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हिमालय पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा

पद्म विभूषण से सम्मानित पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट ने लिखा पीएम मोदी को पत्र

हिमालय पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा

पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट ने लिखा पीएम मोदी को पत्र

नैनीताल। हिमालय पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा? एक बार फिर हिमालय पर मंडरा रहा खतरा चर्चा का केंद्र बन चुका है। नैनीताल प्रशासनिक अकादमी में आपदा में मीडिया की भूमिका विषयक कार्यशाला में यह बात निकलकर सामने आई। हिमालय को करीब से जानने वाले विशेषज्ञों ने एक सुर में कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में ग्लोबल वॉर्मिंग का असर हिमालय के लिए खतरा बनता जा रहा है। भूकंप और आपदा जैसी विनाशकारी घटनाएं इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। केदारनाथ त्रासदी और नेपाल का भूकंप सभी के सामने है। जाहिर हो गया कि ग्लोबल वॉर्मिंग कैसे प्राकृतिक आपदा के रूप में आफत बनकर सामने आ रही है। 

आपदा में मीडिया की भूमिका पर मंथन
हिमालय के जल, जंगल, जमीन को समझने की जरूरत

हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण को नजरअंदाज कर अंधाधुंध निर्माण हो किया जा रहा है। जिससे नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और हिमालय पर भी मंडरा रहा है खतरा। जीहां जिस तरह से नदियों के किनारे अतिक्रमण तथा अन्य प्राकर्तिक बदलाव की वजह से आपदा की संवेदनशीलता बढ़ गई है। सरकारी एजेंसियों ने मानक और नियम तो बनाए हैं लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में निर्माण के समय उनका पालन नहीं किया जा रहा। सरकारी सख्ती के साथ-साथ लोगों में जागरूकता जरूरी है। ऐसे में हिमालय संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान की जरूरत है।

हेली सेवा पर्यावरण के लिए बड़ी चिंता
नैनीताल प्रशासनिक अकादमी में आपदा में मीडिया की भूमिका विषयक कार्यशाला में पद्म विभूषण से सम्मानित, गांधी शांति पुरस्कार प्राप्त प्रसिद्ध पर्यावरणविद चंडी प्रसाद भट्ट का साफ तौर पर कहना है कि बाजार के बढ़ते दबाव की वजह से हिमालय पर खतरा बढ़ गया है। उन्होंने केदारनाथ समेत उच्च हिमालयी इलाकों में हेली सेवा को भी पर्यावरण के लिए बड़ी चिंता बताया।

प्रधानमंत्री को भेजा सुझाव पत्र
पद्म विभूषण से सम्मानित,पर्यावरणविद चंडी प्रसाद भट्ट ने कहा कि हिमालय के जल, जंगल, जमीन को समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नदियों के किनारे अतिक्रमण तथा अन्य प्राकर्तिक बदलाव की वजह से आपदा की संवेदनशीलता बढ़ गई है। राज्य के सीमावर्ती जिले आपदा की दृष्टि से संवेदनशील हो गए हैं। उन्होंने आपदा से कारगर तरीके से निपटने के लिए भारत, नेपाल, भूटान, तिब्बत का प्राक्रतिक मोर्चा बनाने का पर जोर देते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री को भी यह सुझाव पत्र के माध्यम से भेज चुके हैं।

हृदयेश जोशी ने बताया रिपोर्टिंग का तरीका
वरिष्ठ पत्रकार हृदयेश जोशी ने केदारनाथ आपदा समेत अन्य आपदा की घटनाओं की रिपोर्टिंग के दौरान गौर करने लायक तथ्यों को रेखांकित किया। उन्होंने आपदा के दौरान सटीक सूचना प्रणाली विकसित करने और मीडिया के साथ समन्वय स्थापित कर राहत एवं बचाव कार्य करने पर जोर दिया गया। संस्थान के निदेशक एएस नयाल ने सभी का स्वागत किया। जबकि कार्यक्रम निदेशक डॉ ओमप्रकाश, डॉ मंजू पांडे, बीसी तिवारी, शैलेश कुमार, एनके जोशी समेत जिलों के आपदा प्रबंधन अधिकारी, मीडियाकर्मी शामिल रहे।

आपदा में सनसनीखेज रिपोर्टिग से बचें
बरिष्ठ पत्रकार अरूण शर्मा ने आपदा प्रबंधन के अनुभव बताते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन में मीडिया की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने आपदा के दौरान सनसनीखेज रिपोर्टिग से बचने तथा अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की सीख दी। उन्होंने कहा कि मीडिया को आपदा के दौरान तथ्यों की पड़ताल कर आगे बढ़ना चाहिए। कई बार बिना तथ्यों पर आधारित खबर से अफवाहों को बल मिलता है। आपदा में सूचना तकनीक की उपयोगिता को सर्वाधिक महत्वपूर्ण करार देते हुए वरिष्ठ पत्रकार अरूण शर्मा ने कहा कि सटीक सूचना तंत्र से आपदा के तत्काल बाद राहत बचाव कार्य शुरू करने में आसानी होती है।

सोशल मीडिया की आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका
वरिष्ठ पत्रकार मनोज ईष्टवाल ने कहा कि आपदा प्रबंधन में मीडिया की भूमिका बेहद अहम है। आपदा प्रबंधन में लगे विभागों को मीडिया के साथ सामंजस्य स्थापित करना चाहिए। सोशल मीडिया भी आपदा प्रबंधन में नया हथियार बनाकर उभरा है। इसलिए आपदा प्रबंधन में लगे अधिकारियों को सोशल मीडिया की जानकारियों पर ध्यान रखना होगा।

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