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शीर्ष ढोडी : छोटी सी उम्र में दुनिया को मनवाया अपनी प्रतिभा का लोहा

इण्टरनेशनल ओलम्पियाड आॅफ इंग्लिश लैंग्वेज में उत्तराखंड के इस लाल ने किया कमाल

शीर्ष ढोडी: छोटी सी उम्र में दुनिया को मनवाया अपनी प्रतिभा का लोहा

इण्टरनेशनल ओलम्पियाड आॅफ इंग्लिश लैंग्वेज में उत्तराखंड के इस लाल ने किया कमाल

अनिल बहुगुणा, वरिष्ठ पत्रकार
  अनिल बहुगुणा,   वरिष्ठ पत्रकार

श्रीगर गढ़वाल। कहावत है कि प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती। और इस बात को सच कर दिखाया है उत्तराखंड श्रीनगर गढ़वाल के रहने वाले शीर्ष ढोडी ने। जिन्होंने छोटी सी उम्र में ही वो काम कर दिखाया जिसे बडे-बडे हुनरमंद भी नहीं कर पाते। दसवीं के छात्र शीर्ष ढोडी भले उम्र और कद से छोटे हों लेकिन उनके हौसले बुलंद हैं। छोटी सी उम्र में उन्होंने ऐसी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है जिसे देखकर बड़े भी दांतो तले उंगली दबा लेते हैैं।

राज्य स्तर में प्राप्त किया प्रथम स्थान
देवभूमि उत्तराखंड के बच्चों ने समय-समय पर विश्वपटल पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। कई बच्चों ने बहुत छोटी सी उम्र में ही ऐसी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। जिसे देखकर बड़े भी दांतो तले उंगली दबा लेते हैै। श्रीनगर गढ़वाल के सेंट थेरेसाज काॅन्वेन्ट स्कूल के दसवीं कक्षा के छात्र शीर्ष ढोडी ने गत वर्ष दिसम्बर माह में सम्पन्न हुए इण्टरनेशनल ओलम्पियाड आॅफ इंग्लिश लैंग्वेज में राज्य स्तर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है एवं विश्व स्तर में 96 वीं रैंक हासिल की है। इस उम्र में यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।

कई वाद्य यंत्रों को भी बखूबी बजा लेते हैं शीर्ष
गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर में कार्यरत डाॅ0 राकेश ढोडी एवं डाॅ0 रश्मि ढोडी के पुत्र शीर्ष ढोडी बचपन से ही विभिन्न गतिविधियों में अपना जलवा बिखेरते रहे हैं। पढ़ाई के साथ साथ ही संगीत के क्षेत्र में भी उनकी विशेष रुचि रही है तथा वो गायन के साथ साथ कई वाद्य यंत्रों को भी बखूबी बजा लेते हैं।

इस सफलता के पीछे माता-पिता का अथक प्रयास
शीर्ष ढोडी अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता पिता एवं गुरुजनों को देते हैं। वह कहते हैं कि अपनी रेगुलर पढ़ाई के साथ-साथ वह गीत-संगीत का भी जमकर रियाज करते हैं। वह गायन के साथ साथ कई वाद्य यंत्रों को भी बजा लेते हैं। मेरा व्यक्तिगत मानना है कि शीर्ष जैसा बच्चा यदि इतनी कम उम्र में इस ऊंचाई तक पहुंच रहा है, तो बेशक हमें उसकी सफलता का स्तर समझना होगा और सीख लेनी होगी। कम उम्र में अभूतपूर्व सफलता पाना भाग्य का मामला नहीं है, हमें यह मानना होगा कि इस सफलता के पीछे माता-पिता का प्रयास है, जिन्होंने बच्चों को अपने दम पर सीखने और अपने स्वयं के भविष्य का निर्माण करने के लिए स्वतंत्रता प्रदान की।

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