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दून मेयर पद के दमदार दावेदारों में से एक सुनीता प्रकाश

दिखावे की राजनीति व समाजसेवा से दूर रहती हैं सुनीता प्रकाश

दून मेयर पद के दमदार दावेदारों में से एक सुनीता प्रकाश
दिखावे की राजनीति व समाजसेवा से दूर रहती हैं सुनीता प्रकाश

 

 अवधेश नौटियाल
    अवधेश नौटियाल

देहरादून। देहरादून नगर निगम के मेयर पद के लिए कांग्रेस में घमासान मचा है। दावेदार जोर आजमाइश में जुटे हैं। दिग्गज नेताओं के साथ पोस्टर-बैनर के जरिये दबाव और माहौल बन रहा है। कई दावेदार पोस्टर-बैनरों से गायब हैं, लेकिन फील्ड में पूरी ताकत से मौजूद हैं। दावेदार अपने आकाओं के यहां रोज हाजिरी लगा रहे हैं। आखिर ये सब हो भी क्यों ना। उत्तराखंड के सबसे बड़े नगर निगम के मेयर की कुर्सी का जलवा ही कुछ ऐसा है। अपनी-अपनी ताकत और कमजोरी के बीच कांग्रेस से कई दावेदार टिकट की दौड़ में शामिल हैं। हालांकि सब ये भी जानते हैं कि राह किसी की आसान नहीं है। आसानी से टिकट मिलने वाला नहीं है।
कांग्र्रेस में दून मेयर पद को लेकर टिकट की लड़ाई में एक दर्जन से अधिक नेता हैं। लेकिन इन सबके बीच प्रदेश सचिव सुनीता प्रकाश की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही रही है। इसके कई कारण हैं। सौम्य, मिलनसार, छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय, उच्च शिक्षित, वकील, होने के साथ एक समाजसेवी के तौर पर वह लम्बे समय से लोगों के बीच कार्य कर रही हैं। कांग्रेस के तमाम कार्यक्रमों में सक्रियता के साथ सुनीता प्रकाश एक लोकप्रिय समाजसेवी व वकील भी हैं। निःस्वार्थ भाव से सुनीता प्रकाश लम्बे समय से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की मद्द को अपनी सामथ्र्य अनुसार हमेशा तैयार रहती है। गरीब बच्चों की निशु्ल्क शिक्षा, बालिकाओं की एफडी बनाने के साथ ही बड़ी संख्या में लोगों का ईलाज व वकालात के काम निशुल्क करती रहती हैं। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जनजागरूकता अभियान हो या फिर महिला सुरक्षा को लेकर आंदोलन की बात अब हर जगह सुनीता प्रकाश को देख सकते हैं।
दून मेयर की सीट को जीतने के लिए कांग्रेस को अपने प्रत्याशी में जो कुछ योग्यताएं चाहिए उसमें सुनीता प्रकाश फिट बैठती हैं। यूं तो कांग्रेस की तरफ से मेयर पद को लेकर टिकट के दावेदार कई हैं लेकिन उनमें से ज्यादातर को जनता ने 2017 के विधानसभा चुनाव या उससे पूर्व के चुनाव में नाकार दिया है। कांग्रेस को वापसी के लिए हर हाल में नगर निगम व पंचायत चुनाव में बेहत्तर प्रदर्शन करना है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह भी चाहेंगे कि उस प्रत्याशी को टिकट थमाया जाय जो लगातार जनता के सम्पर्क में हो और जिसे हर तबके का समर्थन हासिल हो। ऐसे में सुनीता प्रकाश हर लिहाज से फिट बैठती हैं। निर्बल वर्ग, राज्य आंदोलनकारियों, वकीलों के समर्थन के साथ ही उन्हें अन्य वर्गों का समर्थन भी हासिल है।
कांग्रेस की प्रदेश सचिव रहने के साथ समाजसेवा के जरिए सक्रिय रहने वाली सुनीता प्रकाश शहर के मिजाज, कार्यकर्ताओं की भावनाओं जैसी कई बातों को अच्छी तरह से जानती हैं। उनका सबसे मजबूत पक्ष जनता के बीच लगातार बने रहना है। जनता में वह सुनीता दीदी के नाम से लोकप्रिय हैं। यदि देहरादून मेयर पद महिलाओं के लिए आरक्षित होता है, तो फिर सुनीता प्रकाश की राह बहुत आसान हो जायेगी। सुनीता प्रकाश ने महिला कार्यकर्ताओं के बीच खास पहचान बनाई है। विधानसभा चुनाव में वह कई बार टिकट मांग चुकी हैं। महिलाओं के चुनावी प्रतिनिधित्व के सवाल पर मुखर रही हैं। उनकी दावेदारी की मजबूती भी इस बात पर काफी हद तक टिकी है कि ये महिला आरक्षित होती है। सुनीता प्रकाश ने राजपुर विधानसभा सीट से टिकट की दावेदार रही हैं लेकिन उनका टिकट काट दिया गया था। उनके पीछे उनके एडजस्टमेंट के वायदे ने काम किया। ये एडजस्टमेंट अब मेयर का टिकट होगा या नहीं, कहना मुश्किल है। लेकिन इतना साफ है कि दून नगर निगम के मेयर पद के दमदार दावेदारों में से एक सुनीता प्रकाश भी हैं।

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