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इस दीपावली पर रखें अपने स्वास्थ्य का खास ख्याल

इस दीपावली पर रखें अपने स्वास्थ्य का खास ख्याल

डाॅ एसडी जोशी की सलाह पर अमल करेंगे तो रहेंगे स्वस्थ और सुरक्षित

देहरादून। प्रकाश और प्रसन्नता का त्योहार दीपावली नई उमंग लेकर दीवाली से कई आर्थिक और मनोरंजन परम्पराएं जुड़ी हैं। आतिशबाजी का बेतहाशा खेल इनमें सबसे प्रमुख है। आज हालत यह है कि दीवाली दीयों का कम बम और राकेट-पटाखों का त्योहार ज्यादा लगता है। डाॅक्टर एसडी जोशी बता रहें हैं कि क्या कुछ परेशानी होती है आतिशबाजी से हमारे शरीर के विभिन्न अंगो को।

डाॅ एसडी जोशी की सलाह पर जरूर ध्यान दें

दून मेडिकल काॅलेज के सीनियर चिकित्सक डाॅक्टर एसडी जोशी का कहना है कि हर आपातकालीन स्थििति से निपटने के लिए दून मेडिकल काॅलेज अस्पताल में सभी व्यवस्थायें पूरी कर ली गई हैं। इंमरजेंसी डाॅक्टरों के साथ ही विशेषज्ञ डाॅक्टर भी 24 घंटे उपलब्ध रहेंगे।

पटाखे जलाते समय पैरों में चप्पल या जूते जरूर पहनें।

पटाखे हमेशा खुले स्थान पर जलायें, कभी भी घर के अंदर या बंद स्थान पर पटाखे ना जलायें।

पटाखे जलाते समय आसपास में पानी रखें और घर में जल जाने पर लगायी जाने वाली दवाएं भी रखें।

अपने चेहरे को पटाखे जलाते समय दूर रखें।

पटाखें को शीघ्रजलने वाले पदार्थों से दूर रखें।

जहरीला होता है पटाखों का धुआं
दीपावली के मौके पर होने वाली आतिशबाजी के दौरान आस-पास के लोगों की आंखों में जलन, चुभन, दम घुटने जैसी स्थिति सामान्य तौर पर देखी जा सकती है। इसका धुएं में पाये जाना वाला तत्व पोटैशियम परकोलेट, आपकी थायराइड ग्रन्थि को प्रभावित कर सकता है। दरअसल यह रसायन, थायराइड ग्रन्थि द्वारा आयोडीन ग्रहण करने की क्षमता में कमी लाता है जोकि अन्ततः हाइपोथाइराडिज्म के रूप में परिलक्षित होती है। एक अन्य हानिकारक पदार्थ स्ट्रोन्सियम जन्म-जात विकृति, रक्ताल्पता और अस्थिमज्जा में नुकसान का सबब बन सकता है। आतिशबाजी से उत्पन्न डाइआक्सिन एक जाना पहचाना कैन्सर कारक पदार्थ है। यह हार्मोन असंतुलन पैदा करने के साथ-साथ ग्लूकोज की मेटाबोलिज्म में गड़बड़ी व त्वचा पर घाव जैसे दुष्प्रभाव भी डालता है।

हाई ब्लड प्रेशर से स्ट्रोक का खतरा
हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक से ग्रस्त लोगो को पटाखों की जबर्दस्त ध्वनि सुनने से दिल पर जोर पड़ता है। इससे हार्ट रेट बढ़ सकती है। इसलिए

हदय रोगियों को दूर से ही धमाकेदार आतिशबाजी को देखना चाहिए। अगर चक्कर आने की समस्या या उलझन या घबराहट महसूस हो तो इस स्थिति मे शीघ्र ही लेट जाए और फिर डॅाक्टर से परामर्श लेकर दवाएं ले या फिर डॉक्टर ने पहले से ही जो दवाएं इन लक्षणों के लिए बना रखी है, उन्हें लें। पटाखा आंख में लगने पर आंख को रगड़ना या मलना नहीं चाहिए, साथ ही आंख में धसी चीज को निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। आंख जल जाने पर अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं फिर जली आंख को पानी से दस मिनट तक धोएं और जल्द ही डाक्टर को दिखाएं।

दमा रोगी रहें सावधान
आतिशबाजी से निकले सूक्ष्म पदार्थ आसानी से फेफड़ों में घुस कर एलर्जिक रिएक्सन चालू कर देते हैं। इससे निकली अति प्रतिक्रियाशील ओजोन गैस फेफड़ों की सतह को घायल कर तत्काल भारी नुकसान पहुंचाती है। इससे निकले प्रदूषक, सांस के रोगियों के श्वसन मार्ग की सूजन बढ़ा देते है जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। उन्हें दमा का दौरा पड़ सकता है।

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