उत्तराखंडखबर इंडिया

मुन्नी भाजपा की नाव में मगन

प्रो. जीतराम अब राम भरोसे 

मुन्नी भाजपा की नाव में मगन

प्रो. जीतराम अब राम भरोसे 

– छोड़ो वंशवाद की बातें, ये तो हो गई पुरानी
– तुम जीत गये जीतराम तो ठीक, हारे तो गम न करना

गुणानंद जखमोला। वरिष्ठ पत्रकार
   गुणानंद जखमोला, वरिष्ठ पत्रकार

थराली।  भाजपा के विधायक मगनलाल शाह की स्वाइन फ्लू से मौत हो गयी। एक विधायक की स्वाइन फ्लू से हुई मौत पर न तो बवाल हुआ और न ही सरकार को अब तक चेतना आई है कि स्वाइन फ्लू की जांच किसी सरकारी अस्पताल में जांच हो। महंत इंद्रेश में यह सुविधा है लेकिन निजी अस्पतालों का अहम का टकराव मरीज की जान से कहीं अधिक है, चाहे वो आम आदमी हो या विधायक। अब चुनाव सिर पर आया तो सरकार की नींद टूटी। सोचा, किसे टिकट दें, वंशवाद का विरोध कर सत्ता के शीर्ष पर पहुंची भाजपा ने स्व. विधायक मुन्नी शाह को सिमपैथी को वोट में बदलने के लिए मैदान में उतारा है। वैसे भी यदि गुड्डू लाल या घुनियाल को टिकट मिल भी जाता तो दोनो ही चालाक हैं, जैसे लालच में अब चुप बैठ गये, संभवत विधायक बन जाते तो लूट-मार मचाते। अच्छा ही हुआ। फिर घर की बात घर में ही रह गयी। मुन्नी का एक बेटा बीटेक कर रहा है। ये थराली जैसे पिछड़े क्षेत्र के लोगों के लिए अच्छी बात है।

अब भाजपा हो या कांग्रेस सभी अपने लाडलों व लाडलियों को टिकट दे रहे हैं। हरवंश कपूर का बेटा अमित भी पूरी तरह से तैयार बैठा है। सांसद व पूर्व सीएम बीसी खंडूडी ने भी अपनी बेटी रितु को विधायक बना दिया। भगवान जाने वो यमकेश्वर के लोगों की सुध ले भी रही है या नहीं। उधर, विजय बहुगुणा तो घृतराष्ट्र हैं। उनका बेटा साकेत और विधायक सौरभ सत्ता की चैखट पर दस्तक दे चुके हैं। और भी बेटे-बेटियां लाइन में हैं। फिर मुन्नी को कैसे दोष दें। वैसे भी लड़ाई जीत राम या मुन्नी की नहीं है। लड़ाई कांग्रेस और बीजेपी की है। कांग्रेस वैसे ही चारों खाने चित है। 80 प्रतिशत भारत भगवा हो गया है। कर्नाटक भी उसे वेंटीलेटर से बाहर नहीं ला सका है।

उत्तराखंड में कांग्रेस विपक्ष के रूप में जीरो है और नीतियों के रूप में भी जीरो है। किशोर उपाध्याय ने पार्टी संगठन का भट्ठा बिठा दिया तो हरीश रावत जी अब दो सीटों पर हार के सदमे से बाहर नहीं निकले हैं। रही प्रीतम सिंह की बात, तो उनके पास भी रणनीतिकारों से कहीं अधिक चाटुकारों की भीड़ है जो हर समय उन्हें घेरे रखती है। वैसे भी एक अच्छी लीडरशिप देने में अब तक नाकाम ही साबित हुए हैं प्रीतम। इंदिरा हृदयेश गुमशुदा हैं। देवी की तरह अवतरित होती हैं और गिने-चुने प्रवचन ही देती हैं। ऐसे में यदि थराली में कांग्रेस हार भी जाएं तो जीतराम तुम गम न करना, क्योंकि शाह तो यहां भी हैं।

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