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उत्तराखंड के इन सासंद के “मन की बात” पीएम भी सुनते हैं जनाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड को दी एनडीआरएफ बटालियन की सौगात

उत्तराखंड के इन सासंद के “मन की बात” पीएम भी सुनते हैं जनाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड को दी एनडीआरएफ बटालियन की सौगात

18 सालों में पहली बार देखा है ऐसा सासंद जो वादा नहीं, काम करता है.. 

नई दिल्ली। उत्तराखंड के इन सासंद के “मन की बात” पीएम भी सुनते हैं जनाब। जी हां यह बिल्कुल सच है अपने कम समय के कार्यकाल में इन सासंद महोदय ने उत्तराखंड के हित से जुड़ी जो भी बात केन्द्रीय मंत्रियों और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष रखी उस पर अमल जरूर हुआ है। यह कहने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि राज्य गठन के 18 सालों में पहली बार कोई ऐसा सासंद देखा है जो वादा बिल्कुल भी नहीं करता, बल्कि सीधे काम करके दिखाता है। हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी की। काठगोदाम-देहरादून चेयरकार की बात हो या फिर उत्तराखंड को राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) एक की स्थायी बटालियन देने की। प्रधानमंत्री मोदी ने बिना देर किए राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी की इस फरियाद को भी पूरा कर दिया।

प्रधानमंत्री की उत्तराखंड को सौगात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड को राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) एक की स्थायी बटालियन की सौगात दी है। राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने राज्यसभा में उत्तराखंड को एनडीआरएफ की स्थायी बटालियन आवंटित करने का मसला उठाया था। एनडीआरएफ की बटालियन मिलने से प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने वाले उत्तराखंड को बड़ी राहत मिलेगी। वैसे तो प्रदेश में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की कंपनियां तैनात हैं, लेकिन आपदाओं की भीषण घटनाओं के समय एनडीआरएफ की बटालियन की सेवाएं ली जाती हैं।


बलूनी ने जताया पीएम का आभार
केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस निर्णय पर भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया। बलूनी ने पिछले दिनों राज्यसभा में प्रदेश की आपदा का मुद्दा उठाया था। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की थी कि बचाव कार्यों में त्वरित सहयोग के लिए उत्तराखंड में एनडीआरएफ की स्थायी बटालियन की स्थापना की जानी चाहिए। सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड में बादल फटने, भूस्खलन, बाढ़, जलभराव, अतिवर्षा, वनाग्नि जैसी घटनाएं घटित होती रहती हैं, ऐसे में राज्य सरकार के सीमित संसाधन पूरी क्षमताओं के बाद भी अपेक्षित राहत नहीं दे पाते। इन परिस्थितियों में एनडीआरएफ की बटालियन का आवंटन काफ मददगार होगा।

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