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दून की आरती बनी देश की लड़कियों के लिए मिसाल

साढ़े तीन फुट कद की इस महिला IAS के काम के मुरीद हुए पीएम मोदी

दून की आरती बनी देश की लड़कियों के लिए मिसाल

साढ़े तीन फुट कद की इस IAS के काम के मुरीद हुए पीएम मोदी

देहरादून। आज बात देश की उस महिला आईएएस की जो सोशल मीडिया में अपने कामों को लेकर लगातार चर्चाओं में बनी हुई है। पीएमओ ने भी जिसके काम की जमकर तारीफ की है। इस महिला आईएएस को देखते ही सभी लोग एक ही बात बोलते हैं कद नहीं काम बोलता है। जी हां हम बात कर रहे हैं आरती डोगरा की। आईएएस आरती डोगरा ने अपनी कामयाबियों के सफर में कभी अपने कद (3 फुट, 2 इंच) को आड़े नहीं आने दिया। राजस्थान में अपने स्वच्छता मॉडल ‘बंको बिकाणो’ से पीएमओ तक मुग्ध कर देने वाली उत्तराखंड के कर्नल पिता की बिटिया आरती डोगरा राजस्थान ही नहीं पूरे देश के प्रशासनिक वर्ग में एक नई मिसाल बन चुकी हैं। हाल ही में राजस्थान सरकार ने उन्हें अजमेर कलेक्टर की अहम जिम्मेदारी सौंपी है। इससे पहले बीकानेर कलेक्टर सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रहकर आरती डोगरा अपनी काबिलियत का लोहा मनवा चुकी हैं।

मां ने कहा बेटे की कभी कमी ही नहीं हुई
आईएएस आरती डोगरा का कहना है कि पुरुष व महिला अफसरों को एक समान नजर से देखना चाहिए। कलेक्टर रहने के दौरान कई बार उन्होंने रात को दो बजे पुरुष अधिकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी ड्यूटी निभाई। उन्हें अपने अब तक के जीवन को लेकर किसी प्रकार का अफसोस नहीं है। एक अवार्ड इवेंट में आरती ने कहा कि जब उन्होंने आईएएस की परीक्षा पास की, तब कई लोग उन्हें बधाई देने पहुंचे थे। इस दौरान कुछ लोगों ने मेरी मां से कहा कि बेटी ने बेटे की कमी पूरी कर दी। इस पर मां का जवाब था- बेटे की कभी कमी ही नहीं हुई। वो हमारी बेटी है और उसने अपना काम किया है।

दून की बेटी देश के लिए मिशाल
देहरादून में पली-बढ़ी आरती डोगरा परी अजमेर (राजस्थान) में अपनी कामयाबी का परचम लहरा रही हैं। साढ़े तीन फुट कद की आरती देशभर की महिला आईएएस के प्रशासनिक वर्ग में मिसाल बनकर उभरी हैं। वर्ष देहरादून में जन्मी और ब्राइटलैंड स्कूल में पढ़ी 2006 बैच की आईएएस आरती डोगरा दून के विजय कॉलोनी की रहने वाली हैं। उनके पिता कर्नल राजेन्द्र डोरा सेना में अधिकारी और मां कुमकुम स्कूल में प्रिसिंपल रही हैं। आरती के जन्म के समय डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि उनकी बच्ची सामान्य स्कूल में नहीं पढ़ पाएगी। माता-पिता के जुनून ने उनको हौसला प्रदान किया। कर्नल पिता में ऐसा जुनून था कि बिटिया को उन्होंने न केवल खेलकूद में प्रोत्साहित किया बल्कि घुड़सवारी तक सिखाई।

मनीषा पंवार की बात मन को छू गई
स्कूल से निकल कर दिल्ली के श्रीराम लेडी कॉलेज से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन के बाद पीजी उन्होंने देहरादून से की। इस दौरान आरती की मुलाकात आइएएस और वर्तमान में प्रमुख सचिव मनीषा पंवार से हुई। इस मुलाकात ने आरती की पूरी सोच ही बदल कर रख दी। मनीषा ने उनको प्रेरित किया कि यदि वे लगन के साथ तैयारी करें तो आसानी से आईएएस अधिकारी बन सकती हैं। इसके बाद उन्होंने दृढ़ निश्चय कर लिया कि अब उन्हे वही मंजिल प्राप्त करनी है। मन लगाकर तैयारियों में जुट गईं और सफलता हासिल की। वह अपने गृह प्रदेश उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर प्रशासनिक अकादमी में ट्रेनी आईएएस अफसरों से भी ‘बंको बिकाणो’ अभियान के अनुभव कई बार साझा कर चुकी हैं।

 महिलाओं के लिए बनीं मिसाल…
– जब वे बीकानेर में डीएम थीं, तब उन्होंने ‘बंको बिकाणो’ कैंपेन की शुरुआत की।
– इसके तहत लोगों को खुले में शौच नहीं जाने के लिए प्रेरित किया गया।
– एडमिनिस्ट्रेशन के लोग सुबह गांवों में घूमकर ऐसा करने वालों को रोकते थे।
– उनके रहते गांवों में पक्के शौचालय बनवाए गए। इसकी मॉनीटरिंग मोबाइल सॉफ्टवेयर के जरिए की जाती थी।
–  कैंपेन 195 ग्राम पंचायतों में चलाया गया।
– इस कैंपेन की कामयाबी के बाद आस-पास के जिलों में भी इस पैटर्न को अपनाया गया।
– आरती डोगरा को स्टेट लेवल से लेकर नेशनल लेवल तक कई अवार्ड मिल चुके हैं।

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