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भाजपा आलाकमान की हर कसौटी पर खरे उतरे अजय भट्ट, मिला टिकट का इनाम

भाजपा आलाकमान की हर कसौटी पर खरे उतरे अजय भट्ट, मिला टिकट का इनाम

युवाओं को मौका, अच्छी परफॉर्मेंस न देने वाले सांसदों को टाटा- बॉय-बॉय

देहरादून। बीजेपी की लिस्ट मे एक खास बात यह है कि लिस्ट मे 75 साल से उपर का एक भी प्रत्याशी नही है। यानि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की सोच की युवाओं को मौका मिलेगा यह साफ नजर आ रहा है।वैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो कि एकबार फिरसे वाराणसी से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। उन्होंने साफ कर दिया है की वाराणसी को टोक्यो बनाना है। युवा पत्रकार योगेश सेमवाल के मुताबिक कई बुद्धिजीवी क़यास लगा रहे थे की पीएम मोदी चुनाव वाराणसी से शायद ना लड़े। लेकिन अब साफ हो गया है कि उनके क़यास सिर्फ क़यास ही हैं। वहीं इस लिस्ट मे कई बीजेपी सांसदों के टिकट कट गए हैं। बीजेपी के अंदर से यह खबरें आ रही थी की कई सांसदों ते टिकट कट सकते हैं। खासतौर पर उनके जिनकी परफॉर्मेस अच्छी नही रही। पहली लिस्ट में ऐसा देखने को भी मिला है। कई सांसदों के टिकट काट दिए गए हैं।

उत्तराखंड के बनते बदले समीकरण

युवा पत्रकार योगेश सेमवाल के मुताबिक उत्तराखंड की पांच सीटों मे से दो सांसदों के टिकट कट गए हैं। या कह सकते हैं उनकी उम्र भी उनके राजनीतिक कैरियर मे सामने आ गई है। वहीं बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मौजूदा राष्ट्रीय सचिव तीरथ सिंह रावत ने कई लोगों को पिछाड़ते हुए टिकट हासिल किया है। पौड़ी से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार अजीत डोभाल के बेटे शौर्य डोभाल रेस मे माने जा रहे थे। वजह भी साफ थी उनके पिता का बड़ा कद। शौर्य डोभाल ने पूरे पौड़ी लोकसभा क्षेत्र मे अपने पोस्टर भी लगा रखे थे। जिसका विरोध खुद तीरथ सिंह रावत ने किया था। तो पूर्व सेना के कर्नल और केदारनाथ पुर्ननिर्माण मे अहम भूमिका निभाने वाले कर्नल कोठियाल भी बीजेपी के टिकट के लिए रात दिन एक किए हुये थे। वो लगातार देहरादून से दिल्ली तक संपर्क मे थे, और बीजेपी आलाकमान को बता रहे थे कि मै भी बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ सकता हूं। लेकिन कर्नल एक साथ दो नाव पर सवार थे। वो कांग्रेस के साथ भी उतने ही संपर्क मे थे। अब बीजेपी से टिकट नही मिला और कांग्रेस भी नही दे रही। जिससे उम्मीद है वो निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे।

अजय भट्ट के भरोसे नैनीताल
युवा पत्रकार योगेश सेमवाल कहते हैं कि अब सबसे हॉट सीट नैनीताल को माना जा रहा है। बीजेपी के मौजूदा नैनीताल सांसद भगत सिंह कौशियारी का टिकट कट गया है। क्यों कटा पता नही. उम्र भी वजह हो सकती है या फिर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की केंद्र मे अच्छी पकड़ भी। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भले ही यह कहते आ रहे थे की मुझे टिकट नही चाहिए लेकिन वो यह भी कह रहे थे कि अगर टिकट मिलता है तो मै जरूर चुनाव लडूंगा। शायद वो भांप गए थे कि हाईकमान उनपर भरोसा जतायेगा, वैसे भी अजय भट्ट की बॉडी लैंग्वेज ऐसी लग रही थी जैसे उन्हें विश्वास था की उनका टिकट फाइनल है।

युवा पत्रकार योगेश सेमवाल कहते हैं कि अगर समीकरण सही रहे तो कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत नैनीताल से चुनाव लड़ेंगे और इस तरह यह लोकसभा सबसे हॉट सीट हो जायेगी। वैसे भी दोनों ही विधानसभा चुनाव मे हार चुके हैं। हरीश रावत के सामने बड़ी चुनौती है खुद को साबित करने की। हाईकमान को बताने कि की अभी भी हरीश रावत मे वही दमखम है.तो अजय भट्ट को भी खुद को साबित करना है, क्योंकि पिछला चुनाव वो भी हार चुके हैं।

वैसे अजय भट्ट के लिए हरीश रावत की तुलना मे नैनीताल लोकसभा आसान होगी। हरीश के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी अपनी पार्टी के नेताओं से पार पाना। इंदिरा हृदयेश हरीश की राह मे रोड़े जरूर पैदा करेंगी तो प्रीतम सिंह भी हरीश को आजकल ज्यादा पंसद नही कर रहे हैं। पार्टी मे हरीश भी एकला चलो की नीति मे ही आगे भी बढ़ रहे हैं, तो उनके लिए नैनीताल को फतह करना इतना आसान भी नही होगा।

अब रही बीजेपी के तीन सांसदों की जिनपर हाईकमान ने भरोसा फिरसे जताया है। रमेश पोखरियाल निशंक, रानी राज लक्ष्मी शाह और अजय टम्टा।

सबसे पहले निशंक की बात करते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक पर बीजेपी हाईकामन ने फिरसे भरोसा जताया है। वैसे भी निशंक को एक बड़ा राजनीतिज्ञ भी माना जाता है।लेकिन उनके लिए इसबार का चुनाव 2014 के लोकसभा चुनाव कि तरह आसान नही होगा। उस वक्त मोदी लहर भी चली थी और कांग्रेस के वोट बसपा के प्रत्याशी ने भी खूब काटे थे। हां इसबार भी बसपा कांग्रेस के वोट पक्का काटेगी वहीं सपा बसपा के गठबंधन से कांग्रेस का मुस्लिम वोट भी कट सकता है। जिसका फायदा सीधे बीजेपी को होगा। लेकिन निशंक और मदन कौशिक का बीच मे थोड़ी दूरी है। साथ ही निशंक ने शहरी क्षेत्रों मे तो खूब प्रचार प्रसार किया है लेकिन ग्रामीण निशंक से नाराज हैं। तो हे सकता है नाराज़गी का असर चुनाव मे दिख जाए. लेकिन कांग्रेस किसे टिकट देती है इससे यह भी निशंक की किस्मत तय होगी।

राज लक्ष्मी शाह – राज लक्ष्मी शाह पर बीजेपी ने फिरसे भरोसा जताया है, वैसे माना जा रहा था की शाह रानी का टिकट कट सकता है। और वजह भी बड़ी थी पूर्व मुख्यमंत्री बहुगुणा. लेकिन अब बहुगुणा विदेश मे हैं और रानी बीजेपी के टिकट से फिरसे लड़ रही हैं।
बहुगुणा ने पूरी गणित लगा ली थी. लगातार केंद्र से संपर्क मे भी थे और तय माना जा रहा था की कांग्रेस से आधा दर्जन से ज्यादा नेताओं को लेकर बीजेपी मे आए बहुगुणा को टिकट मिलेगा। लेकिन ना बहुगुणा को विधानसभा मे टिकट मिला ना अब लोकसभा मे। वैसे रानी को टिहरी कि जनता बिल्कुल पसंद नही कर रही है। वजह साफ है उनका अपनी लोकसभा सीट की जनता से ना के बराबर संपर्क।। रानी रजवाड़े से हैं तो जनता से संपर्क भी वैसा ही होगा। और खबरों की माने तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का टिकट टिहरी से फाइनल हो गया है। प्रीतम ने किशोर का टिकट कटवा दिया है।इस वजह से किशोर भी नाराज हैं और पार्टी ने तो किशोर को किनारे कर ही रखा है। तो पक्का माना जाए की रानी वर्सेस राजा होगा(प्रीतम सिंह चौहान भी रजवाड़े के ही हैं) लेकिन प्रीतम एक क्षेत्र तक सीमित हैं। उनकी स्थिति कितनी कमजोर है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनने से पहले उनको प्रदेश मे कम ही लोग पहचानने थे। वैसे उन्हें भी अपने क्षेत्र की जनता का प्यार ज्यादा पसंद है। लेकिन अब लोकसभा लड़ना है और सामने बीजेपी है(वोट रानी को नही बीजेपी को रहेंगे) तो लड़ाई ठिक ठाक हो सकती है।

आखिर मे अजय टम्टा – केंद्रिय मंत्री अजय टम्टा पर बीजेपी ने फिरसे भरोसा जताया है। लेकिन अजय टम्टा से उनके विधानसभा के लोग खुश नही हैं। वजह साफ वो केंद्रिय मंत्री भी हैं तब भी उन्होंने अपनी सांसद निधि को पूरा खर्च नही किया(वैसे तो बीजेपी के किसी भी सांसद ने नही किया)वहीं अल्मोड़ा से अजय टम्टा के सामने प्रदीप टम्टा का लड़ना तय माना जा रहा है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा एक बुद्धिजीवी तो हैं ही साथ ही उनकी पकड़ आम लोगों के बीच मे भी जिस वजह से कांग्रेस उनपर दाव खेलती दिख रही है और उन्हें टिकट मिलता है तो अजय टम्टा की राह आसान नही होगा।

युवा पत्रकार योगेश सेमवाल कहते हैं कि अंत में सबकुछ मोदी लहर पर होगी।और माना जा रहा है की उत्तराखण्ड में एक बार फिरसे मोदी लहर चलेगी।

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