घुमक्ङ इंडिया

गजब! बंदर बोला डाॅक्टर साहब मेरा भी इलाज कर दो, में घायल हूं।

इंसानों के लिए ही नहीं जानवरों के लिए भी भगवान हैं ऐसे डाॅक्टर

 

गजब! बंदर बोला डाॅक्टर साहब मेरा भी इलाज कर दो, में घायल हूं।

इंसानों के लिए ही नहीं जानवरों के लिए भी भगवान हैं ऐसे डाॅक्टर

‘डॉक्टर’ केपी सिंह की जुबानी एक अनोखी कहानी

पढ़ना न भूलें दिल को छूने वाला एक घटना……….

श्रीनगर। गजब! बंदर बोला डाॅक्टर साहब मेरा भी इलाज कर दो, में घायल हूं। आपने अब तक तो इंसानों को इलाज के करवाने अस्पताल जाते हुए देखा होगा। लेकिन क्या सोचा है कि बिना जबान वाले जीव भी अपने इलाज के लिए अस्पताल का रूख कर सकत है। जी हां हम आपको हाल ही में हुई एक ऐसी घटना के बारें में बता रहे है जिसे जानकर कर आप हैरान हो जाएंगे। हाल ही में एक बंदर इंसानों वाले अस्पताल में अपना इलाज कराने खुद ही चला आया। जी हां, हालांकि यह खबर आपको अजीब लग सकती है, पर यह एक सच्ची घटना है। यह किस्सा है एक ऐसे बंदर का, जो पिछले कुछ दिन पहले श्रीनगर गढ़वाल के बेस अस्पताल में इलाज कराने पहुंचा। यहां वह सीधे वार्ड में बने नर्सिंग स्टॉफ के केबिन में घुसा। आप इस घटना पर यकीन नहीं कर पाएंगे, लेकिन यह सब हुआ है। विभिन्न अखबारों ने भी इस घटना का जिक्र किया था। लेकिन बावजूद इसके मुझे यकीन नहीं हो पा रहा था कि क्या वाकई ऐसा हुआ है।

 

अक्सर में काम के सिलसिले में श्रीगर जाता रहता हूं। इस बार भी जब में श्रीगर गया तो एक दुकान पर चाय पीने के लिए रूक गया। वहां भी उस बंदर की ही चर्चा चल रही थी। मन में चल उफाओह की स्थिति को खत्म करने के लिए मैने पूछ ही लिया आपने देखा कि ऐसा हुआ है। लेकिन जितने लोग भी वहां थे सब दूसरे व्यक्तियों का नाम लेने लगे, उसने कहा, अखबार में पड़ा। यहां भी मेरे प्रशन का उत्तर नहीं मिला। काम खत्म कर में श्रीगर बाजार घूमते-घूमते मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों न बेस अस्पताल जाकर ही इस बात का पता लगाया जाय कि क्या वाकई ऐसा कुछ हुआ था। जैसा कि सोशल मीडिया में लगातार आ रहा है। बेस अस्पताल में पहुंचा ही था कि तभी मेरी नजर डाॅक्टर के लिवास में खड़े एक शख्स पर पड़ी। चेहरा जाना पहचाना था तथी में लपक कर उस शख्स के पास पहुंचा, एक दूसरे को देखा चेहरे पर मुस्कान आई मैने कहा केपी तुम यहां वह बोला राकेश तू यहां कैसे ? बहुत दिनों बाद मिले हो ? कहाॅं थे? क्या करते हो? एक के बाद एक कई सवाल? सवालों के जवाब के साथ ही वह मुझे अपने केबिन में ले गए। दोपहर बाद का समय था तो मरीज थे नहीं? मेरे चेहरे के भावों को पढ़कर केपी सिंह ने पूछा क्या बात है ? क्या कुछ चल रहा है राकेश तुम्हारे दिमाग मैं ? मैने कहा यार मैं एक सवाल का जवाब ढूढंने अस्पताल में आया था कि क्या वाकई एक बंदर अपना ईलाज कराने आया था? क्या वाकई बंदर बोला डाॅक्टर साहब मेरा भी इलाज कर दो, में घायल हूं? मेरे बातों को सुन केपी सिंह मुस्करा उठे और बोले हां यह सच है बंदर ईलाज कराने आया था। क्या है पूरा किस्सा आइए जानिए …

केपी सिंह ने कहा उस दिन में अस्पताल में एक मरीज की जांच कर रहा था कि तभी श्रीनगर बेस अस्पताल में एक अजीबो गरीब वाकया हुआ। एक बंदर अस्पताल में घुस आया। बंदर को देख अस्पताल में हड़कंप मच गया। लेकिन बंदर ने किसी को कुछ नही किया। यही नहीं राकेश इसके बाद कीघटना पर तुम बिल्कुल भी यकीन नहीं कर पाओगे।
बंदर सीधा सर्जरी वार्ड में गया औ वहां बेड पर लाकर लेट गया। सर्जरी वार्ड के कर्मचारी हैरत में पड़ गए आखिर यह बंदर यहां क्यूं लेट गया। बंदर की हरकत देखकर वहां मौजूद लोग हैरत में पड़ गए। इस बीच में भी वहां पहुंचा तो देखा कि बंदर बिल्कुल शांत होकर बैड पर लेटा हुआ है और उसके चोट लगी हुई है। शुरू में तो मुझे और स्टाफ को बंदर को देखकर डर लगा कि कहीं वह झपटा न मार दे। या अचानक अपने ईदगिर्द लोगों को देखकर आक्रामक न हो जाए। लेकिन बड़ी देर तक बंदर को लेटा देखकर हमने साहस कर बंदर का चेकअप किया। बंदर आपसी लड़ाई में काफी चोटिल था। मैने वार्ड की नर्स सरिता पुरोहित से कहा कि घाव की सफाई कर वह घाव पर दवाई लगा दे। उसके बाद नर्स ने सफाई की और बंदर की चोट पर बीटाडीन से सफाई लगाई गई, जिससे उसको आराम मिला। कुछ देर तक बंदर मेज पर लेटा रहा और बाद में बाहर निकल गया। डाॅक्टर केपी सिंह से पूरे घटना को सुन मेरे मुंह से सिर्फ तीन शब्द निकले अद्भुत, अकल्पनीय, और अविश्सनीय। वाकई इंसानों के लिए ही नहीं जानवरों के लिए भी भगवान हैं ऐसे डाॅक्टर। मानवता की सच्ची मिशाल केपी सिंह को मेरा सलाम।


सीधे सर्जरी वार्ड में घुसा बंदर
पौड़ी गढवाल जनपद के श्रीनगर शहर में राजकीय मेडिकज कॉलेज के अधीन बेस अस्पताल है। यहां रविवार को मेन गेट से दाखिल होता हुआ एक बंदर सीधे सर्जरी वार्ड में बने नर्सिंग स्टॉफ के केबिन में घुस गया। और वहां रखे बेड पर चुपचाप लेट गया। घाव पर दवाई लगाने के बाद वह चुपचाप अस्पताल से चला गया। उसके बाद वह आसपास कहीं दिखाई नहीं दिया।

एक के बाद एक गटक गया तीन बोलतें ग्लूकोज
डाॅक्टर केपी सिंह कहते हैं कि हमने एक और अद्भुत नजारा देखा जब सर्जिकल वार्ड में कुर्सी पर बैठे स्टाॅफ के व्यक्ति को डॉक्टर समझकर बंदर अपना हाल बताने की कोशिश कर रहा था और अपना पेट दिखा रहा था। उसके इशारों से ऐसा लग रहा था जैसे उसके पेट में कुछ तकलीफ है। इस दौरान उसे एक केला खाना को दिया गया। उसने केला खाया और फिर ग्लूकोज की बोतल उठा ली। उसने पूरी बोतल गटक ली। कुछ कर्मचारी उसे पानी पिलाने लगे, लेकिन उसने नहीं पिया। बंदर इस दौरान तीन ग्लूकोज पीकर बंदर चुपचाप चलता बना।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close
Close