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ये आम तो खट्टे हैं रावत जी, ऐसा क्या हुआ..? जानिए इस रिपोर्ट में…

उत्तराखण्ड के इन दो दिग्गजों के शब्दभेदी बाणों का क्या है रहस्य?

ये आम तो खट्टे हैं रावत जी, ऐसा क्या हुआ..? जानिए इस रिपोर्ट में…

उत्तराखण्ड के इन दो दिग्गजों के शब्दभेदी बाणों का क्या है रहस्य?

देहरादून। राजनीति की अजब-गजब रंग होते हैं। उत्तराखंड की सियासत में ऐसी अजब-गजब रंग समय-समय पर देखने को मिलते रहते हैं। कभी नेताओं की आपसी दोस्ती के चर्चे होते हैं तो कभी उनकी जुबानी जंग को लेकर लोग सोचते रहते हैं क्या आखिर यह हो क्या रहा है। कुछ ऐसी चर्चाएं आजकल उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को लेकर हैं। कभी साथ आम खाकर दोस्ती का संदेश देने वाले दोनों नेताओं के बीच आजकल सोशल मीडिया वार छिड़ा हुआ है। दोनों नेता एक-दूसरे पर खूब शब्दभेदी बाण चला रहे हैं। दोनों ही नेताओं के फॉलोअर्स समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर यह हो क्या रहा है। आप भी पढ़िए क्या कमेंट कर रहे हैं दोनों नेता फेसबुक पर एक दूसरे के लिए………..

कुछ ऐसा लिखा है हरीश रावत ने अपनी फेसबुक में

मुख्यमंत्री Trivendra Singh Rawat जी को मेरी चुनावी हारें गिनाने का बड़ा शौक है। मुख्यमंत्री जी, गिरते है सह सवार ही मैदान-ए-जंग में। मुझे हराने वाले लोगों को आज याद नहीं है, हारने वाला हरीश रावत आज भी लोगों की जुबां में जिंदा है। मेरी शुभकामना है आप 2022 का चुनाव भेंटें मगर याद रखना आप रिकॉर्ड बुक में जिंदा रहेंगे, मैं इसके बाद भी लोगों की भावना और जुबां में जिंदा रहूंगा। रहा सवाल इस बार के चुनाव का, क्या आप कहीं चुनाव में थे? क्या आपके नाम व काम पर किसी ने वोट मांगा? हरीश रावत, भूतपूर्व मुख्यमंत्री इस चुनाव में भी मतदाताओं के मध्य जिंदा था, उसके काम की, उसके सोच की चर्चा हो रही थी। खैर भगवान ने चाहा तो आपका घमंड जल्दी टूट जाएगा।

जवाब में कुछ ऐसा लिखा है CM त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपनी फेसबुक में

आदरणीय Harish Rawat जी,
चुनाव में हार जीत लगी रहती है। लोकतंत्र में जिताना व हराना जनता के हाथ में है। आपने ठीक कहा, कि आप लोगों की जुंबा पर जिंदा हैं, लेकिन किन कामों के लिए जिंदा हैं, इसका अहसास आपको जनता 2017 में करवा चुकी है। लोगों के दिलों में कौन कितना जिंदा रहता है, इस बात का फैसला 23 मई को हो जाएगा।

मैं समझ सकता हूँ, कि आप पर चुनाव का बहुत दबाव रहा होगा इसलिए आपकी जानकारी के लिए बता दूं, मैने प्रदेश के करीब करीब हर कोने में 15 दिन में 60 जनसभाएं की और हर जगह जनता का भऱपूर प्यार और समर्थन मुझे और मेरी पार्टी को मिला।

जहां तक बात अहंकार की है, तो आप मुझे इस बात का जवाब दीजिए कि अहंकारी कौन है, अति आत्मविश्वास से कौन लबरेज था? और ये बात मैं इसलिए कह रहा हूँ कि आपने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को नैनीताल लोकसभा क्षेत्र में रैली करने तक के लिए नहीं बुलाया। अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रति इतना अविश्वास क्यों? इसको मैं आपका अति आत्मविश्वास कहूं, या अहंकार? बहरहाल आप भी यह मान चुके हो कि आप के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आने से आपको फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता।

जहां तक बात भेंट करने की है, वो हमेशा करते रहेंगे। जहां तक मेरी सरकार के कामों का सवाल है उसका आंकलन भी जनता जनार्दन कर रही है और करेगी। आपकी बेचैनी मैं समझ सकता हूँ। खैर भगवान से मैं आपके स्वस्थ जीवन व दीर्घायु होने की कामना करता हूँ।

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