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बड़ी खबर :- हरक सिंह रावत ने फोन पर कही सीएम त्रिवेन्द्र से यह बड़ी बात

इस दिन सबूतों के साथ करेंगे मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र से मुलाकात

बड़ी खबर:- हरक सिंह रावत ने फोन पर कही सीएम त्रिवेन्द्र से यह बड़ी बात

इस दिन सबूतों के साथ करेंगे मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र से मुलाकात

देहरादून। उत्तराखंड की सियासत इन दिनों गर्माई हुई है। वन मंत्री हरक सिंह रावत ने अधिकारियों के खिलाफ मोर्चो खोला हुआ है। पहले वन विभाग के अधिकारियों द्वारा उनको बाईपास कर विदेश जाने फिर लालढांग-चिलरखाल मोटर मार्ग का काम रोके जाने से अपर मुख्य सचिव से नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। एक के बाद एक हरक सिंह के बयानों के सुर्खियां बनने के बाद शुक्रवार को सरकार भी सक्रिय हो गई। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने वन मंत्री डॉ. रावत से फोन पर संपर्क साधा। डॉ. रावत के अनुसार उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा- जो हुआ वह गलत हुआ है। मैं बहुत दुखी हूं। इतना दुखी पिछले 28 सालों के राजनीतिक कॅरियर में कभी नहीं हुआ। हमारी मंशा राज्य का विकास है। जनता की सुविधाओं का ख्याल रखना है। लालढांग-चिलरखाल मार्ग के संबंध में कोई मुझसे पूछता तो मैं बताता। मुझे विश्वास में लिया जाना चाहिए था।
डॉ.रावत के अनुसार उन्होंने बताया कि यदि इस मामले में कुछ गलत था तो भूमि हस्तांतरण कैसे किया गया। शासन ने ही इसके आदेश किए। फिर यह सड़क जनता को सुविधा मुहैया कराने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपर मुख्य सचिव एक डीएफओ के कहने पर कैसे निर्णय ले सकते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि 23 मई के बाद वह सभी तथ्यों व साक्ष्यों के साथ उनसे मुलाकात करेंगे। उधर, लालढांग-चिलरखाल मार्ग के बारे में प्रमुख सचिव वन आनंदव‌र्द्धन ने वन विभाग से पूरा ब्योरा तलब किया है। उन्होंने बताया कि इस सड़क के लिए भूमि हस्तांतरण से लेकर अब तक की स्थिति पर समग्र रिपोर्ट मांगी गई है।
आपको बता दें कि वन मंत्री डॉ.रावत की पहल पर पूर्व में 11 किमी लंबे लालढांग-चिलरखाल मार्ग के लिए वन भूमि लोनिवि को हस्तांतरित की गई थी। इसके बाद लोनिवि ने इस पर तीन पुलों के साथ ही सड़क की पेंटिंग का कार्य शुरू करा दिया। वर्तमान में वहां पुलों का निर्माण कार्य चल रहा था। इस बीच मामला एनजीटी में पहुंचने पर एनजीटी ने इसकी वस्तुस्थिति को लेकर वन विभाग से रिपोर्ट मांगी।एनजीटी का पत्र मिलने के बाद लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ ने लोनिवि को काम रोकने के लिए निर्देशित किया। हालांकि, तब लोनिवि ने यह कहकर ऐसा करने से मना कर दिया था कि यह सड़क शासनादेश के तहत उसे हस्तांतरित हुई है। बाद में अपर मुख्य सचिव लोनिवि ने सड़क का काम रोकने के आदेश निर्गत कर दिए।
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