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हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी : कोर्ट को गुमराह कर रही है राज्य सरकार

अधिकारियों के पास नहीं थे कोर्ट के सवालों के जवाब

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: कोर्ट को गुमराह कर रही है राज्य सरकार

अधिकारियों के पास नहीं थे कोर्ट के सवालों के जवाब

नैनीताल।  हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी से राज्य सरकार सख्ते में है। कोर्ट ने अधिकारियों से सवाल पूछे तो अधिकारियों के पास कई सवालों के जवाब नहीं थे। वन्य जीवों की सुरक्षा मामले पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सरकार के रवैये को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा को अध्यक्षता वाली खंडपीठ में अपर मुख्य सचिव डॉ रणवीर सिंह व चीफ वाईल्ड लाइफ राजीव भरतरी कोर्ट में पेश हुए और कोर्ट से शपथ पत्र के लिये मांफी मांगी। इसके बाद कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुये डीएफओ को आदेश दिया है कि कार्बेट में जिन रिसॉर्ट मालिकों से हाथी मिले है, उनके खिलाफ वन अधिनियम और आईपीसी की धाराओं में एफआईआर दर्ज करें।

कार्बेट नेशनल पार्क में अतिक्रमण के संबंध में हिमालयन युवा ग्रामीण विकास संस्थान ने जनहित याचिका दायर की थी। इसी तरह राज्य सभा सदस्य अनिल बलूनी ने भी वन गुर्जरों से संबंधित याचिका 2012 में दाखिल की थी। इन सारी याचिकाओें पर कोर्ट संयुक्त रूप से सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने दो अगस्त को प्रदेश के मुख्य सचिव को शपथ पत्र पेश करने का कहा था।

हाईकोर्ट ने पूछे यह अहम सवाल
कार्बेट पार्क में रिजार्ट किस अधिनियम के तहत संचालित हो रहे हैं?
रात में पर्यटकों को इन गेस्ट हाउसों में क्यों ठहरने दिया जा रहा है?
स्पेशल टाइगर फोर्स काम क्यों नहीं कर पा रही है?
वन क्षेत्र में रह रहे गुर्जरों को कब तक शिफ्ट करेंगे?
कार्बेट की छह रेंज में कितनी गाड़ियों के प्रवेश की अनुमति है?

हाईकोर्ट ने माना अधिकारियों की लापरवाही
हाईकोर्ट के आदेश पर अपर मुख्य सचिव रणवीर सिंह ने बृहस्पतिवार को जवाब पेश तो किया लेकिन वह अपने ही जवाब में फंस गए। उन्होंने शपथ पत्र में रिकार्ड संलग्न होने की जानकारी दी, जो संलग्न नहीं था। अदालत ने इसे उनकी लापरवाही माना। जवाब से असंतुष्ट कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोक पाल सिंह की पीठ ने कहा कि सरकार पहले पारित किए गए कोर्ट के आदेश को तोड़मरोड़ कर अदालत को गुमराह कर रही है। इसके साथ ही कोर्ट ने आदेशों में सरकार को कहा है कि वो हाथी कॉरिडोर का चिन्हिकरण कर उनमें सभी स्थानों पर अंडर ब्रिज का निर्माण करे। कोर्ट ने सख्त तौर पर कहा है कि जहां हाथी कॉरिडोर हैं उन स्थानों पर वाहनों की रफ्तार 25 किलोमीटर प्रतिघंटा से ज्यादा ना हो। एसीएस के शपथ पत्र पर बृहस्पतिवार को भी कोर्ट ने कई सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि कार्बेट के प्रत्येक जोन में 20 गाड़ियों तक के प्रवेश की अनुमति का निर्देश दिया गया था। एसीएस के शपथ पत्र में प्रत्येक जोन में 100-100 गाड़ियों के प्रवेश की जानकारी दी है। शपथ पत्र में पार्क से संबंधित रिकार्ड संलग्न होने की जानकारी दी गई है। यह रिकार्ड संलग्न नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि यह प्रदेश के जिम्मेदार अधिकारी अपर मुख्य सचिव की लापरवाही है। कोर्ट में एसीएस ने बताया कि वे सारा रिकॉर्ड लेकर मालसी रेंज के फारेस्ट गार्ड अंकुर शर्मा के पास गए। अंकुर शर्मा ने रिकॉर्ड की जांच की और रिकार्ड सत्यापित किया था।

वन गुजरों के मामले की भी हुई सुनवाई
इसके अलावा कोर्ट ने वन गूजरों के मामले पर सुनवाई करते हुए कहा है कि 16 अगस्त तक सरकार ये बताये कि इनके विस्थापन के लिये क्या कदम उठाए गये हैं। स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स पर सरकार की ओर से जवाब दिया गया कि इसके लिये 24 पूर्व सैनिकों की नियुक्त करने पर विचार किया जा रहा है। कोर्ट ने इस पर भी 16 अगस्त को पूरा ब्यौरा पेश करने को कहा है। कोर्ट ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए सवाल पूछे तो वह निरुत्तर हो गए।

एसीएस और मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक तलब
जवाब से नाराज कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव रणवीर सिंह और मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक राजीव भरतरी को दस अगस्त (शुक्रवार) को दो बजे व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि पूर्व में पूछे गए सवालों की जानकारी दोनों अधिकारी स्पष्ट रूप से दें।

 

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