उत्तराखंडखबर इंडिया

नरेंद्र के साथ त्रिवेंद्र की भी अग्निपरीक्षा

उत्तराखंड में 2014 का इतिहास दोहराने की है बड़ी चुनौती

नरेंद्र के साथ त्रिवेंद्र की भी अग्निपरीक्षा

उत्तराखंड में 2014 का इतिहास दोहराने की है बड़ी चुनौती

कुमार आकाश, युवा पत्रकार।

देहरादून। उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव काफ़ी महत्वपूर्ण होंगे वाले है। क्यूँकि इस लोकसभा चुनाव में कई दिग्गज नेताओ की शाख़ दाव पर लगी हैं। लेकिन अगर सबसे बड़ी चुनौती यदि किसी के लिए है तो वह हैं प्रदेश के मुखिया त्रिवेंद्र सिंह रावत ।

त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में ये पहला बड़ा चुनाव लड़ा जा रहा हैं, जिसमें प्रदेश की जनता नरेंद्र मोदी के पाँच साल और त्रिवेंद्र रावत के दो साल के कार्यकाल को ध्यान में रख कर मतदान करेंगीं।

रावत सरकार के कार्यकाल को लेकर बीजेपी जनता के बीच जा रही है,जिसमें सरकार की ज़ीरो टोरेंट्स पॉलिसी, प्रदेश वासियों को स्वास्थ्य सुरक्षा (उत्तराखण्ड अटल आयुष्मान योजना) और इन्वेस्ट समिट जैसे उपलब्धि शामिल है।

एसे में जनता भले किसी सरकार को पाँच साल के लिए चुनती हों फिर जाके उसके कार्यकाल पर उसको नम्बर देती हैं। लेकिन त्रिवेंद्र सरकार अपने दो साल की उपलब्धि को लेकर हीं जनता के बीच गयी है। ख़ुद मुख्यमंत्री पाँचो लोकसभा सीट में प्रतियाशियो के पक्ष में प्रचार कर अपनी सरकार की योजनाओं को जनता को बता रहे हैं।

त्रिवेंद्र सिंह रावत ख़ुद भी जानते हैं कि ये परीक्षा उनके लिए काफ़ी महत्वपूर्ण है। पार्टी आलाकमान का विश्वाश बना रहे इस लिए इस परीक्षा में पास होना बेहद जरूरी है।

त्रिवेंद्र सिंह रावत को विपक्ष के साथ ही उन अपनों से भी जूझना है जिनकी आँखो में त्रिवेंद्र हमेंसा खटकते रहते हैं। और किसी न किसी बहाने उनकी टाँग खिंचने की पुरज़ोर कौशिश करते रहते है।

एसे में त्रिवेंद्र को वो दौर भी पता हैं जब 2009 के लोकसभा चुनाव नतीजे ख़राब होने की वजह से मौजूदा मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खंडूरी को पूर्व होना पड़ा था। इसलिए उन्हें हर कदम पूरी मजबूती के साथ और हर सियासी चाल चाणिक्य की तरह चलनी होगी।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close
Close