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तीर्थाटन और पर्यटन के लिहाज से उत्तराखंड की धरती अनमोल

हरिद्वार: जहां है पंच तीर्थ स्थल

योगेन्द्र चोेहान
   योगेन्द्र चोेहान

हरिद्वार: जहां है पंच तीर्थ स्थल

तीर्थाटन और पर्यटन के लिहाज से उत्तराखंड की धरती अनमोल

हरिद्वार। चारों ओर से प्राकृतिक दृश्यों से घिरा हुआ उत्तराखंड भारत के उत्तर में पहाड़ी राज्य है। उत्तराखंड को ईश्वर की धरती या देवभूमि के नाम से जाना जाता है। हिंदुओं की आस्था के प्रतीक चारधाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री यहीं स्थित हैं। देहरादून इसकी राजधानी है। इस राज्य का क्षेत्रफल 53,483 वर्ग किमी. है और यह भौगोलिक तौर पर मुख्यतः दो हिस्सों गढ़वाल और कुमाऊं में बंटा हुआ है। यह राज्य अपने प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों, घने जंगलों, ग्लेशियरों और बर्फ से ढंकी चोटियों के लिए जाना जाता है। उत्तर का यह राज्य गंगा और यमुना समेत देश की प्रमुख नदियों का उद्गम स्थल भी है। उत्तराखंड, वैली ऑफ फ्लॉवर (फूलों की घाटी) का भी घर है, जिसे यूनेस्को ने विश्व विरासत की सूची में शामिल किया है।
तीर्थाटन और पर्यटन के लिहाज से उत्तराखंड की धरती अनमोल है। आज बात देवभूमि के उस तीर्थस्थल की जहां से अमूमन लोग बड़ी संख्या में अपनी तीर्थयात्रा शुरू करते हैं। हम बात कर रहे हैं हरिद्वार की। हरिद्वार, भारत के चुनिंदा धार्मिक स्थानों में से एक है। हरिद्वार का मतलब होता है हरि यानी ईश्वर का द्वार। इसे मायापुरी और मोक्षद्वार के नाम से भी जानते हैं। यहां उत्तराखंड के 5 तीर्थस्थान हैं जिन्हें पंच तीर्थ कहते हैं। ये हैं हर की पौड़ी, मनसा देवी, चंडी देवी, घाट और कनखल। हर की पौड़ी पर होने वाली गंगा आरती हिन्दुओं के लिए बहुत महत्व रखती है। हरिद्वार उत्तराखंड राज्य की पहाड़ियों के बीच स्थित, यह एक प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है। यह पवित्र शहर भारत के सात पवित्र शहरों अर्थात् ‘सप्त पुरी’ में से एक है। हरिद्वार शहर को मायापुरी, कपिला, मोक्षद्वार एवं गंगाद्वार के नाम से भी जाना जाता है। इस शहर का उल्लेख कई प्राचीन हिंदू महाकाव्यों में मिलता है। हरिद्वार को माता सती का घर भी कहा जाता है और इस स्थत्न को बागवान तक पहुंचने का रास्ता भी कहा जाता है
यह स्थल अपने विश्व प्रसिद्ध धार्मिक केन्द्रों एवं पर्यटक आकर्षणों के लिए जाना जाता है। हरिद्वार उन पहले शहरों में से एक है जहाँ गंगा पहाडों से निकलकर मैदानों में प्रवेश करती है। गंगा का पानी, अधिकतर वर्षा ऋतु जब कि उपरी क्षेत्रों से मिटटी इसमें घुलकर नीचे आ जाती है। यहाँ स्थित अधिकतर धार्मिक स्थल पवित्र गंगा नदी के किनारे स्थित हैं। इसे गंगा द्वार और पुराणों में इसे मायापुरी क्षेत्र कहा जाता है। यह भारत वर्ष के सात पवित्र स्थानों में से एक है।

क्या है खास
ये बहुत ही सुन्दर और धार्मिक स्थान है। यहां की विशेषता ये है कि यहाँ हर तरफ भजन कीर्तन घंटे की आवाज सुनाई देती है। परिवार के साथ घूमने लायक ये एक बहुत ही सुन्दर और आकर्षक पर्यटन स्थल है। यहाँ के खूबसूरत पहाड़ व कलकल करती नदियां जरूर आपका और आपके पूरे परिवार का मन मोह लेंगी। हिन्दुओ के बड़े मुख्य तीर्थ ऋषिकेश, केदारनाथ एवं बद्रीनाथ इसके आसपास के धार्मिक स्थल है। यहाँ जाने के लिए भी रास्ता यही से शुरू होता है। यहाँ गंगा किनारे हर दिन महा आरती होती है जिसकी आवाज दूर दूर तक गूंजती है, और पुरे हरिद्वार को पवित्र करती है।

हरिद्वार का कुम्भ, महाकुम्भ
कुंभ पर्व हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु कुंभ में स्नान करते हैं। ‘कुम्भ पर्व’ एक अमृत स्नान और अमृतपान की बेला कहा जाता है। भारतीय संस्कृति की जीवन्तता का प्रमाण प्रत्येक 12 वर्ष में यहाँ आयोजित होता है। इसी समय गंगा की पावन धारा में अमृत का सतत प्रवाह होता है। इसी समय कुम्भ स्नान का संयोग बनता है। कुम्भ पर्व भारतीय जनमानस की पर्व चेतना की विराटता का द्योतक है। मकर संक्रांति के होने वाले इस योग को “कुम्भ स्नान-योग” कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पृथ्वी से उच्च लोकों के द्वार इस दिन खुलते हैं और इस प्रकार इस दिन स्नान करने से आत्मा को उच्च लोकों की प्राप्ति सहजता से हो जाती है। यहाँ स्नान करना साक्षात स्वर्ग दर्शन माना जाता है। विशेषकर उत्तराखंड की भूमि पर तीर्थ नगरी हरिद्वार का कुम्भ तो महाकुम्भ कहा जाता है।

यहाँ के दर्शन का सही समय
यहां के पर्यटन स्थल व तीर्थ पर घूमने का मौसम मई के पहले या अंतिम सप्ताह में आरंभ होता है। जहां पंचांग के हिसाब से मंदिरों के पट खुलने के दिन और तारीख की घोषणा की जाती हैं। इसी तरह दशहरे के आसपास फिर घोषणा की जाती है कि अब मंदिरों के पट कब बंद होंगे।

रहने की व्यवस्था
यहां उत्तरांचल सरकार ने पर्यटकों के लिए आवास गृह बनाए हैं। पर्यटक अपने बजट के हिसाब से ठहरने के स्थान का चयन कर सकते हैं। धर्मशाला, बाबा कमली मंदिर समिति के आवास स्थान भी उपलब्ध है। यह एक विशिष्ठ धार्मिक स्थल होने के कारण यहां शाकाहारी भोजन ही मिलता है।

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