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बड़ी ख़बर :- किसने कहा कर्नल कोठियाल बनेंगे यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष ?

यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट का बड़ा बयान, साजिश अफवाह और....

बड़ी ख़बर :- किसने कहा कर्नल कोठियाल बनेंगे यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष

यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट का बड़ा बयान, साजिश अफवाह और….

24 व 25 अप्रैल को होगी उत्तराखंड क्रांति दल कार्यकारिणी की बैठक

देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल की 15 अप्रैल को प्रस्तावित कार्यकारिणी की बैठक अब 24 व 25 अप्रैल को होगी। दल के संरक्षकों सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने बैठक में शादी ब्याह व निजी पारिवारिक कारणों से बैठक में उपस्थित रहने पर असमर्थता जताई थी। यह जानकारी आज उक्रांद सुप्रीमो दिवाकर भट्ट ने केंद्रीय कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए दी।

कर्नल कोठियाल नहीं बन रहे हैं यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष

वहीं कर्नल कोठियाल को दल का केंद्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के एक समाचार पत्र में छपे बयान को उन्हें राष्ट्रीय दलों की उक्रांद को कमजोर करने की साजिश करार देते हुए कहा कि यह खबर इसलिए भी हास्यास्पद है कि कर्नल कोठियाल अभी उक्रांद के प्राथमिक सदस्य भी नहीं है। उन्होंने खबर का खंडन करते हुए कहा कि दल में कहीं भी किसी भी स्तर से ऐसी कोई चर्चा नहीं है। दल का केंद्रीय अध्यक्ष बनने के लिए दल के अनुभव और वरिष्ठता का पार्टी संविधान में स्पष्ट उल्लेख है।

हाल में ही प्रदेश में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में दल की उपस्थिति के बारे में पूछे गए सवाल के बयान में उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए साम दाम दंड भेद की नीति का अभाव है। वास्तविकता यह है कि उक्रांद आंदोलन से जन्मा हुआ दल है और अधिकांश कार्यकर्ता और नेता अभी तक आंदोलनकारी छवि से बाहर निकलकर राजनीतिक रूप में नहीं आ पाए हैं जबकि राष्ट्रीय पार्टियां झूठे वादों और छल प्रपंच में माहिर है।

उक्रांद अपने सीधी सच्चीऔर सपाट बात कहने की शैली के चलते अपना राजनीतिक मुकाम पाने में असफल रहा है। अब राजनीतिक स्वरूप में आने के लिए सड़कों में आंदोलन में नरमी दिखाते हुए गांव को बचाने और उनके विकास की लड़ाई लड़ते हुए अपना सफर शुरू करना होगा। धन के क्रियाकलापों और उपलब्धियों को जन जन तक पहुंचाने के लिए गांव-गांव में कार्यकर्ता रूपी वकील तैनात करने पड़ेंगे। जो जनता के सामने दल की पैरवी करेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य की लड़ाई में 42 शहादतोंं के अलावा इस राज्य की मातृशक्ति की अस्मिता को भी दांव पर लगी।

आजादी की लड़ाई में भी इतना बड़ा बलिदान नहीं दिया था। उसके बाद भी यह निराशाजनक है कि आज सूबे के मुखिया प्रदेश में 3000 स्कूल बंद होने की खुलेआम स्वीकारोक्ति कर रहे हैं। जिस पलायन को रोकने के लिए राज्य की जनता ने उक्रादंं के साथ जन आंदोलन किया उस राज्य के कई गांव में शवों को कंधा देने के लिए चार व्यक्ति भी नहीं है। पलायन व बेरोजगारी आज भी विकराल समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही पर्वतीय और मैदानी ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन को मजबूत किया जाएगा।

पत्रकार वार्ता में दिवाकर भट्ट के साथ त्रिवेंद्र पवार हरीश पाठक बीडी रतूड़ी पंकज व्यास संजय छेत्री आदि शामिल थे।

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