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दून में बोकचाय और चिया की खेती, डाॅ डबराल की सोच को सलाम

200 रुपये किलो बोकचाय और 4000 रुपये किलो बिकता है चिया

दून में बोकचाय और चिया की खेती, डाॅ डबराल की सोच को सलाम

200 रुपये किलो बोकचाय और 4000 रुपये किलो बिकता है चिया

गुणानंद जखमोला, वरिष्ठ पत्रकार।
गुणानंद जखमोला, वरिष्ठ पत्रकार।

देहरादून। मोथरावाला में ओएनजीसी से रिटायर डा. बीएम डबराल अपने घर में ही चाइनीज बोकचाय और विदेशी चिया की खेती का सफल प्रयोग कर रहे हैं। बोकचाय विटामिन से भरपूर है और यह फाइव स्टार होटलों में सलाद के तौर पर खाया जाता है। इसकी कीमत लगभग 200 रुपये किलो है। जबकि डा. डबराल ने सुपरफूड के रूप में प्रचलित विदेशी उत्पाद चिया की खेती को भी उगाने में सफलता हासिल की है। चिया मैक्सिको के ग्वाटेमाला में पाया जाता है। इसकी विदेशी बाजार में भारी मांग है और चिया चार हजार रुपये किलो के भाव बिकता है।

– मोथरावाला में वैज्ञानिक डा. बीएम डबराल कर रहे खेती

– ब्रोकली और गोभी का एक ही फूल उगाया

डा. डबराल के अनुसार चिया की खेती उत्तराखंड में आसानी से की जा सकती है। उनके अनुसार इस फसल को वन्य जीव भी नहीं खाते हैं और इसकी बाजार में डिमांड भी है। उनके अनुसार उन्होंने प्रयोग के तौर पर इसकी खेती की है और परिणाम सामने है। वह कहते हैं कि चिया की खेती उत्तराखंड में गर्मियों में की जाने से अधिक लाभ हासिल होगा। डा. डबराल ने अपने घर में ही रेन वाटर हारवेस्टिंग की है। इसमें मछली पालन भी कर रहे हैं साथ ही विभिन्न प्रजातियों के 150 से भी अधिक पौधे उनके आंगन में हैं। वह कई तरह के फूल भी उगा रहे हैं।

सबसे अहम बात यह है कि वह अपने खेतों में इसका प्रयोग सफल होने के बाद किसानों को मुफ्त में दे देते हैं। उनके खेतों में ब्रोकली और फूलगोभी की मिश्रित प्रजाति ब्रोको-फूलगोभी भी है जो आधी ब्रोकली है और आधी फूल गोभी।

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