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दवा कंपनियां कर रहीं हैं जीएसटी के कारण उत्तराखंड से पलायन- मनीष नंदा

ऑनलाईन दवा ब्रिकी के खिलाफ आवाज बुलंद करेगा होलसेल कैमिस्ट ऐसोसिएशन- उमेश भाटिया

दवा कंपनियां कर रहीं हैं जीएसटी के कारण उत्तराखंड से पलायन- मनीष नंदा

ऑनलाईन दवा ब्रिकी के खिलाफ आवाज बुलंद करेगा होलसेल कैमिस्ट ऐसोसिएशन-उमेश भाटिया

अध्यक्ष मनीष नंदा और सचिव उमेश भाटिया के नेतृत्व में दवा व्यापारी एकजुट

देहरादून। उत्तराखंड से दवा कंपनियां जीएसटी के कारण बड़ी संख्या में पलायन कर रही हैं और इनको रोकने के लिए होलसेल कैमिस्ट ऐसोसिएशन मिलकर काम करेगा। जी हां राजधानी देहरादून में होल सेल कैमिस्टि ऐसोसिऐशन की नई कार्यकारिणी का गठन हो गया है। इस मौके पर बड़ी संख्या में दवा व्यापारी मौजूद थे। दवा व्यापारियों ने आपसी एकता और समन्यव का परिचय देते हुए कार्यकारिणी का निर्विरोध चुनाव किया। बड़ी संख्या में पहुंचे दवा व्यापारियों की मौजूदगी में नवनिर्वाचित कार्यकारिणी ने दवा व्यापारियों के हितों की रक्षा की शपथ ली। आपको बता दें कि नई कार्यकारिणी में दवा व्यापारी और लोकप्रिय समाजसेवी मनीष नंदा अध्यक्ष और उमेश भाटिया सचिव चुने गये। हमेशा दवा व्यापारियों के हितों के लिए काम करने वाले मनीष नंदा पूर्व में भी अध्यक्ष रह चुके हैं। इस मौके पर उन्होंने दवा व्यापारियों के सामने भविष्य की कार्ययोजना का खाका रखा और सहयोग की अपील की। कार्यक्रम में मौजूद तमाम दवा व्यापारियों ने एकसुर में सहयोग का वादा किया।

उत्तराखंड से पलायन कर रहे दवा व्यापारियों को राकेंगे- मनीष नंदा

मीडिया से बात करते हुए होलसेल कैमिस्ट ऐसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मनीष नंदा ने कहा कि जीएसटी के कारण बड़ी संख्या में दवा व्यापारी उत्तराखंड से पलायन करने को मजबूर हैं। उनकी प्राथमिकता रहेगी कि दवा व्यापारियों को पलायन करने से रोका जाये। क्योंकि जीएसटी के कारण दवा व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अगर जीएसटी की नीतियों में बदलाव न किये गये तो दवा व्यापारियों पर एक बड़ा आर्थिक संकट आ जायेगा। मनीष नंदा ने कहा कि दवा व्यापारियों का राष्ट्रीय नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री अरूण जेटली को इस बात से अवगत करा चुका है, उन्हे उम्मीद है कि केन्द्र सरकार जल्द ही वह इस बारे में जरूरी निर्णय लेंगे।

सचिव उमेश भाटिया ने कहा ऑनलाईन दवा ब्रिकी का होगा पुरजोर विरोध

होलसेल कैमिस्ट एसोसिएशन के सचिव उमेश भाटिया ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से ऑनलाइन दवा की बिक्री को नियमित करने वाले प्रस्ताव और इंटरनेट फार्मेसी को मान्यता देने वाले कानून के विरोध देशभर में पूर्व में कई बार धरना प्रदर्शन किया जा चुका है। ऑनलाईन दवा ब्रिकी का हम पूरी तरह विरोध करते हैं। हाईकोर्ट ने भी इस पर रोक लगाने के निर्देश दिये हैं। लेकिन अब भी कुछ पोर्टल ऑनलाईन दवा की ब्रिकी कर रहे हैं जो कि गलत है। हम इसके खिलाफ लडाई लडे़गे। उमेश भाटिया ने कहा कि आमतौर पर कालेज के छात्र.छात्रायें और बड़ी संख्या में लोग बिना डाक्टरी सलाह के आनलाइन दवायें मंगा लेते हैं। दवा और सौंदर्य प्रसाधन कानून 1940 और दवा एवं सौदर्य प्रसाधन नियम 1945 में उन कुछ दवाओं की आनलाइन बिक्री पर रोक है जिनमें डाक्टर की सलाह वाला दवा पर्चा होना अनिवार्य है। इस तरह की कुछ दवाओं में गर्भ.निरोधक और नींद की गोलियां तथा गर्भपात की गोलियों सहित कुछ अन्य दवाओं के लिये डाक्टरी सलाह को अनिवार्य बताया गया है। ऑनलाईन से दवा खरीदने के फायदे कम नुकसान ज्यादा हैं।
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