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नसों के दर्द से परेशान लोगों के लिये देवदूत बने डाॅ राहुल अवस्थी

डॉक्टर्स के प्रति विश्वास जगा रहा है कोरोनेशन अस्पताल का यह युवा डॉक्टर

नसों के दर्द से परेशान लोगों के लिये देवदूत बने डाॅ राहुल अवस्थी

डॉक्टर्स के प्रति विश्वास जगा रहा है कोरोनेशन अस्पताल का यह युवा डॉक्टर

नसों की बीमारी को हल्के में न लें, मरीज खुद न बनें डॉक्‍टर, डाॅ राहुल अवस्थी से लें जरूरी सलाह

देहरादून। आज बात एक ऐसे डाॅक्टर की जिसकी कार्यशैली को देखकर मरीजों का चिकित्सा के क्षेत्र में विश्वास वापस जगने लगा है। डॉक्टर अब भी होते हैं जिनके लिए डॉक्टर होना सिर्फ पेशा नहीं एक जि‍म्मेदारी भी है। ऐसे ही एक डाॅक्टर हैं डाॅ राहुल अवस्थी। देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल में बतौर न्यूरो सर्जन उनका अभी 8 महीने का एक छोटा सा कार्यकाल है। लेकिन अपनी कार्यशैली से उन्होंने अस्पताल आने वाले मरीजों के दिल में जो विश्वास पैदा किया है। वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। डाॅ राहुल अवस्थी के बारे में कहा जाता है कि जरूरत पड़ने पर वो घर नहीं जाते, अपने केबिन को ही घर बना लेते हैं और अपने उस कर्तव्य को पूरा करने में लगे रहते हैं। न्यूरो सर्जन राहुल अवस्थी को ईलाज के बाद मरीज के चेहरे की मुस्कुराहट देखकर बहुत शुकून मिलता है।
ईलाज के अभाव में न हो किसी की मौत, मेरे जीवन का यही उद्देश्य- राहुल अवस्थी
गरीब परिवार में जन्में डाॅ राहुल अवस्थी का बचपन से एक ही सपना था बड़े होकर डाॅक्टर बनना। माता-पिता ने उनके सपने को साकार करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। डाॅ राहुल अवस्थी ने भी खूब मेहनत से पढ़ाई की और अपने सपने को सच कर दिखाया। डाॅक्टरी में भी उन्होंने सबसे जटिल न्यूरो सर्जरी को चुना। इन्दौर से डाॅक्टरी की पढाई करने वाले डाॅक्टर राहुल अवस्थी ने इसमें भी महारथी हासिल की और कम समय में ही सफल न्यूरो सर्जन बन गये। बेंदाता अस्पताल से शुरूआत करने के बाद उत्तराखंड के सबसे बड़े अस्पताल मैक्स में भी अपनी सेवायें दी। यहां वह प्रसिद्व न्यूरो सर्जन डाॅ एके सिंह की टीम के अहम सदस्य थे। लेकिन मंहगे अस्पतालों में ईलाज न करा पाने वाले जरूरतमंद मरीजों के लिये कुछ करने की चाह इन्हें सरकारी अस्पताल कोरोनेशन मेें खींच लाई।
न्यूरो सर्जन की कमी से जूझ रहे देहरादून के तमाम सरकारी अस्पतालों और मरीजों को इनके आने से बहुत बड़ी राहत मिली। प्रदेश के कोने-कोने से आने वाले मरीज इस बात का सबूत हैं कि न्यूरों सर्जन की कितनी जरूरत थी। डाॅ अवस्थी कहते हैं कि डाॅक्टरी सेवा में पैंसा कमाना उनके जीवन का उद्देश्य नहीं है। उनके जीवन का लक्ष्य है दर्द से तड़प रहे मरीज के और उसके परिवार के चेहरे पर मुस्कुराहट लाना। मरीज और उसके परिजनों द्वारा दी जाने वाली दुवायें उनके लिये लाखों रूपयों से ज्यादा अहमियत रखती हैं। आपको बता दें कि डाॅ राहुल अवस्थी अभी तक कोरोनेशन अस्पताल में सीमित संसाधनों के बावजूद कई मरीजों की सफल जटिल सर्जियां कर चुके हैं। सरकार अगर जल्द कोरोनेशन अस्पताल में न्यूरों सर्जरी से जुड़े उपकरण मुहैया करा दे तो बड़ी संख्या में मरीजों को लाभ मिल सकेगा।
नसों की बीमारी से बचना है तो न ले तनाव
न्यूरो सर्जन डाॅ राहुल अवस्थी कहते हैं कि नसों की बीमारी में 60 से 65 फीसदी ऐसे मरीज हैं जो भागदौड़ की जिंदगी जी रहे हैं या किसी तनाव व अवसाद से परेशान हैं। ज्यादातर लोग गर्दन, कमर, बांह दर्द, नस व मांसपेशियों में कमजोरी की समस्या से जूझ रहे हैं। इसकी मुख्य वजह शरीर में कैल्शियम की कमी के साथ-साथ भोजन में पर्याप्त खनिज पदार्थ न लेना है। डाॅ राहुल अवस्थी कहते हैं कि खुद के शरीर की ठीक से देखभाल न करने और संयमित नहीं रहने से भी नसों की बीमारी होती है। सोने और बैठने के गलत तरीके से भी परेशानी बढ़ जाती है। कुर्सी पर जब भी बैठे पूरी तरह सीधा होकर बैठना चाहिए। अगर लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करना पड़ता है तो हर 35 से 40 मिनट पर उठकर थोड़ा टहल लें और शरीर को फ्री कर लें। हार्ड बेड पर सोना चाहिए। पतला तकिया का प्रयोग करना चाहिए। तकिया को मोड़कर सोने से सबसे ज्यादा सर्वाइकल की समस्या होती है। हर दिन 10 मिनट शारीरिक व्यायाम करने और आधे घंटे तक तेज चलने से इस तरह की बीमारियों से दूर रहा जा सकता है। वहीं रात में खाना खाने से पहले 10 मिनट का व्यायाम करने के बाद खाना खाएं और सोने जाएं। ऐसा करने से भी काफी राहत मिलेगी।
नसों के दर्द को नहीं करें नजरअंदाज
डाॅ राहुल अवस्थी कहते हैं कि बड़ी और टेढ़ी-मेढ़ी नसों के दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, यह बड़ी परेशानी पैदा कर सकती हैं।  इस रोग की सबसे बड़ी वजह जीवनशैली और अनहेल्दी खान-पान है। आपकी कुछ आदतों के कारण नसों में सूजन की समस्या हो सकती है। इसलिए अगर आप भी इन आदतों के शिकार हैं तो आज ही ये आदतें बदल लीजिए। डाॅ राहुल अवस्थी कहते हैं कि पैरों की नसों में सूजन और गांठें हो तो इसे सामान्य बात समझकर नजरअंदाज करना आपको भारी पड़ सकता है। अक्सर लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते और यह अल्सर बन जाता है।
हर घर में एक बीमार, दिनचर्या ने बनाया सर्वाइकल रोगी
अगर देखा जाये तो लगभग हर घर में किसी न किसी रूप में एक व्यक्ति बीमार है। दिनचर्या और व्यायाम से दूरी ने उन्हें हड्डियों से जुड़ी बीमारी जकड़ रही है। अधिकतर लोगों को कम उम्र में ही अर्थराईटिस हो रही है और सर्वाइकल का रोग भी सता रहा है। डाॅ राहुल अवस्थी कहते हैं कि एक्सरसाइज से दूरी और लाइफ स्टाइल के कारण ही ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। पिछले दो तीन साल में समस्या तेजी से बढ़ी है। शहर की अपेक्षा गांव में ऐसी शिकायत कम मिल रही है क्योंकि वहां फिजिकल वर्क अधिक होता है। बच्चों में भी तेजी से समस्या बढ़ रही है क्योंकि वह आउटडोर गेम से अधिक इनडोर गेम में लगे रहते हैं। डाॅ अवस्थी कहते हैं कि इसके लिए काफी हद तक अपार्टमेंट कल्चर और लाइफ स्टाइल जिम्मेदार है। दिनचर्या में सुधार और खान पान में बदलाव लाकर नियमित एक्सरसाइज कर हम बीमारियों से छुटकारा पा सकते हैं।

न्यूरो समस्याओं को नजरंदाज ना करें
बदलती जीवन शैली की देन है कई तरह की गंभीर बीमारियां, बदलती जीवन शैली के कारण इन दिनों न्यूरो संबंधी समस्याएं भी काफी बढ़ रही हैं, जिस पर आम तौर पर लोगों का बहुत कम ही ध्यान जाता है। डाॅ राहुल अवस्थी कहते हैं कि जीवनशैली कई बीमारियों की वजह है। खराब जीवनशैली के कारण शरीर बीमार हो जाता है और इसका खतरनाक प्रभाव दिमाग पर भी पड़ता है। न्यूरो सम्बन्धी समस्याओं से बचने के लिए हमे स्वस्थ जीवन शैली अपनाना चाहिए। जरूरी है कि हम अपनी दिनचर्या को नियंत्रित करें। रूटीन लाइफ फॉलो कर के काफी हद तक इस समस्या से बचा जा सकता है। भागमभाग जिंदगी तथा अनियमित दिनचर्या न्यूरो समस्या को बढ़ावा देती है। सुबह जल्दी जागने की आदत डालें, एक्सर साइज करें, मोर्निंग वाक करें। डॉक्टर राहुल अवस्थी कहते हैं कि  आम तौर पर कोई बीमारी होने पर लोग दवा खा लेते हैं, लेकिन न्यूरो समस्या के लिए डॉक्टर के पास तत्काल जाना जरूरी होता है, लापरवाही करने पर आपकी जान को भी खतरा हो सकता है।

 
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2 Comments

  1. ड़ा राहुल अवस्थी जी द्वारा दी गई सलाह के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

  2. साथ ही समाज के प्रति उनकी सहायतार्थ सोच के लिए भी बहुत बहुत धन्यवाद ,क्योंकि ड़ा तो बहुत बन जाते हैं परन्तु सरकारी अस्पताल में नौकरी कर समाज का कल्याण करना हर ड़ा अपना कर्तव्य आज के समय में कहाँ समझते हैं।

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