खबर इंडिया

पी0डब्ल्यू0डी0 में करोड़ों का टेंडर घोटाला!

चहेते ठेकदारों के लिए खेला बड़ा खेल!

पी0डब्ल्यू0डी0 में करोड़ों का टेंडर घोटाला!
चहेते ठेकदारों के लिए खेला बड़ा खेल!

अरूण पांडेय

देहरादून- भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस की बिगुल बजा चुकी सरकार के राज में हो रहा है भ्रष्टाचार ? नियम कायदों को ताक में रखकर मनमानी कर रहे हैं अधिकारी? टेंडर के नाम पर भी मिलभगत कर खेला जा रहा है करोड़ों का खेल? ये सब आरोप लगाए हैं त्रिवेन्द्र सरकार पर जनसंघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जी0एम0वी0एन0 के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने।

क्या है पूरा मामला
 विधानसभा विकासनगर क्षेत्रान्तर्गत पी0डब्ल्यू0डी0 का सवा दो करोड के टेण्डर का है घोटाला।
 समाचार पत्र की मात्र दो-तीन प्रतियाॅं करायी प्रकाशित, अन्य पाठकों की प्रतियों में नहीं जारी किया टेण्डर विज्ञापन।
 विभाग व ठेकेदारों ने दिया कार्य को अंजाम, गिने-चुने तीन-चार ठेकेदारों के इर्द-गिर्द हुआ टेण्डर।
 पी0डब्ल्यू0डी0, निर्माण खण्ड देरादून के आज तक के समस्त कार्यों की सीबीआई जाॅंच कराये सरकार।

रघुनाथ नेगी का कहना है कि मुख्यमन्त्री त्रिवेन्द्र रावत के महकमें लोक निर्माण विभाग की निर्माण खण्ड, देहरादून इकाई के अन्तर्गत जुलाई 2017 को विधानसभा विकासनगर के अन्तर्गत 08 कार्यों हेतु 2.25 करोड़ रूपये मूल्य के टेण्डर आमन्त्रित करने हेतु विभाग द्वारा दो समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी करने का ढोंग रचा।
विभाग व ठेकेदारों की मिलीभगत के चलते प्रसिद्व समाचार पत्र शाह टाईम्स के दिनंाकित 11.07.2017 में कहीं भी उक्त विज्ञापन नहीं छपा, जबकि विभाग द्वारा जो सत्यापित दस्तावेज, उपलब्ध कराये गये हैं उस प्रति में टेण्डर विज्ञापित होना दर्शाया गया है, यानि नाम व रिकाॅर्ड के लिए सिर्फ दो-तीन प्रतियाॅं ही प्रकाशित करायी गयी।
हैरानी की बात यह है कि प्रदेश के सैकड़ों ठेकेदार काम की तलाश में भटक रहे हैं तथा वहीं चन्द ठेकेदार व विभाग ने मिलीभत कर आठ जाॅब क्रमशः 20 लाख, 30 लाख, 20 लाख, 20 लाख, 42 लाख, 45 लाख, 24 लाख व फिर 24 लाख अपने मनमाफिक व अपने चहेते ठेकेदारों को आबंटित करा दिये।
उल्लेख है कि सभी जाॅब को बकायदा गिने-चुने तीन-चार ठेकेदारों तक ही सीमित रखा गया है, तथा सभी औपचारिकतायें पूर्ण कर कार्य को अंजाम दिया गया, जिससे किसी को कोई शक न हो।

नेगी ने कहा कि अगर टेण्डर सभी समाचार पत्रों में इमानदारी के साथ विभाग द्वारा प्रकाशित किये जाते तो निश्चित तौर पर प्रतिस्पद्र्वा के चलते और 20 से 40 प्रतिशत न्यूनतम दर पर कार्य आबंटित होते तथा सरकार को लाखों रूपये का फायदा होता, लेकिन विभाग व ठेकेदारों की जुगलबन्दी से लाखों रूपये सरकारी क्षति हुई। उक्त के चलते प्रदेश के सैकड़ों ठेकेदारों को भी उस कार्य में प्रतिभाग करने से वंचित रह गये। विभागीय भ्रष्टाचार के चलते इमानदारी से कार्य करने वाले ठेकेदार दर-दर की ठोकरे खा रहे हैं।जनसंघर्ष महामहिम राज्यपाल से मांग करता है कि जब से उक्त खण्ड स्थापित हुआ है तब से लेकर आज तक के समस्त जाॅबों/टेण्डर कार्यों की सीबीआई से जाॅंच कराई जाये। पत्रकार वार्ता मेंः- दिलबाग सिंह, प्रभाकर जोशी, जयदेव नेगी, रवि भटनागर आदि थे।

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