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बड़ी खबर:- उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 444 किस्म की दवाओं को बेचने पर लगाई रोक

इन दवाओं पर बैन लगाने के पीछे की वजह जानकर आप सकते में आ जाएंगे

बड़ी खबर:- उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 444 किस्म की दवाओं को बेचने पर लगाई रोक

इन दवाओं पर बैन लगाने के पीछे की वजह जानकर आप सकते में आ जाएंगे

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आज फिर एक याचिका की सुनवाई करते हुए ऐतिहासिक फैसला दिया है। उत्तराखंड के युवाओं में बढ़ते नशे की प्रवृत्ति को देखते हुए स्वेता मासीवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिस पर सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला देते हुए उत्तराखंड में 444 किस्म की दवाओं को बेचने पर रोक लगा दी गई है। बताया जा रहा है कि जिन दवाओं को बैन किया गया है उन्हें केंद्रीय ड्रग्स नियंत्रण संगठन द्वारा नशीला पदार्थ माना गया है। कोर्ट ने धारा 77 बाल किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अंतर्गत नशीले पदार्थ की श्रेणी में थीनर, वाइटनर, सुलोचन को भी सामिल कर दिया है।

नशीला पदार्थ बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध
हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि तस्करों की पहचान के लिए सभी विभागों के तालमेल से स्पेशल सेल का गठन करें। 18 साल के बच्चों को नशीला पदार्थ बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएं। कहा कि राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों में नशा उन्मूलन क्लब का गठन करें। कोर्ट ने 4 हफ्तों के अंदर नार्कोटिक ड्रग्स के लिये नियम बनाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने राष्ट्रीय नार्कोटिक कंट्रोल पॉलिसी के सभी प्रावधानों को अमल में लाने के भी आदेश दिए हैं।

कैदियों का हो नार्कोटिक परीक्षण
कोर्ट ने कहा कि इस पर नजर रखने के लिये शिक्षा व स्वास्थ्य सचिव नोडल अधिकारी होंगे। सुनवाई के दौरान निदेशक जेल को आदेश दिया गया है कि जो भी कैदी जेल में लाया जाए, उसका नार्कोटिक परीक्षण किया जाए। अगर कैदी में ऐसे लक्षण पाये जाते हैं तो उसका इलाज नशा मुक्ति केंद्र में कराया जाए।

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