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बड़ी खबर :- हरक की सख्ती से जरूर पड़ेगा फर्क?

अब न होगी धांधली न होगा गड़बड़झाला, न चलेगी किसी की मनमानी

बड़ी खबर :- हरक की सख्ती से जरूर पड़ेगा फर्क?

अब न होगी धांधली न होगा गड़बड़झाला, न चलेगी किसी की मनमानी

आखिर अब ऐसा क्या करने जा रहे हैं हरक सिंह रावत

देहरादून। कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत जब भी सख्त होते हैं तो उसका कुछ न कुछ असर जरूर दिखाई देता है। इस बार हरक सख्त हुए हैं उत्तराखंड में हिचकौले खा रही राज्य कौशल विकास योजना को पटरी पर लाने के लिए। प्रशिक्षण केन्द्रांें में धांधली उजागर होने के बाद उत्तराखंड में कौशल विकास योजना को पटरी पर लाने की कड़ी में सेवा शर्तों में शिथिलता देने को गहनता से मंथन चल रहा है। कौशल विकास योजना के तहत युवाओं को विभिन्न रोजगार परख कोर्सों का प्रशिक्षण देने के लिये सरकार नई नियमावली बनाने जा रही है। इस नियमावली को बनाने के पीछे सरकार की सोच प्रदेश के ही संचालकों को प्रशिक्षण कार्य देने की है। गौरतबल है कि प्रदेश में नियमों के विपरीत कौशल विकास प्रशिक्षण संचालित होने से श्रम मंत्री हरक सिंह रावत नाराज थे। जिसके बाद जांच में भी कई खामियां पाई गई थी। इसके बाद 20 से अधिक केन्द्रों को नोटिस भी जारी किया गया। 
उत्तराखंड कौशल विकास योजना के तहत खुले प्रशिक्षण केंद्रों में प्रशिक्षण के लिए जिन संस्थाओं व फर्मों को जिम्मेदारी सौंपी गई हैं उनमें अधिकांश बाहरी राज्यों की हैं। पूर्व में कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्रों की जांच पड़ताल में ये बात सामने आ चुकी है कि कई जगह संस्थाओं ने प्रशिक्षण केंद्र सबलेट कर दिए। नियमानुसार जिसे जिम्मेदारी दी गई है, प्रशिक्षण भी उसी संस्था को देना है। यही नहीं, कई जगह सिस्टम की हीलाहवाली के चलते प्रशिक्षण केंद्र खुल ही नहीं पाए। करीब तीन माह पहले परियोजना निदेशक के हटने के बाद से तो स्थिति और खराब होती चली गई। वर्तमान में तो योजना करीब-करीब रसातल की ओर पहुंच गई है। ऐसे में इसके भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
अब सरकार ने राज्य की कौशल विकास योजना को फिर से पटरी पर लाने की ठानी है। सरकार का मानना है कि इससे जहां ठप पड़ी यह योजना रफ्तार पकड़ेगी, वहीं स्थानीय संस्थाओं के लिए रोजगार के दरवाजे खुलेंगे और वे पूरी शिद्दत से युवाओं को ट्रेंड कर पाएंगी। यही नहीं, प्रशिक्षण देने वाली संस्थाएं राज्य की होंगी तो इन पर अंकुश बना रहेगा और गड़बड़झाले की आशंका भी नहीं रहेगी।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार देशभर में युवाओं के कौशल विकास पर जोर दे रही है। इस कड़ी में उत्तराखंड में भी प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और उत्तराखंड कौशल विकास योजना संचालित है। दोनों योजनाओं में 2022 तक राज्य के करीब एक लाख युवाओं को उन ट्रेडों में पारंगत किया जाना है, जिनमें उनकी रुचि है। इसके लिए करीब 31 ट्रेड में 577 पाठ्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र खोले गए हैं, जहां विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से युवाओं के कौशल विकास में वृद्धि की जानी है।
उत्तराखंड कौशल विकास योजना लगभग बंद सी पड़ी है। इसे देखते हुए कौशल विकास प्रशिक्षण को नियुक्त की जाने वाली संस्थाओं के लिए सेवा शर्तों को शिथिल किया जाएगा। इसके लिये नई नियमावली तैयार की जा रही है। यह ऐसी होंगी कि राज्य की संस्थाओं को अधिक तवज्जो मिले। योजना से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया गया है। सरकार की कोशिश ये है कि जल्द से जल्द योजना फिर रफ्तार पकड़ ले। -डॉ.हरक सिंह रावत, कौशल विकास मंत्री, उत्तराखंड
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