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सावधान :- कहीं आपका फोन आपकी जासूसी तो नहीं करता

एक पासवर्ड आपके फोन में और आपकी जासूसी शुरू......रहिये होश्यिार

सावधान :- कहीं आपका फोन आपकी जासूसी तो नहीं करता

एक पासवर्ड आपके फोन में और आपकी जासूसी शुरू……रहिये होश्यिार

सोशल मीडिया। तकनीक जिनती फायदेबंद है उतनी ही खतरनाक भी। अगर तकनीक का प्रयोग अच्छे काम के लिये किया गया तो इससे बेहत्तर और कुछ नहीं यदि इसका काम किसी को नुकसान पहुंचाने के लिये किया गया तो इससे खतरनाक और कुछ नहीं। सोशल मीडिया में एक खबर तेजी से वायरल हो रही है कि कहीं आपका फोन आपकी जासूसी तो नहीं करता है। क्या आपने कभी सोचा है कि आपका फोन आपकी जासूसी कर सकता है? आपकी हर बात दूर बैठे किसी शख्स तक पहुंचा सकता है? और आपके निजी जिंदगी के हर राज भरे बाजार में बेच सकता है। ये बातें जरा अजीब लगती हैं, लेकिन महज एक सॉफ्टवेयर की बदौलत अब ये सब मुमकिन है। आपकी जासूसी की इच्छा रखनेवाला शख्स अगर चुपके से एक पासवर्ड आपके फोन में डाल देगा तो ऐसा करते ही आपका फोन आपका होते हुए भी आपका नहीं रहेगा। वो जासूसी में लगे शख्स के इशारे पर हर वो काम करेगा, जिसके बारे में आप ख्वाबों में भी नहीं सोच सकते। मोबाइल में यह सॉफ्टवेयर इंस्टाल करा देते हैं। जिससे उन्हें सामने वाले की हर गतिविधि की पल पल की जानकारी मिलती रहती है। जानकारों का कहना है कि मार्केट में ऐसी कई कंपनियां हैं, जो कि इस तरह के सॉफ्टवेयर और सर्विस देती हैं और सबसे दिलचस्प तो यह है कि ये सॉफ्टवेयर जिस मोबाइल में इंस्टाल होता है, उसे इस्तेमाल करने वाले को अपने फोन में यह दूर-दूर तक कहीं नहीं दिखाई देता। तो रहिए होशियार… अपने फोन का हमेशा ध्यान रखें…यहां वहां न छोडें।
खतरनाक साबित हो सकते हैं ये ऐप
वहीं इसके अलावा अध्ययनकर्ताओं ने कहा है कि मोबाइल के स्क्रीन पर आपके क्रियाकलापों के इन स्क्रीनशॉट्स और वीडियो में आपके यूजरनेम, पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड का नंबर और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं। जी हां, ये एप आपकी बातों को सुनते हैं, आपके व्यवहार पर नजर रखते हैं और यहां तक कि आपकी गतिविधि के स्क्रीनशॉट्स भी लेते हैं और उसे तीसरे पक्ष को भेज सकते हैं। यह जानकारी एक नए अध्ययन में सामने आई है।
बोस्टन के नार्थइस्टर्न यूनिवर्सिटी के प्राध्यापक डेविड चोफनस ने कहा, हमने पाया कि सभी ऐप के पास आपके स्क्रीन को या जो कुछ भी आप टाईप करते हैं, उन्हें रिकार्ड करने की क्षमता है। इन अध्ययन को बार्सिलोना में होने वाले प्राइवेसी इनहांसिंग टेक्नोलॉजी सिंपोजियम में पेश किया जाएगा। अध्ययन के अंतर्गत, समूह ने एंड्रायड ऑपरेटिंग सिस्टम में विद्यार्थियों द्वारा लिखित एक स्वचालित परीक्षण कार्यक्रम का उपयोग कर 17,000 से ज्यादा सबसे महत्वपूर्ण ऐप का विश्लेषण किया। इन 17,000 एप में से 9,000 एप के पास स्क्रीनशॉट्स लेने की क्षमता थी। विश्वविद्यालय के प्राध्यापक क्रिस्टो विल्सन ने कहा, अध्ययन में किसी भी प्रकार के ऑडियो लीक का पता नहीं चला। एक भी ऐप ने माइक्रोफोन को सक्रिय नहीं किया। उन्होंने कहा, उसके बाद हमने ऐसी चीजें देखी, जिसकी हमे आशा नहीं थी।
ऐप खुद ब खुद स्क्रीनशॉट्स ले रहे थे और तीसरे पक्ष को भेज रहे थे। विल्सन ने कहा, इसका उपयोग निश्चित ही किसी दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाता होगा। इंस्टॉल होना और जानकारी इकट्ठी करना काफी आसान है। और जो सबसे खतरनाक है, वह यह है कि इसके लिए कोई नोटिफिकेशन नहीं भेजा जाता और उपयोगकर्ताओं से कोई इजाजत नहीं ली जाती। इसलिये स्मार्ट फोन के मामले में आपको होशियार रहने की आवश्यकता है।
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