उत्तराखंडखबर इंडिया

हमारे पहाड़ में इसे कहते हैं…

"तिमला क तिमला बि खते, अर नँग्या नँगी बि दिखे"

हमारे पहाड़ में इसे कहते हैं…

“तिमला क तिमला बि खते, अर नँग्या नँगी बि दिखे”

अजय रावत, वरिष्ठ पत्रकार।
अजय रावत, वरिष्ठ पत्रकार।

पौड़ी गढ़वाल। समझ में नहीं आता कि इस प्रदेश में मुख्यमत्री, मंत्री व जनप्रतिनिधियों की आवश्यकता ही क्यों है, जब सारे फैसले वह भी ऊल-जलूल नौकरशाहों ने ही लेने हैं तो..  वर्तमान सरकार ही नहीं, आज तक गठित सभी सरकारों का यही हाल रहा।

हालिया फैसला देख लीजिए। सूबे में चारधाम यात्रा अपने चरम पर, पर्यटक स्थलों में सैलानियों की भीड़, प्रवासियों का तांता अलग से.. और इसी पीक सीज़न में ‘बाबुओं’ ने फरमान जारी कर दिया कि टैक्सी व मैक्सी कैब पर स्पीड गवर्नर लगाए जाएं।क्या इन अफसरों को मालूम न था कि इस सीजन में तमाम बसें यात्रा में व्यस्त होती हैं, पहाड़ के यातायात की तमाम जिम्मेदारी टैक्सियों पर होती है। ये “बाबू” उत्तराखंड के खजाने की पगार खाते हैं या कुछ “और”..?

इन अफसरों की मूर्खता से सड़को में एक दिन की अराजकता से पूरे देश मे पहाड़ की छवि पर जो बट्टा लगा वह शायद ही धुल पाए,, जब इतनी फजीहत करा दी, तब फरमान को एक महीने के लिए स्थगित करने का आदेश, और तय है एक दिन पुराने वाहनों से इस फरमान को वापस लिया जाएगा,,, लेकिन “बड़े बाबुओं” की मनमानी और तुगलकी फरमान से प्रदेश की छवि तो एक ही दिन में जाती रही, यह एकमात्र मामला नहीं, ऐसे दर्जनों फैसलों से अफसरों ने न केवल सरकारों की छवि पर बट्टा लगाया बल्कि उत्तराखंड को गर्त में भी धकेला। 


मननीय मुख्यमंत्री श्री Trivendra Singh Rawat जी और मननीय परिवहन मंत्री श्री Yashpal Arya जी, कृपया जल्दबाजी में ऐसे फरमान जारी करने वाले बेकाबू बाबुओं की नकेल कसिए, आपको जनता जनार्दन ने असीमित शक्तियां दी हैं, उनका उपयोग कर इन बाबुओं को “लोक सेवक” होने की परिभाषा सिखाईये

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