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युवा गायक केवल पुंडीर की त्रिवेन्द्र सरकार से गुहार,इन गांवो की सुध लीजिए सरकार, कुछ भी तो नहीं है यहां

इन गांवो की सुध लीजिए सरकार, कुछ भी तो नहीं है यहां

युवा गायक केवल पुंडीर की त्रिवेन्द्र सरकार से गुहार

इन गांवो की सुध लीजिए सरकार, कुछ भी तो नहीं है यहां

मूलभूत सुविधाओं के दर्द से परेशान हैं दोगी पट्टी के ग्रामीण

नरेन्द्रनगर, टिहरी। राज्य गठन के इन 18 सालों में कई सरकारेें आई और चली गई। मुख्यमंत्री बदलते रहे, हर बार नए सबूदार ने नए-नए सपने प्रदेश की मासूम जनता को दिखाए। वादे भी हुए काम भी हुए पर क्या वाकई पहाड़ों में विकास हुआ? क्या दूरस्त गांवों में विकास की पहियां पहुंच पाया? क्या अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाया? इन सब बातों को लेकर हमनें बात की दीक्षा बांद गढ़वाली एलबम से चर्चाओं में आये युवा गायक केवल पुंडीर से।

विकास से महरूम दोगी पट्टी-पुंडीर
केवल पुंडीर कहते हैं कि राजधानी से मात्र 70 किलोमीटर की दूरी पर पड़ता है दोगी पट्टी क्षेत्र, टिहरी गढ़वाल के नरेन्द्र नगर ब्लाक में पड़ने वाले इस क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधायें न के बराबर हैं। पुंडीर कहते हैं कि सरकार दावा करती है कि हर घर तक बिजली, पानी, सड़क, प्रथामिक स्वास्थ्य केन्द्र की सुविधा देगी , लेकिन पिछले 18 साल के हालातों को देख कर लगत नहीं कि कभी हो पायेगा।

क्यारी के ग्रामीण की है यह फरियाद
युवा गायक केवल पुंडीर कहते हैं कि दोगी पट्टी क्षेत्र में लोगों को क्या-क्या परेशानी उठानी पड़ रही है यहां तक कि स्कूलों में भी बच्चों को शुद्व पानी नहीं मिल रहा है। क्यारा गांव जहां स्कूलों में बच्चों को न तो शुद्व पीने का पानी मिलता है, न ही आने जाने का रास्ता ठीक है। यहां पर सिर्फ नेता लोग तब दिखाई देते हैं जब चुनाव नजदीक आता है। यहां के बुर्जुग चैत सिंह पुंडीर जी जिनकी उम्र 95 साल पूरी हो चुकी है। उन्होंने बहुत बार शिकायत भी की है। लेकिन किसी ने नहीं सुनी। पुंडीर कहते हैं कि यहां तक कि उनहोंने स्कूलों के बच्चों के हित के लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी को भी ज्ञापन भेजा कि यहां पर स्कूल का माहौल दिन प्रतिदिन बिगड़ता जा रहा है। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

युवा गायक केवल पुंडीर
        युवा गायक केवल पुंडीर

अनेथा और मज्याड़ी का भी है यही हाल
केवल पुडींर कहते हैं कि यह केवल उनके क्यारा गांव की कहानी नहीं है बल्कि क्यारा गांव से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पड़ने वाले मज्याड़ी और अनेथा गांव के हालात भी कुछ ऐसे ही हैं। जहां पर लोगों को बिजली, पानी की काफी दिक्कते झेलनी पड़ती है।

पुंडीर बताते हैं कि मज्याड़ी गांव में लोगों को न तो पीने का पानी का उपलब्ध हो पाता है और न ही आने जाने के लिए सड़के हैं। जब कोई बीमार पड़ जाता है। तो लोगों को तिमली गांव तक 8 किलोमीटर की दूरी पैदल चलकर तय करनी पड़ती है।

यहां के लोग भी मूलभूत समस्याओं से परेशान हैं। कभी-कभी ऐसा भी होता है जब मरीज को गांव से अस्पताल की ओर लाया जाता है तो वह रास्ते में दम तोड़ देता है। केवल पुंडीर सवाल करते हुए कहते हैं कि क्या कभी इस क्षेत्र में उम्मीद और आशा की किरण झलकेगी? क्योंकि पिछले 18 सालों से जिस गति पर हमारे प्रदेश का विकास चल रहा है। हमें तो लगता नहीं है। कि कभी इस क्षेत्र में खुशियां झलकेंगी।

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