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विधानसभा में गैरसैंण पर गर्माई सियासत, गौ संरक्षण पर सदन में खूब उठे सवाल

विधानसभा शीतकालीन सत्र में खूब उठे जनहित से जुड़े मुद्दे

विधानसभा में गैरसैंण पर गर्माई सियासत, गौ संरक्षण पर सदन में खूब उठे सवाल

विधानसभा शीतकालीन सत्र में खूब उठे जनहित से जुड़े मुद्दे

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा सत्र के तीसरे दिन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने सदन के भीतर गैरसैंण को राजधानी बनाने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार से नियम 310 के तहत चर्चा की मांग की हालांकि पीठ ने विपक्ष के इस प्रस्ताव को नियम 58 के तहत चर्चा की सहमति जताई।। विपक्ष के अनुरोध को स्वीकार करने के बाद प्रश्नकाल शुरू होते ही भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह गोवंश का मुद्दा सदन में उठाया। जीना ने सरकार से मांग की कि सरकार गोवंश संरक्षण के लिए क्या कदम उठा रही है। सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं को लेकर विधायक सुरेंद्र सिंह जी ने ने उठाया सवाल। गोवंश संरक्षण के लिए सरकार से की मांग सरकार गो सदन बनाने की मांग। जीना ने सदन में किया ऐलान सरकार यदि गायों के लिए चारे की करें व्यवस्था तो एक करोड़ रुपए देकर मैं खुद बना दूंगा गो सदन। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हुई घटना का भी हुआ उत्तराखंड विधानसभा में जिक्र। रुद्रपुर विधायक राजकुमार ठुकराल ने सरकार से की मांग बुलंदशहर जैसी घटना उत्तराखंड में ना हो सरकार इसके लिए क्या कर रही है व्यवस्था। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हिरदेश ने कहा कि सरकार गौर संरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है। पशुपालन मंत्री रेखा आर्या ने गौ संरक्षण को लेकर राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही तमाम योजनाओं को सदन में रखा। अपने जवाब मे सरकार द्वारा अब तक गौ संरक्षण को लेकर अब तक किये गये तमाम कामों की जानकारी सदन को दी। लेकिन मंत्री के जवाब से विधायक संतुष्ट नजर नहीं आये। जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंन्द्र अग्रवाल ने इस सवाल का ठीक से जवाब न आने पर सवाल को स्थगित कर दिया।

गैरसैंण पर गर्माई सियासत
विधानसभा सत्र के चैथे दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों द्वारा कई मुद्दो पर बहस की अनुमति विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मांगी गई। इसी के तहत विपक्ष ने नियम 310 के तहत गैरसैंण पर बहस करने की मांग की। जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने नियम 58 के तहत गैरसैंण पर चर्चा की बात कही। चर्चा के दौरान विपक्ष ने गैरसैंण को लेकर सरकार के कई सवाल पूछे वही सरकार के जवाब से विपक्ष असंतुष्ठ नगर आया। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हिरदेश ने कहा कि राज्य सरकार गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाये जाने पर अपना रूख साफ करे। गैरसैंण के सवाल पर शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने कहा की विपक्ष इसे सिर्फ मुद्दा बनाती है। पांच साल जब वो सरकार मे रही तो उसने कुछ नही किया। अब हमे दो साल हुए हैं और हमने गैरसैंण के लिए बहुत कुछ कर दिया है।

गन्ना किसानों का बकाया भुगतान जल्द
विधानसभा सत्र के चैथे दिन गौर सरक्षण के बाद गन्ना किसानों का मुद्दा सदन में उठा। भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल और कुंवर प्रणव सिंह चैपियन ने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान और न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित होने में हो रही देरी पर सरकार को घेरा। विधायको ने कहा कि बकाया भुगतान न मिलने से गन्ना किसानों की आर्थिक हालात काफी खराब हो गई है। विधायकांे के सवाल पर जवाब देते हुए गन्ना विकास मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि सरकार जल्द गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को लेकर कार्यवाही करने के साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर देगी।

आर्गेनिक कृषि पर सरकार का फोकस
गौ सरक्षण, गन्ना किसानों के साथ ही राज्य में आर्गेनिक कृषि की नीति और वर्तमान स्थिति से जुड़े सवाल भी सदन में सदस्यों ने उठाये। झबरेड़ा से भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल ने कृषि मंत्री से राज्य में आर्गेनिक कृषि को बढावा देने के लिए अब तक सरकार द्वारा किये गये प्रयासों को लेकर सवाल पूछा। भाजपा विधायक ने कहा कि आर्गेनिक कृषि को बढावा मिले इसके लिए सरकार ने क्या पाॅलिसी तैयार की है। सवाल के जवाब में कृषि मंत्री सुवोध उनियाल ने कहा आर्गेनिक कृषि को बढावा देने के लिए योजनबद्व तरीके से कार्य किया जा रहा है। साथ ही आर्गेनिक कृषि को बढावा मिले इसके लिए मंडी समितियों को इनकी मार्केटिंग की जिम्मेदारी सौपी गई है। ताकि राज्य के किसानों को उचित लाभ मिल सके।

भागीरथी में मलबा डालने पर होगी कार्रवाही
धनौल्टी विधानसभा से निर्दलीय विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने आज सदन में राज्य में पेयजल स्वच्छता की स्थिति से जुड़ा सवाल पूछा। इसके साथ ही प्रीतम पंवार ने आॅल बेदर रोड के कार्यों से जुड़ा सवाल भी सदन में उठाया। विधायक प्रीतम पंवार ने बताया कि आॅल बेदर रोड़ कटिंग का मलबा डालने के लिए जो डंपिग जोन बनाये गये हैं कार्यदायी संस्था उनमें मलबा न डाॅलकर भागीरथी नदी में मलबा डाल रही है। भागीरथी नदी में मलबा डाले जाने से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। सवाल के जबाव में संसदीय कार्य, पेयजल व स्वच्छता मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि हमने कार्यदायी संस्था को कड़े निर्देश दिये हैं कि मलबा डंपिग जोन में ही डाला जाये यदि कहीं पर ऐसा हो रहा है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जायेगी।

खूब उठे जनहित से जुड़े मुद्दे
उत्तराखंड विधानसभा के 4 दिनी शीतकालीन सत्र में जनहित से जुड़े मुद्दे खूब उठे। सत्ता और विपक्ष के विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्र से जुड़े मुद्दों के साथ ही प्रदेशहित से जुड़े मुद्दों को सदन में प्रमुखता से उठाया। 4 दिनी सत्र में शिक्षकों की कमी, बेरोजगारों को रोजगार, पर्वतीय क्षेत्रों में खेलों को बढावा देने, आयुर्वेदिक छात्रों की फीस बृद्वि, बंदर बाड़ों के निमार्ण, किसानो की समस्या, गेस्ट टीचरों की भर्ती, सफाई कर्मियों की भर्ती, नजूल भूमि को मालिकाना हक दिये जाने के साथ ही कई जनहित से जुड़े मुद्दे सदन में आये। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हिरदेश ने एक का सत्र बढाने की मांग विपक्ष की ही थी। हम चाहते थे कि जनहित से जुड़े अधिक से अधिक प्रशन सदन के पटल पर आ सके। नियम 58 के तहत जो सवाल पूछे जाते हैं उनसे सरकार भी डरती है इसलिए उनका कुछ न कुछ समाधान होता ही है। वहीं संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि 4 दिनी सत्र बेहत्तर ढंग से संचालित हुआ है। सत्ता पक्ष के विधायकों ने बेहत्तर ढंग से जनहित से जुड़े प्रशन उठाये।

जब विधानसभा अध्यक्ष हुए नाराज
उत्तराखंड विधानसभा शीतकालीन सत्र में 5, 6 एवं 7 दिसंबर को सदन में प्रश्नकाल के दौरान उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल की अध्यक्षता में सदन में आए सभी तारांकित प्रश्नों को उत्तरित किया गया। जिसके लिए विधानसभा अध्यक्ष ने सभी माननीय सदस्यों को धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रेमचंद अग्रवाल के अध्यक्ष रहते हुए 7 बार ऐसा हुआ है कि सदन के पटल पर रखे गए सभी तारांकित प्रश्नों को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा निर्धारित समय अवधि से पहले ही उत्तरित कराया गया। इसके साथ ही आज सदन में विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों के व्यवहार के प्रति नाराजगी भी जाहिर की। उन्होंने मंत्रियों के साथ ही विधायकों को भी पूरी तैयारी के साथ सदन में अपनी और सदन की गरिमा बनाये रखने की अपील की।

केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार को भावभीनी श्रद्धांजलि
उत्तराखंड विधानसभा शीतकालीन सत्र के पहले दिन जहां सदन में सभी सदस्यों ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी को श्रद्धांजलि दी और उनके साथ विताये अनुभवों को सदन में साझा किया। वहीं आज शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सदन में सदस्यों ने केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई,सदन में 2 मिनट का मौन रखा गया। गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार का 59 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह कैंसर से जूझ रहे थे। भाजपा नेता अनंत कुमार साल 1996 से दक्षिणी बेंगलुरु का लोकसभा में प्रतिनिधित्व करते थे। उनके पास दो महत्वपूर्ण मंत्रालय थे और वह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के कद्दावर मंत्रियों में से एक थे। केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार को श्रद्धांजलि देते हुए विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल ने कहा कि उनको उत्तराखंड से बहुत लगाव था। उनकी कार्य करने की शैली हम सबके लिए प्रेरणास्रोत है।

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