उत्तराखंडखबर इंडिया

108 कर्मचारियों की पुकार सुनो त्रिवेन्द्र सरकार, निष्ठुर, निर्दयी मत बनो सरकार

11 साल 108 में ईमानदारी से काम करने के बाद आज बेरोजगारी की कगार पर 717 कर्मचारी

108 कर्मचारियों की पुकार सुनो त्रिवेन्द्र सरकार, निष्ठुर, निर्दयी मत बनो सरकार

11 साल 108 में ईमानदारी से काम करने के बाद आज बेरोजगारी की कगार पर 717 कर्मचारी

देहरादून। त्रिवेन्द्र सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के लिये जीवनदायनी कही जाने वाली 108 एम्बुलेंस सेवा में सुधार के लिये नये टेंडर किये। नये टेंडर में कैंप कंपनी को मिला। उत्तराखंड में काम कर रहे 108 के सभी कर्मचारी उत्साहित थे कि नई कंपनी आने के बाद 108 सेवा नई उर्जा और जोश से कार्य करेगी। लेकिन 108 सेवा में काम कर रहे पुराने कर्मचारियों का कहना है कि उनके सपनों को उस वक्त झटका लगा जब उन्हें मालूम पड़ा कि उनको बाहर करने की साजिश रची जा रही है। फील्ड कर्मचारी ने इसका विरोध जताना शुरू कर दिया है।
फील्ड कर्मचारियों के संगठन के जिला अध्यक्ष नरेश चौहान का कहना है कि कैम्प कंपनी पुराने फील्ड कर्मचारियों की 11 वर्ष की सेवा को दरकिनार कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कैम्प ने पुराने मैनेजमेन्ट ऑफिस स्टाफ को तो जॉइन करवा दिया है। लेकिन जिन फील्ड कर्मचारियों ने 11 वर्ष की सेवा कर इसको जीवनदायिनी बनाया उन फील्ड कर्मचारियों लगभग 717 को बाहर करने की साजिश कर रही है।

फील्ड कर्मचारियों के संगठन के प्रदेश मीडिया प्रभारी रमेश डंगवाल ने आरोप लगाया कि कैम्प अपने नये कर्मचारियों में भर्ती मानक पूरा नही कर रही हैं नए कर्मचारियों को मात्र 3 दिन की ट्रेनिंग दे रही है। जबकि मानक 45 दिन ट्रेनिंग का है। उन्होंने कहा कि पहाड़ में प्रसव केस का ज्यादा प्रभाव हैं 3 दिन की नाम मात्र की ट्रेनिंग का सीधा असर गर्भवती माताओं के जीवन से खिलवाड़ है। क्योंकि इसमें ज्यादातर 99 प्रतिशत फार्मसिस्ट भर्ती होते हैं और उनका पहले से कोई ज्ञान प्रसव केस में नही होता है। रमेश डंगवाल ने कहा कि मानक के अनुरुप 45 दिन की ट्रेनिंग अवश्य है। फील्ड कर्मचारियों के संगठन के प्रदेश मीडिया प्रभारी रमेश डंगवाल ने कहा कि जिन कर्मचारियों ने कई माह तक बिना सैलरी के काम किया आज उनको कैम्प बाहर कर रही है। जो कि सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि कैंप की नीतियों के कारण 717 कर्मचारी बेरोजगारी की कगार पर आ गये हैं। उनके और उनके परिवार के सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है। फील्ड कर्मचारियों के संगठन के जिला अध्यक्ष नरेश चौहान का कहना है कि त्रिवेन्द्र सरकार ने हमेशा कर्मचारियों के हितों की रक्षा की है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने समय-समय पर कर्मचारियों की मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों की इस दुख की घड़ी में उनका साथ दे, निष्ठुर, निर्दयी न बने।   राज्य सरकार से पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए फील्ड कर्मचारियों को बेरोजगार होने से बचाने का आहवान किया। 

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