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सांसद अनिल बलूनी ने की उत्तराखंड को विशेष राहत पैकेज दिए जाने की मांग

उत्तराखंड में एनडीआरएफ की स्थायी यूनिट की मांग

सांसद अनिल बलूनी ने की उत्तराखंड को विशेष राहत पैकेज दिए जाने की मांग

उत्तराखंड में एनडीआरएफ की स्थायी यूनिट की मांग

दिल्ली । उत्तराखड से राज्यसभा बने अनिल बलूनी को भले ही कम समय हुआ हो लेकिन जब से वो राज्यसभा सासंद बने हैं कहना गलत नही होगा की उन्हाने उत्तराखंड की हर एक समस्या को राज्यसभा तक उठाया है । ऐसा ही एक बार फिर देखने को मिला मानसून सत्र के दौरान जब राज्य सभा सत्र चल रहा था ।

उत्तराखंड के मुद्दों को लेकर राज्यसभा में अनिल बलूनी जमकर गरजे। उन्होंने आसमानी आफत से जूझ रहे प्रदेश की जनता की आवाज को उठाया और जल्द से जल्द मद्दत के लिए केंद्र सरकार से गुहार लगाई। वहीं इस मुद्दे पर बाकी के 6 सांसदों की चुप्पी पर सोशल मीडिया में तमाम बहस हो रही है।

दरअसल इस वक्त समूचे उत्तराखंड में बारिश का दौर जारी है और कई जगह आपदा जैसी गंभीर स्थिती पैदा हो गई है । इन सबके बीच अनिल बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड में निरंतर वर्षा, अतिवृष्टि, बादल फटने और भूस्खलन के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त है। जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव दिखाई दे रहे हैं। विगत कुछ वर्षों से अतिवृष्टि व बादल फटने की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। साथ ही सांसद बलूनी ने कहा कि इन प्राकृतिक आपदाओं के कारण राज्य में जान-माल का भारी नुकसान हो रहा है। बड़ी संख्या में भवनों, कृषि भूमि, मार्गों एवं मवेशियों का नुकसान हो रहा है। लोग जहां-तहां फंसे हुए हैं। अतिवृष्टि और बादल फटने के कारण विद्युत लाइनें, नहरें, गूल, पेयजल लाइनें, संचार लाइनें, संपर्क मार्ग ध्वस्त हैं।

उत्तराखंड को मिलना चाहिए विशेष राहत पैकेज

सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार भले ही पूरी तरह से जनता को राहत पहुंचाने के कार्यों में लगी हुई है लेकिन राज्य सरकार के पास संसाधनों की कमी है । ऐसी परिस्थितियों में आपदा प्रभावित उत्तराखंड राज्य को राहत पैकेज पर विचार किया जाना चाहिए क्योंकि उत्तराखंड भोगौलिक रूप से दुर्गम और प्राकृतिक रूप से संवेदनशील राज्य है। यहाँ कभी भी कोई बड़ी घटना घट सकती है।

उत्तराखंड में एनडीआरएफ की स्थायी यूनिट की मांग

वहीं उन्होने कहा कि उत्तराखंड में एनडीआरएफ की स्थायी यूनिट की स्थापना की बहुत जरूरत है ताकि आपदा के समय फंसे नागरिकों को समय पर सहायता मिल सके।

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