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राज्यसभा की जंग आखिर में तीन नेताओं पर आकर सिमटी?

इस त्रिमूर्ति में से ही कोई जायेगा राज्यसभा?

राज्यसभा की जंग आखिर में तीन नेताओं पर आकर सिमटी?

इस त्रिमूर्ति में से ही कोई जायेगा राज्यसभा?

अरूण शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार,
 अरूण शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार,

देहरादून।  चर्चाए गर्म है कि राज्यसभा की जंग आखिर में तीन नेताओं पर आकर सिमट गई है। कहा जा रहा है कि इस त्रिमूत्र्रि में से ही कोई एक राज्यसभा जायेगा। लेकिन इसमें सच्चाई कितनी है? उत्तराखंड में राज्यसभा के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। लेकिन प्रचंड बहुमत के साथ राज्य की सत्ता पर काबिज भाजपा के लिए प्रत्याशी तय करना ढेडी खीर साबित हो रहा है। एक मात्र राज्यसभा सीट को लेकर बीजेपी के अंदर एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति हो रखी है। दिल्ली से लेकर देहरादून तक घमासान मचा हुआ है। उत्तराखंड के नेता अपना जुगाड़ फिक्स करने दिल्ली आलाकमान की परिक्रमा कर रहें हैं तो दिल्ली में बैठे दिग्गज भी खुद उत्तराखंड की इस सेफ सीट से राज्यसभा जाने का ख्आब देख रहे हैं। बीजेपी में कई ऐसे बड़े नाम हैं जिन्हें राज्यसभा भेजा जा सकता है। लेकिन वो कौन होगा ये बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। संगठन के सामने मुश्किल ये है कि किसी एक को खुश करने में कई नाराज हो सकते हैं। यही कारण है कि पार्टी इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। सूत्रों की माने तो पार्टी में राज्यसभा सीट को लेकर अंदर खाने कई बार मंत्रणा हो चुकी है, लेकिन इस मंत्रणा का निष्कर्ष क्या निकला, इसका किसी को पता नहीं, या फिर सबने होंट सी रखें हैं।

पैराशूट नेताओं की पहली पंसद उत्तराखंड

अभी इस बात को लेकर भी संशय बना हुआ है कि राज्यसभा उत्तराखंड का ही कोई नेता जायेगा या फिर दिल्ली से किसी पैराशूट नेता को राज्यसभा भेजा जायेगा। इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि केन्द्र सरकार में कई मंत्री ऐसे हैं जो राज्यसभा सांसद हैं और जिनका कार्यकाल भी अप्रैल माह में पूर्ण हो रहा है। ऐसे में बीजेपी आलाकमान चाहेगा कि ऐसे मंत्रियों को किसी सेफ सीट से ही राज्यसभा भेजा जाये जहां चुनाव में रस्साकस्सी की नौबत न आये। ऐसे में उत्तराखंड से बीजेपी आलाकमान के सामने एक सेफ बिल्कप हैं क्योंकि यहां बीजेपी के पास प्रचंड बहुमत है। और कांग्रेस ने पहले ही घुटने टेक दिये हैं कि वह राज्यसभा चुनाव में प्रत्यासी खड़ा नहीं करेगी। ऐसे में यहां से बहुत आसानी से बिना चुनावी गणित के राज्यसभा भेजा सकता है।

कैलाश बिजयवर्गीय
कुछ खबरें जो छनकर बहार आ रही हैं उसके मुताबिक इस एक मात्र राज्यसभा सीट के लिए जिन तीन लोगों की लाटरी लग सकती है उनमें पहला नाम बीजेपी के फायर ब्रांड नेता कैलाश बिजयवर्गीय का आता है। उत्तराखंड में हरीश सरकार को चित करने में कैलाश बिजयवर्गीय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सूत्रों की माने तो वह राज्यसभा जाने को इच्छुक भी बताये जा रहे हैं। उत्तराखंड की राजनीति को करीब से जानने वाले कैलाश बिजयवर्गीय को आलाकमान उन्हें साल 2016 में किए गए उलटफेर का तोहफा उन्हे राज्यसभा भेजकर दे सकता है। कैलाश बिजयवर्गीय के राजनीतिक गणित के कारण ही भाजपा का स्कोर 2017 के विधानसभा चुनाव में 57 तक पहुंचा। भाजपा आलाकमान को भी राज्यसभा में विपक्ष से लोहा लेने के लिए ऐसे ही तेजतर्रार नेता की जरूरत है। पैराशूट प्रत्याशियों में सबसे मजबूत नाम कैलाश विजवर्गीय का ही आता है।

अनिल बूलनी
पैराशूट प्रत्याशियों में दूसरा मजबूत नाम राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल बूलनी का आता है। सूत्रों की माने तो राज्यसभा की इस सीट पर अनिल बलूनी का नम्बर भी लग सकता है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि जिस तरह से शौर्य डोभाल की पौड़ी संसदीय सीट पर सक्रियता बढ़ी है उससे कहीं न कहीं यह अर्थ निकाले जा रहे हैं कि वह 2019 का लोकसभा चुनाव इस सीट से लड़ सकते हैं। ऐसे में अगर शौर्य डोभाल को आलाकमान लोकसभा के लिए आगे करता है तो काफी पहले से पौड़ी सीट से लोकसभा चुनाव का ख्आब पाले अनिल बलूनी को राज्यसभा भेजा जा सकता है। अनिल बलूनी और शौर्य डोभाल दोनों की ही गिनती आलाकमान के करीबी लोगों में होती है। उत्तराखंड के मूल निवासी होने के साथ ही कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र से उत्तराखंड की राजनीति में सक्रिय रहे अनिल बलूनी का पक्ष भी मजबूत दिखाई दे रहा है।

अजय भट्ट
उत्तराखंड की सियासत से एक और बड़ा नाम जो इन दिनों चर्चा में है वह है प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट का है। अजय भट्ट अगर राज्यसभा जाते हैं तो पार्टी में किसी को कोई दिक्कत होती नजर नहीं आ रही है। जब से अजय भट्ट प्रदेश अध्यक्ष बने हैं तब से उनकी पहचान सभी को साथ लेकर चलने वाले नेता के तौर बनी है। यही नहीं कांग्रेस से भाजपा में आये नेताओं से भी उनके संबध पूर्व से ही मधुर हैं। ऐसे में उन नेताओं को भी कोई परेशानी अजय भट्ट के नाम पर नहीं होगी।

यहां नहीं चलता एक व्यक्ति एक पद का सिंद्वात?
अगर बीजेपी आलाकमान अजय भट्ट को राज्यसभा भेजता है तो बहुत से नेता यह सोचकर भी विरोध नहीं करेंगे कि भट्ट अगर राज्यसभा गए तो उनका प्रदेश अध्यक्ष बनने का नम्बर आ सकता है। लेकिन हम एक बात बता दें कि ऐसा सोचने वाले नेताओं के हाथ मायूसी लग सकती है? कारण राज्यसभा को लेकर बीजेपी में इस तरह का कोई सिद्वात नहीं है। उदाहरण के लिए बीजेपी से मनोहर कांत ध्यानी प्रदेश अध्यक्ष के साथ राज्यसभा के सांसद भी रहे। उत्तराखंड में कांग्रेस से हरीश रावत भी प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही राज्यसभा संासद भी थे। यहीं नहीं अमित शाह भी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ ही वर्तमान में राज्यसभा सांसद भी हैं। इस लिए अगर अजय भट्ट को राज्यसभा भेजा भी जाता है तो उनकी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर खतरे जैसी कोई बात नहीं हैं। इस लिए अध्यक्ष बनने का सपना देख रहे नेताओं के लिए यहां मायूस होने वाली बात है। हालांकि अजय भट्ट कह भी रहे है कि पार्टी जो जिम्मेदारी देगी वो उसे निभाऐंगे.

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