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दिन में बार-बार नींद आना और रात में बार-बार नींद का टूटना

कहीं आप भी तो इस गंभीर बीमारी का शिकार नहीं हो गए?

दिन में बार-बार नींद आना और रात में बार-बार नींद का टूटना

कहीं आप भी तो इस गंभीर बीमारी का शिकार नहीं हो गए?

डाॅ अमित रौंतेला की सलाह पर ध्यान दें, नहीं तो काटने पड़ेंगे अस्पताल के चक्कर

देहरादून। आज कल की बिजी लाइफस्टाइल और दिन भर ऑफिस में भागदौड़ से इंसान इतना परेशान हो जाता है कि रात में उसे ठीक से नींद नहीं आती है। जिस तरह शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए व्यायाम की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार स्वस्थ दिल-दिमाग रखने हेतु जमकर नींद लेनी जरूरी होती है, लेकिन कुछ लोग इसे बिल्कुल नहीं समझते हैं। लोग यह नहीं जानते हैं कि ठीक से ना सो पाने के कारण आगे चलकर यह अनिद्रा नामक गंभीर बीमारी का रूप धारण कर लेता है। अनिद्रा की समस्या होने पर शरीर को और भी कई तरह के नुकसान होने लगते हैं जैसे कि इम्युनिटी का कमजोर होना, मोटापा बढ़ जाना इत्यादि. इसके अलावा रोजाना ठीक से ना सो पाने के कारण आपके दिमाग पर भी बुरा असर पड़ता है। लेकिन इसके बावजूद अधिकांश लोग कच्ची नींद उठकर काम के बोझ को कम करने में लग जाते हैं। फलस्वरूप वे दिमागी सुकून गंवा बैठते हैं। अगर आप नींद न आने से परेशान हैं तो इसका सबसे प्रमुख असर आपके व्यवहार में दिखने लगता है। थोड़ी थोड़ी देर में मूड बदलना किसी पर गुस्सा करना ये सब आम लक्षण है। अगर आपको ऐसे लक्षण दिखने लगे तो बिना देरी किये डॉक्टर के पास जाकर अपनी जांच करवाएं।

डॉक्टर अमित रौंतेला.सीनियर फिजीशियन और काॅर्डियोलाॅजिस्ट
           डॉ अमित रौंतेला.सीनियर फिजीशियन और काॅर्डियोलाॅजिस्ट

नींद न आने, दिन में नींद आने, जरूरत से ज्यादा नींद आने के तमाम कारणों और किस तरह इसमें सुधार हो सकता है को लेकर हमने बात की सोबन सिंह जीना बेस चिकित्सालय हल्द्वानी के सीनियर फिजीशियन और काॅर्डियोलाॅजिस्ट डॉक्टर अमित रौंतेला से।

डाॅ अमित रौंतेला ने बताया क्यों दिन में आती है नींद
सोबन सिंह जीना बेस चिकित्सालय हल्द्वानी के सीनियर फिजीशियन और काॅर्डियोलाॅजिस्ट डॉक्टर अमित रौंतेला ने हमारे संवाददाता से बात करते हुए दिन के समय बार-बार नींद आने और रात के समय नींद न आने या बार-बार नींद टूट जाने के बारे में विस्तार से बताया। डाॅक्टर अमित रौंतेला ने कहा कि अधिक मोटापा, सोते हुए खरार्टें लेना, रात के समय जरूरत से ज्यादा भोजन लेना, नींद की दवाईयों के ओवर डोज लेना, यह कुछ बड़े कारण है रात के समय नींद के बार-बार टूटने के। डाॅ रौंतेला कहते है कि बहुत से लोगों का मानना होता है कि शराब पीने से अच्छी नींद आती है। लेकिन ऐसा नहीं है। इससे से कच्ची नींद आती है और बैचेनी बढ़ती है।

डॉक्टर अमित रौंतेला.सीनियर फिजीशियन और काॅर्डियोलाॅजिस्ट
डॉ  अमित रौंतेला. सीनियर फिजीशियन और काॅर्डियोलाॅजिस्ट

जरूरत से ज्यादा कम्प्यूटर, लैपटाॅप व मोबाइल का इस्तेमाल न करें
डाॅ अमित रौंतेला ने कहा कि रात में नींद न आने की बड़ी वजह आधुनिक जीवन शैली भी है। इस तकनीकी युग में अधिकांश लोग कम्प्यूटर, लैपटाॅप व मोबाइल का जमकर इस्तेमाल करते हैं। यही नहीं सोशल मीडिया पर भी लोग जरूरत से ज्यादा विजी रहते हैं। कुछ लोगों की आदत होती है कि वह सोने से पहले मोबाइल, टीवी और कम्प्यूटर का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।

स्लीप डिसऑर्डर है खतरनाक
डाॅ अमित रौंतेला कहते हैं कि स्लीप डिसऑर्डर होने से आपकी फोकस और कंसन्ट्रेट करने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होने लगती है। इसका सीधा असर आपकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ पर पड़ने लगता है। जब आप रात में भरपूर 8 घंटे की नींद पूरी करते हैं तो अगले पूरे दिन आप एकदम अलर्ट और ऊर्जा से भरपूर रहते हैं। लेकिन जब आप ठीक से सो नहीं पाते हैं तो ना आप घर के काम ठीक से कर पाते हैं ना ही ऑफिस के।

ये हैं स्लीप एपनिया के लक्षण
डाॅ अमित रौंतेला के अनुसार, गलत समय पर सोने खरांटे भरना, अचानक से सांस रुक जाना, नींद का बार-बार टूटना और दिन में ज्यादा नींद आना स्लीप एपनिया के लक्षण हैं।

बार-बार नींद आने का कारण “हायपरसोम्निया” भी हो सकता है?
डाॅ अमित रौंतेला कहते हैं कि मेरी सभी लोगों को सलाह है कि भूलकर भी ऐंसा न करें। इससे आंखे थक जाती हैं और नींद नहीं आती। इस कारण दिन में नींद आती है। डाॅ रौतेला कहते हैं कि रात को देर से सोने, थकान और कमजोरी की वजह से दिन में नींद आती है। लेकिन बार-बार नींद आने का एक और कारण भी हो सकता है। यह है एक प्रकार की बीमारी, जिसे “हायपरसोम्निया” कहा जाता है। इस बीमारी से बचने के लिए औसतन 8 घंटे की नींद ले। एक निश्चित समय पर सोने और उठने का नियम बनाएं। इस कारण इस बीमारी से छुटकारा मिल सकता है। संतुलित भोजन लें। दिन में कम से कम तीन बार भोजन करें। तली-भुनी चीजों से परहेज करें। सोने से पहले एल्कोहल का सेवन न करें। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आपको एक अच्छी नींद का आना बेहद जरूरी है। अगर आप जरूरत से ज्यादा नींद ले लेते हैं तो आपको दिनभर सुस्ती रहती है।

       डॉ अमित रौंतेला.सीनियर फिजीशियन और काॅर्डियोलाॅजिस्ट
डॉ अमित रौंतेला.    सीनियर फिजीशियन और काॅर्डियोलाॅजिस्ट

आधी आबादी कटस्ट्रोफिसिंग या नाईट ड्रेड से पीड़ित
दिन भर की थकान के बाद अगर सुकून की नींद मिल जाए तो दूसरे दिन नई शुरुआत करना बहुत ही फ्रेश होता है। अगर आपकी आंख भी रात में सोते समय बेमतलब ही कई बार खुलती है तो आप कटस्ट्रोफिसिंग या नाइट ड्रेड नामक बीमारी के शिकार हो सकते हैं। किसी भी चिंता की वजह से रात को नींद का टूट जाना, बेचैनी महसूस होना, मन उदास होना, तनाव और पसीने का आना आदि आम लक्षण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर की आधी आबादी कटस्ट्रोफिसिंग या नाईट ड्रेड से पीड़ित हैं, जिससे आधी रात में वह नींद में चैंक कर बैठ जाता है। तनाव भरी जिंदगी, ऑफिस का ज्यादा काम, रिश्ते में उतार-चढ़ाव या फिर व्यस्त जिंदगी, आपको रात में चैन की नींद सोने नहीं देती। इस समस्या को इंसोमेनिया के साथ ना जोड़ें तो ही अच्छा है। किसी भी चिंता की वजह से रात को नींद का टूट जाना, बेचैनी महसूस होना, मन उदास होना, तनाव और पसीने का आना आदि आम लक्षण हैं।

नींद खराब होने से बुरे प्रभाव
चिड़चिड़ापन
एसिड रीफ्लक्स
काम ठीक से ना कर पाना
मोटापा और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाना
टाइप 2 मधुमेह होना

अच्छी नींद के लिए डाॅ अमित रौंतेला की सलाह
सोने से पहले आवश्यकता से अधिक भोजन न करें।
रात में हल्का और पौष्टिक भोजन लें।
खाना खाने के बाद नियमित रूप से थोड़ी तैराकी या टहलना ठीक रहता है। व्यायाम करना ज्यादा अच्छा रहता है।
उंचे तकिए का इस्तेमाल न करें।
बिस्तर एवं शयन कक्ष आरामदायक हो, बहुत ठंडा या गरम न हो
इस बात का ध्यान रखे कि आपका गद्दा आपके लिए उपयुक्त और आरामदायक हो।
अगर आप सो नहीं पाते हैं तो उठ जाएं और कुछ ऐसा करें जिससे आपको हल्का महसूस हो जैसे पढ़ना, टीवी देखना या हल्का संगीत सुनना और जब आप थकान महसूस करें तो फिर से सोने जायें।

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