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बड़ी खबर:- तो क्या एनआईटी श्रीनगर से शिक्षक व कर्मचारी जयपुर हुए रवाना?

कौन रच रहा है एनआईटी को पहाड़ से मैदान में शफ्ट करने की साजिश?

बड़ी खबर:- तो क्या एनआईटी श्रीनगर से शिक्षक व कर्मचारी जयपुर हुए रवाना?

कौन रच रहा है एनआईटी को पहाड़ से मैदान में शफ्ट करने की साजिश?

आईआईटी के बाद देश का दूसरा सबसे प्रमुख तकनीकी संस्थान है एनआईटी

देहरादून। एनआईटी श्रीनगर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। एनआईटी श्रीनगर को लेकर शुरू हुआ विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विवाद को हल करने के लिए एमएचआरडी ने एक रास्ता निकाला है। जिसके मुताबिक एमएचआरडी ने छात्रों से जयपुर के लिए विकल्प मांगा था। जिसके बाद जानकारी में आ रहा है कि एमएचआरडी ने एनआईटी उत्तराखंड से करीब 500 छात्रों को एनआईटी जयपुर स्थानांतरित किए जाने का निर्णय लिया था। सूत्रों के मुताबिक शिक्षकों व कर्मचारियों की पहली खेप आज सुबह जयपुर रवाना हो गई। शिक्षकों व कर्मचारियों के जयपुर रवाना होने की पुष्टि एनआईटी प्रशासन ने भी की है। हालांकि कितने शिक्षक व कर्मचारी जयपुर जा रहे हैं। इस संबंध में एनआईटी प्रशासन ने स्पष्ट नहीं बता रहा है। एनआईटी के कुलसचिव कर्नल सुखपाल ने बताया कि छात्रों व एमएचआरडी के बीच सीधा संवाद हुआ है। कितने छात्रों ने जयपुर का विकल्प भरा है। इसकी जानकारी उनको नहीं है। हालांकि कुलसचिव कर्नल सुखपाल ने रविवार को कुछ शिक्षकों व कर्मचारियों के जयपुर रवाना होने की पुष्टि की है। कुलसचिव ने बताया कि कुछ शिक्षक व कर्मचारी एक माह के लिए जयपुर जा रहे हैं। एमएचआरडी ने एनआईटी उत्तराखंड से करीब 500 छात्रों को एनआईटी जयपुर स्थानांतरित किए जाने का निर्णय लिया था। यहां अध्ययनरत छात्र अस्थायी परिसर को स्थानांतरित किए जाने की मांग के लिए दिल्ली जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। एमएचआरडी ने छात्रों से जयपुर के लिए विकल्प मांगा था।
2 साल में बनकर तैयार होगा एनआईटी श्रीनगर कैंपस – धन सिंह रावत
एमटेक और पीएचडी के छात्रों को छोड़ सभी शिफ्ट होंगे जयपुर-धन सिंह रावत
एनआईटी श्रीनगर के छात्रों के भविष्य को लेकर मचे बवाल के बाद उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा है कि कैंपस कहीं और शिफ्ट नहीं किया जाएगा। अगले 2 वर्षों में एनआईटी के भवन का निर्माण श्रीनगर में ही होगा। इसके लिए जमीन भी तलाश ली गई है। उन्होंने कहा कि जो छात्र श्रीनगर कैंपस में नहीं पढ़ना चाहते उन्हें जयपुर शिफ्ट किया जाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने बताया कि एनआईटी श्रीनगर से कहीं भी अन्य हस्तांतरण नहीं होगी। एमटेक, पीएचडी कर रहे छात्र वहीं रहेंगे, जो छात्र वहां नहीं पढ़ना चाहते उनको जयपुर में उनको शिफ्ट किया जाएगा। मंत्री ने बताया कि अगले 2 साल में एनआईटी भवन का निर्माण श्रीनगर में होगा। अगले वर्ष से जो भी छात्र एनआईटी में प्रवेश लेगा उनका बॉन्ड भरा जाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि हमारी सरकार ने पहले ही एनआईटी श्रीनगर के बारे में निर्णय ले लिया है. नई जमीन भी एनआईटी के लिए मिल गई है, जल्दी ही एनआईटी के नए परिसर का काम शुरू हो जाएगा।

सड़क दुर्घटना के बाद शुरू हुआ आंदोलन
गौरतलब है कि तीन अक्तूबर 2018 को बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर एनआईटी की दो छात्राओं को लैब जाते समय एक बेकाबू कार ने टक्कर मार दी थी। इस हादसे में एक छात्रा गंभीर घायल हो गई थी। जिसका इलाज एम्स ऋषिकेश में चल रहा है। जहां उसकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। इस घटना से आक्रोशित होकर एनआईटी संस्थान के छात्र-छात्राएं अगले दिन से ही कक्षाओं का बहिस्कार कर आंदोलन पर चले गये थे। छात्रों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में वायरल किए हैं। जिसमें उन्होंने तत्काल तीन मांगों घायल छात्रा का इलाज का खर्चा उठाने, तत्काल अस्थायी कैंपस में शिफ्ट करने और स्थायी कैंपस के लिए भूमि चयन और निर्माण शुरू करवाने की मांग की है।

सुमाड़ी में बनना है एनआईटी का स्थाई कैंपस
साल 2009 में स्वीकृत एनआईटी उत्तराखंड का अस्थायी कैंपस वर्तमान में श्रीनगर स्थित पॉलीटेक्निक के परिसंपत्ति में संचालित हो रहा है। जबकि स्थाई कैंपस के लिए श्रीनगर से 16 किलोमीटर दूर सुमाड़ी में भूमि चयनित की गई है। लेकिन अभी तक स्थाई कैंपस का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

कहीं छात्रों को राजनीतिक मोहरा तो नहीं बनाया जा रहा ?
श्रीनगर से लेकर देहरादून तक चर्चाओं का बाजार गर्म है कि स्थाई कैंपस को लेकर आन्दोलन कर रहे छात्रों को राजनितिक मोहरा बनाया जा रहा है। इसके पीछे असली वजह ये बयाती जा रही है कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जैसे अग्रणी संसथान को श्रीनगर (पहाड़) से कहीं और शिफ्ट करने की साजिश हो रही है। इस बात पर गौर करना होगा कि आखिर कैसे अचानक स्थाई कैंपस के मुद्दे को इतना बड़ा बना दिया गया कि छात्रों ने अपने भविष्य की परवाह किये बगैर कॉलेज छोड़ने का फैसला ले लिया। IIT बाद NIT का दूसरा सबसे प्रमुख तकनीकी संस्थान है जिसमे प्रवेश पाने के लिए बच्चों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।

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