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मुंबई आयें हैं तो जरूर जायें श्री सिद्धिविनायक मंदिर

अद्वभुत है श्री सिद्धिविनायक मंदिर की महिमा

मुंबई आयें हैं तो जरूर जायें श्री सिद्धिविनायक मंदिर

अद्वभुत है श्री सिद्धिविनायक मंदिर की महिमा


त्यौहारों, उत्सवों और आस्था का देश है हमारा हिन्दुस्तान। सर्वविदित है कि यहां विभिन्न धर्मों, जातियों और समुदायों के लोग रहते हैं। सबकी अपनी-अपनी मान्यताएं और धार्मिक विश्वास हैं। यहां पर ईश्वर की आराधना खूब की जाती है। हर धार्मिक स्थल के साथ अलग अलग मान्यताएं जुड़ी हुई हैं जिनके कंारण लोग उन धार्मिक स्थलों पर जाकर अपनी मन्नत मानते हैं और पूरा होने पर पुनः वहां जाने का पूरा प्रयास करते हैं।
मन्नत-मान्यताओं, आस्था और विश्वास का अद्भुत केन्द्र है देश के सबसे पूजनीय मंदिरों में से एक श्री सिद्विविनायक मंदिर। यह मंदिर देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के प्रभादेवी इलाके में स्थित है। इस बार मुबंई कौथिग फांउडेशन के कर्ताधर्ता बड़े भाई श्री केशर सिंह बिष्ट जी के निमत्रण पर मुंबई कौथिग में जाने का मौका मिला। यूं तो बिजनेश मिटिंग के सिलसिले में कई बार मुंबई जाने का मौका मिला पर इतना करीब से मुंबई को कभी नहीं देखा जितना इस बार मुबई को जानने और समझने का मौका मिला। विचार एक नई सोच की पूरी टीम को साथ बड़े भाई श्री अरूण शर्मा जी के नेतृत्व में हम मुंबई पहुंचे। कौथिग के कार्यक्रम शाम 5 बजे से शुरू होते हैं तो लिहाजा इस बार हमारे पास प्रयाप्त समय था मुबंई के कुछ दर्शनीय स्थलों को देखने का। जिसकी शुरूआत हमारी टीम ने की मुंबई के प्रभादेवी में स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर से। यह मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है। मान्यता है कि यहां मांगी हुई मुराद पूरी होती ही होती है।
श्री सिद्विविनायक गणेश जी का सबसे लोकप्रिय रूप है। गणेश जी जिन प्रतिमाओं की सूड़ दाईं तरह मुड़ी होती है, वे सिद्वपीठ से जुड़ी होती हैं और उनके मंदिर श्री सिद्विविनायक मंदिर कहलाते हैं। कहते हैं कि श्री सिद्धिविनायक की महिमा अपरंपार है, वे भक्तों की मनोकामना को तुरंत पूरा करते हैं। मान्यता है कि ऐसे गणपति बहुत ही जल्दी प्रसन्न होते हैं और उतनी ही जल्दी कुपित भी होते हैं।

1801 में हुआ था मंदिर का निर्माण

पौराणिक मान्यता के अनुसार मुंबई स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर का निर्माण 1801 में विट्ठु और देउबाई पाटिल ने किया था। इस मंदिर में गणपति का दर्शन करने सभी धर्म और जाति के लोग आते हैं। इस मंदिर के अंदर एक छोटे मंडपम में भगवान गणेश के श्री सिद्धिविनायक रूप की प्रतिमा प्रतिष्ठापित की गई है। सूक्ष्म शिल्पाकारी से परिपूर्ण गर्भगृह के लकड़ी के दरवाजों पर अष्टविनायक को प्रतिबिंबित किया गया है। जबकि अंदर की छतें सोने की परत से सुसज्जित हैं।
गर्भ गृह में भगवान गणेश की प्रतिमा अवस्थित है। उनके ऊपरी दाएं हाथ में कमल और बाएं हाथ में अंकुश है और नीचे के दाहिने हाथ में मोतियों की माला और बाएं हाथ में मोदक (लड्डुओं) भरा कटोरा है। गणपति के दोनों ओर उनकी दोनों पत्नियां रिद्धि और सिद्धि मौजूद हैं जो धन, ऐश्वर्य, सफलता और सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने का प्रतीक है। मस्तक पर अपने पिता शिव के समान एक तीसरा नेत्र और गले में एक सर्प हार के स्थान पर लिपटा है। सिद्धिविनायक का विग्रह ढाई फीट ऊंचा होता है और यह दो फीट चैड़े एक ही काले शिलाखंड से बना होता है। चतुर्भुजी विग्रह श्री सिद्धिविनायक की दूसरी विशेषता यह है कि वह चतुर्भुजी विग्रह है। इस मंदिर में सिर्फ हिंदू ही नहीं, बल्कि हर धर्म के लोग दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। हालांकि इस मंदिर की न तो महाराष्ट्र के ‘अष्टविनायकों’ में गिनती होती है और न ही ‘सिद्ध टेक’ से इसका कोई संबंध है, फिर भी यहां गणपति पूजा का खास महत्व है।

सिद्ध-पीठ से कम नहीं है महत्व

भगवान गणेश का हिंदूओं में बहुत महत्व है. मान्यता है कि प्रत्येक नवीन कार्य से पूर्व, नए जगह जाने से पहले और नई संपत्ति के अर्जन से

पूर्व इनका पूजन अनिवार्य है। महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के सिद्ध टेक के गणपति भी श्री सिद्धिविनायक के नाम से जाने जाते हैं और उनकी गिनती अष्टविनायकों में की जाती है। महाराष्ट्र में गणेश दर्शन के आठ सिद्ध ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल हैं, जो अष्टविनायक के नाम से प्रसिद्ध हैं। लेकिन अष्टविनायकों से अलग होते हुए भी इसकी महत्ता किसी सिद्ध-पीठ से कम नहीं। हालांकि इस मंदिर में रोजाना ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं लेकिन मंगलवार के दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंगलवार को यहां इतनी भीड़ होती है कि लाइन में चार-पांच घंटे खड़े होने के बाद दर्शन हो पाते हैं। हर साल गणपति पूजा महोत्सव यहां भाद्रपद की चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक विशेष समारोह पूर्वक मनाया जाता है। इस मंदिर में अंगारकी और संकाष्ठि चतुर्थी के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं

‘फूल गली’ जरूर याद रखना

सिद्धिविनाय मंदिर तक एक संकरी गली जाती है जिसे ‘फूल गली’ के नाम से जाना जाता है. यहां बड़ी संख्या में पूजन सामग्री से पटी दुकानें स्थित हैं. यहां दुकानदार पूजन सामग्री तुलसी माला, नारियल, मिष्ठान इत्यादि बेचते हैं।

अमीर मंदिरों में होती है गिनती

कहा जाता है कि 50 करोड़ रुपये की वार्षिक आय के साथ मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर, महाराष्ट्र का दूसरा सबसे अमीर मंदिर है। मंदिर अपने मशहूर फिल्मी भक्तों के कारण भी प्रसिद्ध है। श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट चढ़ावे के रूप में करीब 15 से 20 करोड़ रुपये के लगभग प्रतिवर्ष पाता है। यही नहीं मुंबई के कई विशिष्ट लोग जैसे बाल ठाकरे, अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदुलकर यहां अक्सर आते रहते हैं।

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