उत्तराखंडस्किल इंडिया

मशरूम करेगा पनियाला गांव का कायाकल्प

टिहरी गढ़वाल के प्रतापनगर ब्लाक में है पनियाला गांव

मशरूम करेगा पनियाला गांव का कायाकल्प

टिहरी गढ़वाल के प्रतापनगर ब्लाक में है पनियाला गांव

अरूण चमोली
   अरूण चमोली

पर्वतीय क्षेत्रों में कभी अभिशाप समझा जाने वाला मशरूम आज पहाड़ के लोगों के लिए संजीवनी बूटी के समान हो गया है। मुझे इस बात को कहने में जरा भी हिचक नहीं कि पहाड़ों में जितना भी रिवर्स पलायन हुआ है उसकी बड़ी वजह मशरूम उत्पादन भी है। यही वजह है कि पर्वतीय लोगों का रूझान मशरूम उत्पादन को लेकर ज्यादा दिखाई दे रहा है। उत्तराखंड में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने में आईएलएसपी व उत्तराखंड ग्राम्य विकास समिति का बहुत बड़ा योगदान है। इन दोनों की वजह से ही हम जैसी कई संस्थाएं इस मिशन को आगे बढ़ा रही हैं और लोगों को मशरूम उत्तपादन का बेहत्तर प्रशिक्षण दे रही हैं।

उत्तराखंड के कई गांवों में मशरूम उत्तपादन का सफल प्रशिक्षण दे चुके हमारा फ्यूजन इंस्टीटयूट आॅफ होटल मैनेजमैंट देहरादून इस बार पहुंचा जनपद टिहरी गढ़वाल के प्रतापनगर ब्लाक के पनियाला गांव में। इस गांव का चुनाव करने में मेरे सहयोगी राकेश पेटवाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने मुझे बताया कि इस गांव के लोग मशरूम उत्पादन सीखने को काफी उत्सुक हैं ताकि उनकी आर्थिकी मजबूत हो और पनियाला को उत्तराखंड के सर्वक्षेष्ठ मशरूम उत्तपादन गांव के रूप में पहचान मिले। जब में गांव में पहुंचा तो मुझे जिस तरह लोगों का प्यार मिला उसे देखकर मुझे अपने सहयोगी राकेश पेटवाल की बात पर यकीन हुआ कि वाकई लोगों में मशरूम उत्पादन केा लेकर कितना क्रेज है। मैने अपनी सहयोगी और ट्रेनर प्रियंका नौटियाल जो कि मशरूम उत्पादन की उच्चस्तीरय ट्रेनिंग लेकर पिछले काफी समय से केदारनाथ सहित कई क्षेत्रों में मशरूम उत्पादन के लिए काम कर रही से कहा कि आपके लिए यह एक चैलेंज है क्योंकि आपको हाल ही में टिहरी में मशरूम उत्पादन के लिए भागीरथी लोक सम्मान से नवाजा गया है। प्रियंका ने भी इसे एक चैलेंज की तरह लिया और ग्रामीणों को पूरी आत्मीयता के साथ, जरूरत पढ़ने पर अपनी बोली भाषा में मशरूम उत्पादन की जो बारीकियां सिखाई उसने ग्रामीणों के हौसलों को बढ़ाने का काम किया है। पहले दिन महज 30 महिला-पुरूषों से शुरू हुआ मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम महज 07 दिन में 120 की संख्या तक पहुंच गया। पनियाला के आस-पास के गांव के लोग भी मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लेने बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। एक बार और आप से शेयर करना चाहूंगा कि जब पहले मशरूम खिल बहार आये तो ग्रामीणों के चेहरों पर कामयाबी की चमक साफ दिखाई दे रही थी ऐसा लग रहा था कि अब वो दिन दूर नहीं जब पनियाला को मशरूम गांव के नाम से उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश में जाना जायेगा। फ्यूजन इंस्टीटयूट आॅफ होटल मैनेजमैंट देहरादून की तरफ से थैक्यू राकेश पेटवाल भाई, व प्रियंका नौटियाल आपके दोनों के सहयोग व समर्पण के बिना यह सब संभव नहीं था।

उत्तराखंड में लहलहाएगी मशरूम की खेती
राज्य में मशरूम के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकारें लगातार प्रयासरत रहीं हैं। मशरूम उत्पादन के क्षेत्रफल में बढ़ोत्तरी करने के लिए पांच से अधिक ‘प्रोडक्शन जोन’ विकसित करने की बात भी सरकार ने कही है। इतना ही नहीं मशरूम की खेती के लिए इच्छुक महिलाओं को सरकारी खर्च पर बाकायदा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भी कहा है कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में मशरूम की खेती की अत्यधिक संभावनाएं हैं। यहां की जलवायु मशरूम उत्पादन के लिए काफी अनुकूल है। पर्वतीय क्षेत्रों में खाली मकानों में इसे आसानी से उगाया जा सकता है। यह ग्रामीणों की आजीविका और रोजगार का महत्वपूर्ण साधन हो सकता है। रवाईं घाटी में मशरूम की खेती पर अच्छा काम हो रहा है। मुख्यमंत्री ने दिव्या रावत, रंजना रावत की सराहना करते हुए कहा कि चमोली जिले में मशरूम उत्पादन में उनके द्वारा किया गया कार्य दूसरों को भी प्रेरित कर रहा है।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close
Close