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सुप्रीम कोर्ट का एक बड़ा फैसला

अगर आपने गाड़ी बेच दी है, तो फौरन आरसी से अपना नाम हटवा दें

सुप्रीम कोर्ट का एक बड़ा फैसला

अगर आपने गाड़ी बेच दी है, तो फौरन आरसी से अपना नाम हटवा दें

नहीं किया ऐसा, तो आपको ही देना पड़ेगा मुआवजा

उत्तर प्रदेश। अक्सर यह देखने में आया है कि लोग अपनी गाड़ी बेचते समय केवल एक ही बात को ध्यान में रखते हैं कि उसकी हमें अच्छी कीमत मिल जाये। लेकिन गाड़ी की अच्छी कीमत के साथ ही हम सबसे बड़ी बात भूल जाते हैं, जो हमें गाड़ी बेचने के साथ ही तुरंत कर देनी चाहिए। इस खबर को पढ़कर शायद आपको भी अहसास हो जायेगा कि आप से भी यह गलती हो गई है। यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। जिसे सुधारना बहुत जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े फैसले के बाद आजतक लापवाह बना हर इंसान सबसे पहला काम अब यही करेगा। आमतौर पर अपनी गाड़ी बेचने के साथ ही वाहनस्वामी लापरवाह हो जाता है और वह आरसी में अपना नाम नहीं हटवाता है। मात्र सेल लेटर के सहारे ही मसला लंबी अवधि तक चला करता है। अगर इस दौरान बेचे गए वाहन से कोई दुर्घटना हो गई तो उसकी जवाबदेही अब आपकी ही मानी जाएगी और घटना में जो क्लेम तय होगा उसे आपको ही देना पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, इस मामले में आया फैसला
सुप्रीम कोर्ट का यह ऐतिहासिक निर्णय आया है 27 मार्च 2009 को हुई दुर्घटना के एक फैसले के संबध में। गौरतलब है कि 27 मई 2009 में हुई एक दुर्घटना में श्रीमती जया देवी अपने भतीजे नितिन के साथ गाव के मार्ग पर टहल रही थीं। इसी दौरान एक मारुति सवार ने गाड़ी रिवर्स गियर में डाल दी। जिससे मौके पर ही भतीजे नितिन की मौत हो गई और श्रीमती जया देवी को गंभीर चोटें आईं। इसे लेकर नवीन कुमार की ओर से ट्रिब्यूनल में वाद दायर किया गया। जब पड़ताल हुई तो पता चला की गाड़ी किसी अन्य को बेच दी गई थी। फिर यह गाड़ी अन्य व्यक्ति को बेची गई। लेकिन आरसी में विजय कुमार का ही नाम दर्ज था। तमाम हाथों से गुजरने के कारण मुआवजे को लेकर भुक्तभोगी संतुष्ट नहीं हुआ तो उसने देश की सर्वोच्च अदालत में नवीन कुमार बनाम विजय कुमार के नाम से अपील की।

आरसी में जिसका नाम दर्ज है वही करेगा मुआवजे का भुगतान
इस पूरे मामले पर लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि गाड़ी के पंजीयन प्रमाण पत्र में जिसका नाम दर्ज है वही मुआवजे का भुगतान करेगा। सेल लेटर या फिर फार्म 29, 30 की फोटो कापी अथवा अन्य कागजात ऐसे निर्णयों में अहमियत नहीं रखते। भले ही वह गाड़ी कई बार बेची और खरीदी गई हो। आरसी में जिसका नाम दर्ज है मुआवजा उसे ही देना पड़ेगा। इस निर्णय की कॉपी परिवहन विभाग को भी हासिल हुई।

आम जनता को सचेत करने वाला फैसला
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले पर परिवहन निगम के अधिकारियों का कहना है कि लोगों को सचेत करने वाला यह अहम निर्णय है। इसके प्रति लोगों को स्वयं सजग होना चाहिए कि कैसे आरसी में दर्ज हमारे नाम से दूसरा व्यक्ति गाड़ी चला रहा है? अब ऐसे वाहन स्वामी जो अपनी गाड़ी बेच चुके हैं उन्हें जल्द से जल्द आरसी से अपना नाम हटवा लेना चाहिए। इसे देखते हुए अपना वाहन बेचते ही जल्द से जल्द आरसी में बेचने वाले शख्स का नाम दर्ज करा दें।

इस बात का रखें खास ध्यान
– गाड़ी बेचे जाने के 14 दिन के अंदर आरटीओ को सूचना देना जरूरी।
– जिसके नाम गाड़ी बेची गई है उसे तीस दिन के भीतर आवेदन कर आरसी में नाम बदलवाना जरूरी
– आरसी में नाम बदलवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऑनलाइन भुगतान की भी व्यवस्था है। बस एक बार वाहन के साथ आरटीओ कार्यालय जाकर नाम आरसी में परिवर्तित कराना पड़ेगा।

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