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गढ़वाल की सियासत में आज भी खंडूड़ी है जरूरी

कांग्रेस बता रही अपने लिए शुभ संकेत, भाजपा कह रही अफवाह है भाई

गढ़वाल की सियासत में आज भी खंडूड़ी है जरूरी

कांग्रेस बता रही अपने लिए शुभ संकेत, भाजपा कह रही अफवाह है भाई

भाजपा और कांग्रेस की ज़ुबानी जंग में छाए हुए हैं खंडूड़ी

देहरादून। उत्तराखंड गठन के बाद ये पहला मौका है जब जनरल खंडूड़ी के बिना भाजपा को पांचों सीटें जीतने के पिछले रिकॉर्ड को दोहराने की चुनौती है। जनरल खंडूडी गढ़वाल का बड़ा नाम हैं। भाजपा के लिए राहत की बात यह है कि यह दिग्गज चुनाव मैदान मेें भले ही न उतरे हों, मगर उनकी मर्जी के ही उम्मीदवार उतारे गए हैं।

गढ़वाल की सियासत में जनरल खंडूड़ी की भूमिका अहम रही है। चाहे विधानसभा चुनाव हो या फिर लोकसभा खंडूड़ी को फ्रंट में रखकर भाजपा रणनीति तय करती थी। खंडूड़ी के इस बार चुनाव लड़ने से इंकार के बाद पार्टी सैन्य पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशी को तलाश रही थी, लेकिन एकाएक जनरल के बेटे मनीष खंडूड़ी के कांग्रेस का दामन थामने से सारे समीकरण बदले। उन्हें मनाने की हरसंभव कोशिश नाकाम रही। आखिरकार जनरल के शिष्य माने जाने वाले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत को पौड़ी से टिकट देना पड़ा। अब भाजपा के सामने बड़ी चुनौती है कि जनरल को चुनाव प्रचार में कैसे सक्रिय रखा जाए?

वहीँ सोशल मीडिया में उड़ रही अफवाहों ने भाजपा की नींद और हराम करके रख दी है। अफवाह उड़ रही है कि भुवन चंद खंडूरी कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। सोशल मीडिया में इस तरह के मैसेज लगातार वायरल हो रहे हैं। कांग्रेस जहां से अपने लिए शुभ संकेत बता रही हैं तो ही भाजपा इसे अफवाह करार दे रही है। और इसके लिए सीधे तौर पर कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रही है। फिलहाल गढ़वाल की सियासत में खंडूड़ी को लेकर गर्मी छाई हुई है।

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