहले का स्टंट है। सरकार विशेष सत्र बुलाये हम सरकार का साथ देंगे वरना ये फैसला चुनावी जुमला मात्र साबित होगा। इस तरह के ट्वीट्स से साफ होता है कि आम आदमी पार्टी मोदी कैबिनेट के इस फैसले को मात्र चुनावी जुमला मानती है। वह मान रही है कि अगर सरकार को ऐसा कुछ करना था तो संसद सत्र के शुरुआत में ही कर देना चाहिए था, सत्र के अंत में इसे लाकर सिर्फ जुमलेबाजी की जा रही है।

कब-कब हुआ है खारिज?

– अप्रैल, 2016 में गुजरात सरकार ने सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की थी. सरकार के इस फैसले के अनुसार 6 लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले परिवारों को इस आरक्षण के अधीन लाने की बात कही गई थी. हालांकि अगस्त 2016 में हाईकोर्ट ने इसे गैरकानूनी और असंवैधानिक बताया था.
– सितंबर 2015 में राजस्थान सरकार ने अनारक्षित वर्ग के आर्थिक पिछड़ों को शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 14 फीसदी आरक्षण देने का वादा किया था. हालांकि दिसंबर, 2016 में राजस्थान हाईकोर्ट ने इस आरक्षण बिल को रद्द कर दिया था. ऐसा ही हरियाणा में भी हुआ था.
– 1978 में बिहार में पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर ने आर्थिक आधार पर सवर्णों को तीन फीसदी आरक्षण दिया था. हालांकि बाद में कोर्ट ने इस व्यवस्था को खत्म कर दिया.
लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार का बड़ा ऐलान, सवर्ण जातियों को मिलेगा 10ः आरक्षण
– 1991 में मंडल कमीशन रिपोर्ट लागू होने के ठीक बाद पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया था और 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की थी. हालांकि 1992 में कोर्ट ने उसे निरस्त कर दिया था.

अभी किस को कितना आरक्षण?

साल 1963 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आमतौर पर 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जा सकता है. पिछड़े वर्गों को तीन कैटेगरी अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में बांटा गया है।

अनुसूचित जाति – 15 प्रतिशत

अनुसूचित जनजाति – 7.5 प्रतिशत

अन्य पिछड़ा वर्ग – 27 प्रतिशत

कुल आरक्षण- 49.5 प्रतिशत

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