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सिंचाई विभाग की कारस्तानी।

बहा दिए लाखों रूपए लेकिन नही पहुंचा खेतों तक पानी।

सिंचाई विभाग की कारस्तानी।

बहा दिए लाखों रूपए लेकिन नही पहुंचा खेतों तक पानी।

गरुड़- उत्तराखंड भले ही छोटा प्रदेश हो लेकिन इस छोेटे से प्रदेश में घोटाले एक से बढकर एक मिल जाएगें । कई बार लाखों करोडों रूपए खर्च करके अगर योजनाए बनती भी हैं तो वो सीधे जनता तक ही नही पहुंच पाती हैं ।लेकिन आज बात करेगे गरूड तहसील की जहां सिंचाई विभाग का अनोखा कारनामा सामने आया है ।


पानी की तरह बहा दिए लाखों रूपए लेकिन नही पहुंचा खेतों तक पानी-

कत्यूर घाटी में सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सिंचाई विभाग ने नहरों के हेड बांधने के नाम पर लाखों रुपये तो खर्च कर दिए, लेकिन नहरों में अभी तक पानी नहीं आया। जिसकारण खेतों में अब तक धान की रोपाई नहीं हो पाई है। वहीं दूसरी और नहरों की हालत बेहद खराब है। सिंचाई विभाग की इस लापरवाही का खामियाजा काश्तकारों को भुगतना पड़ रहा है। बता दें कि यहां बयालीसेरा, मन्यूड़ा, गड़सेर जैसी कई नहरों में कुछ समय पहले हेडपंप बांधने के नाम पर सिंचाई विभाग ने लाखों रुपये खर्च कर दिए लेकिन इन सूखी हुई नहरों में अभी तक पानी नही पहुंचा । हैरानी की बात है कि एक किमी पानी चलने के बाद नहरों से पानी रिसने के बाद पानी गायब हो जा रहा है। तो ऐसे में गरूड स्थित सिंचाई विभाग पर सवालिया निशान खडे हो रहें हैं कि जब लाखों रूपए खर्च किया गया है तो वो पैसा कहाॅं गया । क्योंकि अगर पैसा नहरों पर खर्च किया गया है तो खेतों तक पानी क्यों नही पहुंचा ?

क्या कहती है जनता – 
गरूड तहसील के सुरेश चंद्र, गोपाल दत्त जोशी, कृष्ण चंद्र तिवारी, लक्ष्मी दत्त जैसे कई कास्तार कहते हैं कि उन्होने नहरों में पानी चलाए जाने की मांग को लेकर कई बार जिलाधिकारी और उप जिलाधिकारी को ज्ञापन भी भेजे, पर उनकी शिकायतों के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिससे काश्तकारों में विभाग के प्रति खासी नाराजगी है । वहीं अब नहरों में पानी ना चलने के कारण पूर्व में ही काश्तकारों की धान की नर्सरी सूख चुकी है। अब काश्तकार बिनौणा कम होने के डर से भट्ट और घास खेतों में बोने लगे हैं। साथ ही किसानों को महगें पंपिंग सेट लगाकर रोपाई करने को मजबूर होना पड रहा है ।
अधिकारी अपने वेतन से दें मुआवजा-
काश्तकारों ने इस बार सिंचाई विभाग को टैक्स ना देने का निर्णय लिया है। उन्होंने डीएम को भेजे ज्ञापन में कहा है कि उनके नुकसान की भरपाई अब सिंचाई विभाग के अधिकारियों के वेतन से की जानी चाहिए और अगर ऐसा नही हुआ तो उन्हें आंदोलन करने को मजबूर होना पडेगा ।
क्या कहतें हैं अफसर –
इस बात की जानकारी जब सिंचाई विभाग के एसडीओ हरीश चंद्र सती को पता चली तो उनका कहना था कि विभाग के पास बजट और बेलदारों की काफी कमी है। अधिकांश नहरों से पानी रिस रहा है। मरम्मत के लिए बजट नहीं है। फिर भी विभाग नहरों में पानी चलाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन सवाल फिर भी उठना लाजिम है कि जो लाखों रूपए पानी की तरह बहा दिए गए हैं क्या उसमे कोई बडा घोटाला है क्योकि अगर लाखों रूपए खर्च किए गए हैं तो फिर विभाग के अधिकारी बजट का रोना क्यों रो रहे हैं ।

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